Bitcoin माइनिंग में इस्तेमाल होने वाली एनर्जी से नीदरलैंड के ग्रीनहाउस में उग रहे Tulip 

इससे किसानों का गैस पर होने वाला खर्च कम हो गया है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से यूरोप में गैस के प्राइसेज बढ़ गए हैं

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 12 दिसंबर 2022 17:44 IST
ख़ास बातें
  • यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से यूरोप में गैस के प्राइसेज बढ़ गए हैं
  • गैस की सप्लाई में भी कमी हो रही है
  • दुनिया में नीदरलैंड ट्यूलिप का सबसे बड़ा उत्पादक है

इससे किसानों का गैस पर होने वाला खर्च कम हो गया है

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin की माइनिंग में एनर्जी की अधिक खपत होने का विरोध किया जाता रहा  है। नीदरलैंड में इस एनर्जी का इस्तेमाल बढ़ाने का तरीका खोजा गया है। इसका इस्तेमाल ग्रीनहाउस में Tulip के फूलों को उगाने के लिए किया जा रहा है। 

इस तरीके की खोज इंजीनियर Bert de Groot ने की है। उन्होंने बिटकॉइन की माइनिंग में कंप्यूटर्स के नेटवर्क को चलाने वाली एनर्जी से निकलने वाली गर्मी का इस्तेमाल ग्रीनहाउस में ट्यूलिप उगाने वाले किसानों की मदद के लिए किया है। इससे  किसानों का गैस पर होने वाला खर्च कम हो गया है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से यूरोप में गैस के प्राइसेज बढ़ गए हैं। इसके अलावा गैस की सप्लाई में भी कमी हो रही है। यूरोप में गैस की जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस से इम्पोर्ट किया जाता है। नीदरलैंड में बिटकॉइन माइनिंग के लिए सोलर पावर का अधिक इस्तेमाल होता है। इससे माइनिंग के लिए इलेक्ट्रिसिटी पर खर्च कम होता है और एनवायरमेंट को नुकसान से भी बचाया जा सकता है। 

ट्यूलिप उगाने वाले किसान Danielle Koning ने AFP को बताया, "इस तरीके से ग्रीनहाउस को गर्म करने पर हमें कुछ बिटकॉइन भी मिल सकते हैं और हमारे लिए यह फायदेमंद है।" दुनिया में नीदरलैंड ट्यूलिप का सबसे बड़ा उत्पादक है। यह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा कृषि उत्पादों का एक्सपोर्टर भी है। 

बिटकॉइन की माइनिंग में इलेक्ट्रिसिटी की अधिक खपत के कारण कुछ देशों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। लगभग छह महीने पहले उज्बेकिस्तान ने सोलर पावर से क्रिप्टोकरेंसीज की माइनिंग की अनुमति देने का फैसला किया था। उज्बेकिस्तान की सरकार चाहती है कि क्रिप्टो माइनर्स अपने सोलर पैनल लगाकर अपने माइनिंग फार्म के लिए पावर की जरूरत को पूरा करें। माइनिंग करने वाली फर्में के पास नियमित टैरिफ से दोगुने का भुगतान कर पावर ग्रिड से कनेक्ट होने का विकल्प भी होगा। हालांकि, इलेक्ट्रिसिटी की खपत अधिक होने के दौरान इन फर्मों पर अतिरिक्त सरचार्ज लगाया जा सकता है। क्रिप्टो माइनिंग के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी लेकिन इससे ज जुड़ी फर्मों को उज्बेक नेशनल एजेंसी फॉर पर्सपेक्टिव प्रोजेक्ट्स के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। Bitcoin जैसी कुछ क्रिप्टोकरेंसीज की माइनिंग के लिए कंप्यूटर्स के जरिए मैथमैटिक्स की जटिल पजल्स को सॉल्व करना होता है। इन कंप्यूटर्स के लिए इलेक्ट्रिसिटी की अधिक खपत होती है। 
 
 

ये भी पढ़ेंभारतीय एक्सचेंजों में क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें

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