Nasa के ‘हेलीकॉप्‍टर’ की मंगल ग्रह पर इमरजेंसी लैंडिंग, चारों ब्‍लेड टूटे, अब साइंटिस्‍ट कर रहे यह तैयारी

Nasa Ingenuity : पिछले महीने 18 जनवरी को इन्जनूअटी 72वीं और आखिरी बार उड़ान पर निकला था।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 2 फरवरी 2024 16:43 IST
ख़ास बातें
  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने दी जानकारी
  • इन्जनूअटी हेलीकॉप्‍टर का सफर लगभग खत्‍म
  • साल 2021 से मंगल ग्रह पर भर रहा था उड़ान

आखिरी उड़ान के दौरान हेलीकॉप्‍टर 12 मीटर की ऊंचाई तक गया था और नीचे उतरने से पहले 4.5 सेकंड तक मंडराता रहा।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के इन्जनूअटी (Ingenuity) हेलीकॉप्‍टर ने लगभग दम तोड़ दिया है! यह हेलीकॉप्‍टर साल 2021 से मंगल ग्रह पर उड़ान भर रहा था और कई रिकॉर्ड अपने नाम किए थे। अब नासा ने बताया है कि इन्जनूअटी के पंख यानी ब्‍लेड लगभग खराब हो गए हैं और वह उड़ान नहीं भर पाएगा। इस हेलीकॉप्‍टर को अपनी आखिरी लैंडिंग में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पिछले महीने 18 जनवरी को इन्जनूअटी 72वीं और आखिरी बार उड़ान पर निकला था।   

वह एक शॉर्ट वर्टिकल फ्लाइट थी, जिसे इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। नासा की जेट प्रोपल्‍शन लेबोरेटरी (JPL) के इंजीनियर साइलेंट पड़ चुके हेलीकॉप्‍टर के रोटरों को एक्टिव करने की योजना बना रहे हैं, ताकि इमरजेंसी लैंडिंग में हुए नुकसान का पता लगाया जा सके। 

बताया जाता है कि आखिरी उड़ान के दौरान हेलीकॉप्‍टर 12 मीटर की ऊंचाई तक गया था और नीचे उतरने से पहले 4.5 सेकंड तक मंडराता रहा। रिपोर्ट के अनुसार मंगल ग्रह की सतह से एक मीटर ऊपर हेलीकॉप्‍टर का पर्सवेरेंस रोवर से संपर्क टूट गया और वह लड़खड़ाता हुआ गिर गया। 
 

याद रहे कि पर्सवेरेंस रोवर ही इन्जनूअटी हेलीकॉप्‍टर के साथ कम्‍युनिकेशन स्‍थापित करता है। इमरजेंसी लैंडिंग के बाद जो तस्‍वीर वैज्ञानिकों को मिली, उससे पता चला कि इन्जनूअटी के चारों ब्‍लेड को नुकसान पहुंचा है। इससे नासा को कितना नुकसान हुआ, यह अभी नहीं कहा जा सकता क्‍योंकि इन्जनूअटी हेलीकॉप्‍टर को लिमिटेड टाइम के लिए मंगल ग्रह पर उड़ान भरने के मकसद से रवाना किया गया था। हेलीकॉप्‍टर ने अपना लक्ष्‍य पहले ही हासिल कर लिया था। 
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इन्जनूअटी ने फरवरी 2021 में मंगल ग्रह पर लैंड किया था। उसी साल 19 अप्रैल को हेलीकॉप्‍टर ने ‘एलियंस की दुनिया' में अपनी पहली उड़ान भरी थी। इन्जनूअटी हेलीकॉप्‍टर से जो भी डेटा पर्सवेरेंस की टीम को मिला, उसका आकलन आने वाले मंगल मिशनों के लिए मददगार हो सकता है। मंगल ग्रह पर हेलीकॉप्‍टर का लिए उड़ान भरना काफी मुश्किल है, क्‍योंकि वहां पृथ्‍वी से एक तिहाई कम गुरुत्‍वाकर्षण है।
 
 

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