यह खोज इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद अब फसलों की पैदावार में क्रांति लाई जा सकती है।
Photo Credit: Plant Physiology
वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक का पता लगा लिया है जिससे पौधे सांस लेते हुए देखे भी जा सकते हैं।
पौधे भी एक खास प्रक्रिया के माध्यम से सांस लेते हैं, वैज्ञानिकों को यह बात बहुत पहले से पता है। हम सब जानते हैं कि पौधे का सांस लेना भी ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड गैसों का आदान-प्रदान है। इनकी पत्तियों में एक खास तरह का छोटा छिद्र होता है जिसे स्टोमाटा कहते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए कितनी कार्बन डाइऑक्साड की जरूरत होगी। लेकिन यह बात अब तक थ्योरी में ही वर्णित की गई थी। लेकिन एक अभूतपूर्व खोज में अब वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक का पता लगा लिया है जिससे पौधे सांस लेते हुए देखे भी जा सकते हैं।
इलिनोइस विश्वविद्यालय अर्बाना-शैंपेन के शोधकर्ताओं ने ऐसे उपकरण का विकास कर लिया है जो पौधों को रियल टाइम में सांस लेते हुए देख सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे स्टोमाटा इन-साइट (Stomata In-Sight) कहा गया है। इससे देखा जा सकता है कि पत्तियों पर मौजूद सूक्ष्म छिद्र कैसे कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, और जल वाष्प का प्रबंधन करते हैं। ये एक तरह से पौधे के मुंह की तरह काम करते हैं जो खुलते और बंद होते हैं। इसी संतुलन की बदौलत पौधे कई तरह की आपातकालीन परिस्थितियों जैसे गर्मी, सूखा और अन्य चुनौतीपूर्ण माहौल से निपटते हैं। स्टडी को Plant Physiology जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
Seeing Plants Breathe
— Brian Roemmele (@BrianRoemmele) January 15, 2026
Researchers have achieved a breakthrough in plant biology by developing a way to watch plants
"breathe" in real time.
While we have known for centuries that plants exchange gases through microscopic pores called stomata, we have never before been able to… pic.twitter.com/j62H8y6mtk
नए क्रांतिकारी टूल के पूरे सेटअप में एक हाई-रिज़ॉल्यूशन कॉन्फोकल माइक्रोस्कोप, एक सटीक गैस-एक्सचेंज मापक सिस्टम और इमेज एनालिसिस के लिए उन्नत मशीन-लर्निंग सॉफ़्टवेयर शामिल है। इसकी मदद से टीम ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया है जो दिखाता है कि कैसे पौधा कार्बन डाइऑक्साइड को खींचता है, फिर बदले में ऑक्सीजन और जल वाष्प छोड़ता है। एडवांस इमेजिंग तकनीकी की मदद से वैज्ञानिक देख पाए कि प्रकाश, आर्द्रता और तापमान के प्रति स्टोमेटा की प्रतिक्रिया कैसे होती है। और कैसे सूक्ष्म कोशिकीय परिवर्तन होते हैं जिससे पौधे अनुकूलन, जल नियमन और आंतरिक संतुलन बना पाते हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया, प्रकाश आने पर ये छिद्र खुल जाते हैं और अंधेरे में बंद हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है ताकि अनुकूल परिस्थितियों में प्रकाश संश्लेषण हो सके, लेकिन पत्तियों के अंदर से वायुमंडल में पानी की हानि कम से कम हो। जब पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, चाहे मौसम गर्म और शुष्क हो या हम उन्हें पानी देना भूल जाएं, तो वे सूखने लगते हैं और उनकी बढ़त धीमी हो जाती है।
यह खोज इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद अब फसलों की पैदावार में क्रांति लाई जा सकती है। वैज्ञानिक अब आसानी से पता लगा सकते हैं कि ऐसे कौन से आनुवंशिक लक्षण हैं जो अधिक पानी के इस्तेमाल करने पर बढ़ती दक्षता के साथ जुड़े हुए हैं। जल उपयोग को अनुकूलित करने वाली फसलों को विकसित करके, शोधकर्ता बढ़ते तापमान और सूखे के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
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