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Alien Alert : पृथ्‍वी पर आने वाले एस्‍टरॉयड्स का एलियंस से हो सकता है कनेक्‍शन! 60 साल पुराने सवाल का मिला जवाब

जिस कपाउंड को लैब में तैयार किया गया, वह उल्‍कापिंडों में कहां से आया। वर्षों बाद इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की गई है।

Alien Alert : पृथ्‍वी पर आने वाले एस्‍टरॉयड्स का एलियंस से हो सकता है कनेक्‍शन! 60 साल पुराने सवाल का मिला जवाब

आज से करीब 60 साल पहले हुई घटनाओं ने एक नई रिसर्च में सुलझाने की कोशिश की गई है।

ख़ास बातें
  • कुछ उल्‍कापिंडों में मिले कंंपाउंड्स ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया था
  • वो कंपाउंड लैब में तैयार किए गए थे
  • आखिर लैब में तैयार कंंपाउंड उल्‍कापिंडों या एस्‍टरॉयड में कैसे आए
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पृथ्‍वी की कक्षा में प्रवेश कर हमारे ग्रह पर पहुंचने वाले एस्‍टरॉयड्स (Asteroid) या उल्‍कापिंडों का कनेक्‍शन क्‍या एलियंस से हो सकता है। एक नई रिसर्च ऐसी ही संभावनाओं पर प्रकाश डालती है। आज से करीब 60 साल पहले हुई घटनाओं ने वैज्ञानिकों को हैरान किया हुआ है। कई साल पहले पृथ्‍वी से टकराने वाले एस्‍टरॉयड्स में वैज्ञानिकों को ऐसा कपाउंड मिला था, जिसे उनके मिलने से कुछ साल पहले ही लैब में तैयार किया गया था। जिस कपाउंड को लैब में तैयार किया गया, वह उल्‍कापिंडों में कहां से आया। इस सवाल ने वर्षों तक वैज्ञानिकों को उलझाए रखा है। वर्षों बाद इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की गई है।

डेली स्‍टार की रिपोर्ट के अनुसार, साल 1957 से 1968 के बीच वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में नए खनिजों का निर्माण किया। वैज्ञानिकों को उम्‍मीद थी कि ये कंपाउंड बिजली के बेहतर संवाहक (conductors) होंगे। उन्हें हीडाइट (heideite) और ब्रेजि‍नाइट (brezinaite) नाम दिया गया।

दोनों ही कंपाउंड पूरी तरह से लैब में तैयार हुए थे, लेकिन कुछ ही साल बाद यह पृथ्वी पर आने उल्कापिंडों (meteorites) के टुकड़ों में दिखाई देने लगे। आखिर लैब के बाहर डेवलप हुए ये कंपाउंड स्‍पेस रॉक्‍स में कैसे पहुंचे, इसका जवाब आज भी अनसुलझा है। अब भौतिक विज्ञानी एंबैड ने इसका जवाब देने की कोशिश की है। वह सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ वेनेजुएला से जुड़े हैं। 

एंबैड में अपनी स्‍टडी में जो कहा है, उसका पियर-रिव्‍यू होना अभी बाकी है। वह कहते हैं कि ये कंपाउंड किसी और प्रजाति द्वारा बनाए जा सकते हैं। ये टेक्‍नोसिग्‍नेचर के सबूत हैं। टेक्‍नोसिग्‍नेचर, बायोसिग्‍नेचर के समान हैं, जो जीवन की उपस्थिति का संकेत देते हैं। यह भी प्रस्‍ताव दिया जा चुका है कि एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस (SETI) सर्च का नाम बदलकर ‘द सर्च फॉर टेक्नोसिग्नेचर' कर दिया जाए।

अपने शोध में एंबैड खुले दिमाग से सोचने के लिए कहते हैं। वह पूछते हैं कि क्या उल्कापिंडों में मिले खनिज एक्स्ट्रटरेस्ट्रीअल (अलौकिक) टेक्‍निक का नमूना हो सकते हैं। वह यह भी कहते हैं कि ब्रेजिनाइट और हेइडाइट अद्वितीय फॉर्मूलेशन और लेयरिंग वाले बेहद अनोखे खनिज थे। इस बात की पूरी उम्‍मीद है कि वह नैचुरल रूप से मौजूद नहीं हो सकते। एंबैड को लगता है कि आकाशगंगा में मौजूद सभी ब्रेजिनाइट और हेइडाइट किसी लैब से आए हो सकते हैं। हालांकि थोड़ी संभावना यह भी है कि हमारी पृथ्‍वी से बाहर ये कंपाउंड कहीं प्रकृति में मौजूद हो सकते हैं। 
 

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