सैटेलाइट से घर-घर इंटरनेट पहुंचाने के लिए SpaceX ने लॉन्‍च किया 46 स्‍टारलिंक उपग्रहों का नया बैच

स्टारलिंक एक सैटेलाइट बेस्‍ड ग्‍लोबल इंटरनेट सिस्‍टम है। इसे स्पेसएक्स डेवलप कर रही है, ताकि दुनिया के कम सर्विस वाले क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच बनाई जा सके।

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गैजेट्स 360 स्टाफ, अपडेटेड: 11 जुलाई 2022 16:15 IST
ख़ास बातें
  • भारतीय समय के अनुसार, आज सुबह 7:09 बजे यह लॉन्‍च किया गया
  • स्पेसएक्स ने ट्विटर पर इस लॉन्च को लाइव स्ट्रीम किया
  • 2,700 स्टारलिंक सैटेलाइट्स को लॉन्‍च कर चुकी है स्‍पेसएक्‍स

लॉन्‍च के एक घंटे बाद 46 सैटेलाइट्स के डिप्‍लॉयमेंट को कन्‍फर्म कर दिया गया।

एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) ने रविवार को स्टारलिंक इंटरनेट सैटेलाइट्स का एक और बैच लो-अर्थ ऑर्बिट में लॉन्च किया। कैलिफोर्निया के स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स 4 ईस्ट से फाल्कन-9 रॉकेट पर 46 सैटेलाइट्स ने एकसाथ उड़ान भरी। भारतीय समय के अनुसार, आज सुबह 7:09 बजे यह लॉन्‍च किया गया। स्पेसएक्स ने ट्विटर पर इस लॉन्च को लाइव स्ट्रीम किया। इसमें रॉकेट के बारे में अपडेट दिया गया। लॉन्‍च के एक घंटे बाद 46 सैटेलाइट्स के डिप्‍लॉयमेंट को कन्‍फर्म कर दिया गया। 

कंपनी ने बताया है कि बाकी स्पेसएक्स रॉकेटों की तरह इस रॉकेट से अलग हुआ मिशन का फर्स्‍ट स्‍टेज बूस्टर एक ड्रोनशिप पर वापस उतर गया है। इसका नाम है- "ऑफ कोर्स आई स्टिल लव यू"। स्पेसडॉटकॉम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह फाल्कन-9 रॉकेट का छठा लॉन्‍च था। इससे पहले इसने अर्थ-ऑब्‍जर्वेशन सैटेलाइट ‘सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच' और स्टारलिंक इंटरनेट सैटेलाइट्स के तीन बैचों को लॉन्च किया है। ‘सेंटिनल-6 माइकल फ्रीलिच' नाम का सैटेलाइट अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का डबल एस्‍टरॉयड रीडायरेक्‍शन टेस्‍ट मिशन है। 
 

स्टारलिंक एक सैटेलाइट बेस्‍ड ग्‍लोबल इंटरनेट सिस्‍टम है। इसे स्पेसएक्स डेवलप कर रही है, ताकि दुनिया के कम सर्विस वाले क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच बनाई जा सके। इसी क्रम में स्पेसएक्स ने साल 2019 के बाद से लगभग 2,700 स्टारलिंक सैटेलाइट्स को लो-अर्थ ऑर्बिट में लॉन्च किया है। अमेरिका समेत कई देशों में स्‍टारलिंक की सर्विस शुरू हो गई हैं। वहां इसे इस्‍तेमाल करने का खर्च 110 डॉलर प्रतिमाह के आसपास है। 
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हालांकि स्‍टारलिंक इस सेक्‍टर में अकेली नहीं है। सैटेलाइट ऑपरेटर वनवेब समेत जेफ बेजोस का कुइपर प्रोजेक्‍ट यहां स्‍टारलिंक को चुनौती देने पर काम कर रहे हैं। ये कंपनियां भी जल्‍द अपना सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क शुरू करने वाली हैं। इसके बाद इस क्षेत्र में प्रतियोगिता बढ़ेगी। अनुमान है कि इसका फायदा यूजर्स को मिलेगा, क्‍योंकि उन्‍हें टैरिफ में छूट ऑफर हो सकती है। 

इस सेक्‍टर में लीड करने के लिए स्‍टारलिंक कई डील भी कर रही है। एक डील के तहत फ्लाइट में भी वायरलेस इंटरनेट की सुविधा देने की तैयारी है। कंपनी ने सेमी प्राइवेट जेट सर्विस JSX के साथ डील की है जिसमें 100 हवाई जहाजों में स्टारलिंक टर्मिनल लगाए जाएंगे। कंपनी का कहना है कि इस साल के अंत तक स्टारलिंक नेटवर्क से जुडा पहला प्लेन उड़ान भरने के लिए तैयार होगा। 
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