Medical Innovation

Medical Innovation - ख़बरें

  • भारत के Medical Dialogues ने जीता Google का JournalismAI इनोवेशन चैलेंज
    वैश्विक स्तर पर आयोजित #JournalismAI Innovation Challenge का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पत्रकारिता में इनोवेशन को बढ़ाना और इसके भविष्य को बेहतर बनाना है। यह प्रतिस्पर्धा समाचार संगठनों को ऑडिएंस का जुड़ाव और रेवेन्यू में ग्रोथ को बढ़ाने् के लिए AI से जुड़े सॉल्यूशंस को तलाशने के लिए सशक्त बनाती है।
  • स्मार्ट गैजेट्स के बाद अब स्मार्ट दवा! चिप वाली गोली पेट में जाके भेजेगी सिग्नल, जानें किस काम आएगी
    MIT की नई रिसर्च में एक स्मार्ट पिल पेश की गई है, जो मरीज के पेट में पहुंचते ही रेडियो सिग्नल भेजकर यह कन्फर्म कर देती है कि दवा निगली जा चुकी है। इस पिल में बायोडिग्रेडेबल RF एंटीना का इस्तेमाल किया गया है, जो कुछ दिनों में शरीर के अंदर घुल जाता है। रिसर्चर्स का कहना है कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है, जिन्हें ट्रांसप्लांट, टीबी या HIV जैसी बीमारियों में नियमित दवा लेना जरूरी होता है। इससे डॉक्टर मरीज की दवा लेने की आदत पर बेहतर नजर रख सकेंगे।
  • सरकारी अस्पतालों में AI की एंट्री, आम से गंभीर बिमारियों का पता लगाएगा देश का पहला AI क्लिनिक
    भारत के सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम में एक अहम कदम उठाते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित GIMS में देश का पहला सरकारी अस्पताल आधारित AI क्लिनिक शुरू किया गया है। यह क्लिनिक GIMS Centre for Medical Innovation के तहत स्थापित किया गया है, जहां डॉक्टरों और मरीजों को AI आधारित हेल्थकेयर सॉल्यूशन्स का बेनिफिट मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य हेल्थकेयर स्टार्टअप्स को रियल-वर्ल्ड क्लिनिकल एनवायरनमेंट में अपने सॉल्यूशन्स को टेस्ट और वैलिडेट करने का मौका देना है। इससे इलाज को ज्यादा सटीक, तेज और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाने में मदद मिलेगी।
  • दुनिया का सबसे छोटा रोबोट तैयार, साइज रेत जैसा लेकिन सोचने और चलने की ताकत
    University of Pennsylvania और University of Michigan के वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे छोटे पूरी तरह प्रोग्रामेबल और ऑटोनॉमस रोबोट तैयार किए हैं। ये माइक्रो रोबोट रेत के एक दाने से भी छोटे हैं और लाइट की मदद से चलते व प्रोग्राम होते हैं। रिसर्च के मुताबिक, ये रोबोट अपने आसपास के माहौल को सेंस कर सकते हैं और ग्रुप में मिलकर भी काम कर सकते हैं। Science Robotics और PNAS में प्रकाशित स्टडीज़ के अनुसार, इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में मेडिकल ट्रीटमेंट, सेल-लेवल हेल्थ मॉनिटरिंग और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

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