3.48 अरब साल पहले पृथ्‍वी से टकराया था पहला उल्‍कापिंड! मची थी भारी तबाही, वैज्ञानिकों ने दिए सबूत

रिसर्चर्स ने अपनी खोज को बीते सप्‍ताह 54वीं लूनार एंड प्‍लैनेटरी साइंस कॉन्‍फ्रेंस में पेश किया, हालांकि इनका रिव्‍यू होना बाकी है।

विज्ञापन
Written by प्रेम त्रिपाठी, Edited by आकाश आनंद, अपडेटेड: 27 मार्च 2023 10:59 IST
ख़ास बातें
  • वैज्ञानिकों की एक टीम ने किया है दावा
  • नई स्‍डटी को रिव्‍यू नहीं किय गया है अभी
  • ऑस्‍ट्रेलिया में खोजे गए हैं उल्‍कापिंडों के अवशेष

2019 में वैज्ञानिक इन अवशेषों तक पहुंचे थे, जिन्‍हें स्फेरूल (spherules) कहा जा रहा है।

उल्कापिंड (Meteorite) और एस्‍टरॉयड (Asteroid) दोनों ऐसी चट्टानी आफतें हैं, जो पृथ्‍वी से टकराने पर बड़ी तबाही ला सकते हैं। अतीत में ऐसा हुआ भी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि करोड़ों साल पहले धरती से डायनासोरों का खात्‍मा एक एस्‍टरॉयड की टक्‍कर के बाद हुए विनाश से हुआ था। इसी तरह से उल्‍कापिंड भी हमारे ग्रह से टकराते रहे हैं। वर्षों से वैज्ञानिक इनके इतिहास को टटोल रहे हैं। अब उन्‍होंने 3.48 अरब साल पुराने चट्टान के टुकड़ों का पता लगाया है। वैज्ञानिकों को लगता है कि ये किसी उल्‍कापिंड के पृथ्‍वी से टकराने का पहला सबूत हो सकते हैं। चट्टान के टुकड़े ऑस्‍ट्रेलिया में मिले हैं। 

वैज्ञानिकों को लगता है कि जब उल्‍कापिंड धरती से टकराया होगा तो उसने बड़ी तबाही मचाई होगी। उल्‍कापिंड चकनाचूर होकर इधर-उधर बिखर गया होगा और पृथ्‍वी के गर्म वातावरण में उसके टुकड़े पिघल गए होंगे। जब पृथ्‍वी ठंडी हुई होगी, तब उल्‍कापिंड के अवशेष दोबारा वजूद में आए होंगे। रिसर्चर्स ने अपनी खोज को बीते सप्‍ताह 54वीं लूनार एंड प्‍लैनेटरी साइंस कॉन्‍फ्रेंस में पेश किया, हालांकि इनका रिव्‍यू होना बाकी है। 

रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने उल्‍कापिंड के सबूत पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में पिलबारा क्रेटन से खोजे हैं। उल्‍कापिंडों के असर के अबतक के सबसे पुराने सबूत भी पिलबारा क्रेटन में ही मिले हैं, जोकि 3.47 अरब साल पुराने माने जाते हैं। उसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका में कापवाल क्रेटन में भी 3.45 अरब साल पुराने उल्‍कापिंड के अवशेष पाए गए हैं। मौजूदा सबूत 3.48 अरब साल आंके जा रहे हैं, जोकि एक रिकॉर्ड है। 

बताया जाता है कि साल 2019 में वैज्ञानिक इन अवशेषों तक पहुंचे थे, जिन्‍हें स्फेरूल (spherules) कहा जा रहा है। आइसोटोप की मदद से वैज्ञानिकों ने अवशेषों की डेटिंग की। यह काफी विश्‍वसनीय डेटिंग तकनीक मानी जाती है। डेटिंग के बाद वैज्ञानिक इस निष्‍कर्ष पर पहुंचे कि अवशेषों की रासायनिक संरचना उन्‍हें इस ग्रह का नहीं बनाती। दिलचस्‍प यह है कि रिसर्चर्स की इस स्‍टडी का रिव्‍यू होना अभी बाकी है। उल्‍कापिंडों के पृथ्‍वी से टकराने का सबूत देने वाली कई स्‍टडी विवादास्‍पद रही हैं। साइंटिस्‍टों के बीच टकराव भी देखने को मिला है। हालिया स्‍टडी पर अन्‍य वैज्ञानिकों का क्‍या रुख रहता है, यह देखने वाली बात होगी। 
 

 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. JioPC हुआ अनाउंस: TV को बना देगा पावरफुल AI कंप्यूटर! जानें सब कुछ
  2. Vivo का वाटरप्रूफ स्मार्टफोन मिल रहा 9000 से भी ज्यादा सस्ता, यहां आई तगड़ी डील
#ताज़ा ख़बरें
  1. Blood Moon 2025: 7-8 सितंबर की रात लाल हो जाएगा चांद, भारत में भी दिखेगा ब्लड मून, जानें सब कुछ
  2. टैबलेट खरीदने का प्लान? ये हैं भारत में टॉप 5 ब्रांड्स, Lenovo दूसरे और Apple तीसरे नंबर पर
  3. Realme GT 8 सीरीज में होगा 200 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा
  4. OnePlus 15 में मिल सकता है Snapdragon 8 Elite 2 चिपसेट, Geekbench पर हुई लिस्टिंग
  5. Realme 15T अगले महीने होगा भारत में लॉन्च, 7,000mAh की बैटरी
  6. WhatsApp पर डिसअपीयरिंग मैसेज जल्दी होगा गायब, कंपनी ला रही नया फीचर
  7. JioPC हुआ अनाउंस: TV को बना देगा पावरफुल AI कंप्यूटर! जानिए सब कुछ
  8. Honor Magic V5 फोल्डेबल फोन 64MP कैमरा, 5820mAh बैटरी के साथ लॉन्च, जानें सबकुछ
  9. Samsung ने लॉन्च किया Galaxy Book 5, Intel Core Ultra 7 प्रोसेसर
  10. JioFrames: Jio का AI वाला स्मार्ट चश्मा हुआ अनाउंस, Meta के स्मार्ट ग्लासेस को मिला तगड़ा राइवल!
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2025. All rights reserved.