मंगल ग्रह है या रेड वेलवेट केक, यूरोपियन स्‍पेस एजेंसी ने दिखाई Mars की शानदार तस्‍वीर

इस इमेज में 4 किलोमीटर चौड़ा गड्ढा भी दिखाई देता है। ESA के मुताबिक, यह गड्ढा वास्तिटास बोरेलिस रीजन में है, जोकि मंगल ग्रह के उत्तरी ध्रुव के पास एक मैदानी इलाका है।

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गैजेट्स 360 स्टाफ, अपडेटेड: 4 जनवरी 2022 14:03 IST
ख़ास बातें
  • यूरोपियन स्‍पेस एजेंसी (ESA) ने एक इमेज रिलीज की है
  • यह मंगल ग्रह के आसपास के इलाके को दर्शाती है
  • इसमें मंगल ग्रह बेहद खूबसूरत नजर आता है जैसे कोई केक सजाया गया हो

ESA और रूसी स्‍पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) के जॉइंट मिशन TGO ने पिछले साल जुलाई में यह तस्‍वीर खींची थी।

Photo Credit: ESA/Roscosmos/CaSSIS

मंगल (Mars) ग्रह लंबे समय से खगोलविदों के लिए पहेली रहा है। हाल ही में यूरोपियन स्‍पेस एजेंसी (ESA) ने एक इमेज रिलीज की है। यह मंगल ग्रह के आसपास के इलाके को दर्शाती है। इस तस्‍वीर को ‘ट्रेस गैस ऑर्बिटर' (TGO) ने खींचा है। इसमें मंगल ग्रह बेहद खूबसूरत नजर आता है, जैसे कोई केक सजाया गया हो। ESA ने कहा है कि यह इमेज मंगल ग्रह को ऐसा दिखाती है, जैसे एक ‘रिच रेड वैलवेट केक' पर शुगर पाउडर छिड़का गया है। 

लेकिन शुगर पाउडर जैसा दिखने वाला यह वाइट कलर क्‍या है और कहां से आया? ESA ने बताया है कि यह कलर पानी और बर्फ की वजह से है। वहीं, रेड कलर जंग लगी हुई मार्टियन मिट्टी की वजह से नजर आता है। इस इमेज में 4 किलोमीटर चौड़ा गड्ढा भी दिखाई देता है। ESA के मुताबिक, यह गड्ढा वास्तिटास बोरेलिस रीजन में है, जोकि मंगल ग्रह के उत्तरी ध्रुव के पास एक मैदानी इलाका है। ESA और रूसी स्‍पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) के जॉइंट मिशन TGO ने पिछले साल जुलाई में यह तस्‍वीर खींची थी। 

ESA ने बताया कि तस्‍वीर में नजर आने वाला गड्ढा बर्फ से भरा है। इस इलाके में पूरे साल बहुत कम समय के लिए सूर्य दिखाई देता है। स्‍पेस एजेंसी के मुताबिक, फोटो में दिख रहा रिम के आस-पास का गहरा इलाका ज्वालामुखी के मटीरियल जैसे- बेसाल्ट से बना हुआ हो सकता है। 

यूरोपियन और रूसी स्‍पेस एजेंसियों ने एक्सोमार्स (ExoMars) प्रोग्राम के तहत मंगल ग्रह पर ऑर्बिटर भेजा है। यह इस साल के अंत में मंगल पर एक रोवर भी भेजने वाले हैं। TGO इस ग्रह की वायुमंडलीय गैसों की स्‍टडी कर रहा है। इसके साथ ही मंगल की सतह और उसके आसपास पानी के रिर्सोसेज की तलाश की जा रही है। हाल ही में वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर बड़ी मात्रा में ‘छुपे हुए पानी' के बारे में भी पता चला था। यह ‘पानी' वहां एक घाटी की सतह के नीचे है। 

ऑर्बिटर ने मंगल ग्रह पर पहुंचने के दो साल बाद यानी 2018 में अपनी खोज शुरू की थी। साल 2023 में मंगल ग्रह पर आने वाले दूसरे एक्सोमार्स मिशन के लिए यह डेटा रिले सर्विसेज देने का काम भी करेगा।  
 
 

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ये भी पढ़े: mars, mars new image, TGO, Roscosmos, ESA, ExoMars

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