5 साल बाद पृथ्‍वी पर पहुंचा बेहद खतरनाक G4 सौर तूफान, अब क्‍या होगा? जानें

इन तूफानों की वजह से अस्‍थायी रूप से रेडियो ब्‍लैकआउट हो सकता है, जिससे नेविगेशन सिस्‍टम, विमान आदि के संचालन पर असर हो सकता है। पावर ग्रिड प्रभावित हो सकते हैं।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, Edited by आकाश आनंद, अपडेटेड: 24 मार्च 2023 11:55 IST
ख़ास बातें
  • सूर्य के वातावरण में हुए छेद से निकला सौर तूफान
  • 11 साल के सौर चक्र से गुजर रहा है सूर्य
  • बहुत अधिक एक्टिव फेज में है हमारा सूर्य

आज पृथ्‍वी को प्रभावित करने वाले सौर तूफान की वजह से ऑरोरा (aurora) दिखाई दे सकते हैं।

हमारा सूर्य (Sun) अजीब व्‍यवहार कर रहा है। अपने 11 साल के सौर चक्र के कारण सूर्य बहुत एक्टिव फेज में है। उसमें सनस्‍पॉट उभर रहे हैं, जो सोलर फ्लेयर्स (Solar Flare), कोरोनल मास इजेक्‍शन (CME) और सौर तूफान (Solar Storm) आदि रिलीज कर रहे हैं। इनकी दिशा पृथ्‍वी की ओर हो, तो उसके भयानक परिणाम हो सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सूर्य के वातारवण में एक छेद का पता बीते दिनों चला था। इससे खतरनाक सौर हवाएं निकल रही हैं। इन कारणों से एक सौर तूफान पृथ्‍वी की ओर आ रहा है। ;यह हमारे ग्रह तक पहुंच गया है।  

नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्‍फ‍ियरिक एडमिनिस्‍ट्रेशन (NOAA) ने कहा है कि सूर्य में हो रही हचललों की वजह से आज हमारे ग्रह तक खतरनाक सौर हवाएं पहुंच रही हैं, इनके कारण G4 कैटिगरी का भू-चुंबकीय (geomagnetic storm) तूफान पृथ्‍वी को प्रभावित कर रहा है। बताया G4 क्‍लास का भूचुंबकीय तूफान है।  

 

आप सोच रहे होंगे कि सूर्य से आने वाले तूफान पृथ्‍वी के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ये तूफान पृथ्‍वी को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करते। आम लोगों को कोई नुकसान नहीं होता। इन तूफानों की वजह से अस्‍थायी रूप से रेडियो ब्‍लैकआउट हो सकता है, जिससे नेविगेशन सिस्‍टम, विमान आदि के संचालन पर असर हो सकता है। पावर ग्रिड प्रभावित हो सकते हैं। तूफान बहुत अधिक शक्तिशाली हो तो अंतरिक्ष में हमारे सैटेलाइट्स को तबाह कर सकता है। 

आज पृथ्‍वी को प्रभावित करने वाले सौर तूफान की वजह से ऑरोरा (aurora) दिखाई दे सकते हैं। ऑरोरा (aurora) आकाश में बनने वाली खूबसूरत प्राकृतिक रोशनी है। यह रात के वक्‍त आमतौर पर नॉर्थ और साउथ पोल्‍स के पास देखने को मिलती है। लंबे समय से वैज्ञानिक यह मानते आए हैं कि ऑरोरा तब बनते हैं, जब सौर हवाएं पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से इंटरेक्‍ट करती हैं।  रिपोर्टों के अनुसार, सूर्य के वातावरण में छेद होना आम बात है, लेकिन इनका आकार अधिक हो, तो वैज्ञानिक चिंतित हो जाते हैं।  
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बात करें कोरोनल मास इजेक्‍शन यानी CME की, तो ये सौर प्लाज्मा के बड़े बादल होते हैं। सौर विस्फोट के बाद ये बादल अंतरिक्ष में सूर्य के मैग्‍नेटिक फील्‍ड में फैल जाते हैं। अंतरिक्ष में घूमने की वजह से इनका विस्‍तार होता है और अक्‍सर यह कई लाख मील की दूरी तक पहुंच जाते हैं। कई बार तो यह ग्रहों के मैग्‍नेटिक फील्‍ड से टकरा जाते हैं। जब इनकी दिशा की पृथ्‍वी की ओर होती है, तो यह जियो मैग्‍नेटिक यानी भू-चुंबकीय गड़बड़ी पैदा कर सकते हैं। इनकी वजह से सैटेलाइट्स में शॉर्ट सर्किट हो सकता है और पावर ग्रिड पर असर पड़ सकता है। इनका असर ज्‍यादा होने पर ये पृथ्‍वी की कक्षा में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को भी खतरे में डाल सकते हैं। 
 
वहीं, जब सूर्य की चुंबकीय ऊर्जा रिलीज होती है, तो उससे निकलने वाली रोशनी और पार्टिकल्‍स से सौर फ्लेयर्स बनते हैं। हमारे सौर मंडल में ये फ्लेयर्स अबतक के सबसे शक्तिशाली विस्फोट हैं, जिनमें अरबों हाइड्रोजन बमों की तुलना में ऊर्जा रिलीज होती है। 
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