Bitcoin पर ट्रंप के टैरिफ की मार, 63,000 डॉलर से नीचे गिरा प्राइस

ट्रंप के टैरिफ से जुड़े फैसले और ईरान पर न्यूक्लियर डील को लेकर दबाव बढ़ाने के लिए हमला करने की घोषणा का क्रिप्टो और अन्य मार्केट्स पर असर पड़ रहा है

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 24 फरवरी 2026 23:46 IST
ख़ास बातें
  • पिछले वर्ष अक्टूबर में बिटकॉइन ने 1,26,198 डॉलर का पीक लेवल बनाया था
  • इसके बाद से बिटकॉइन में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट हुई है
  • क्रिप्टो मार्केट में मंदी का इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स पर भी असर पड़ा है

इस वर्ष बिटकॉइन का प्राइस लगभग 27 प्रतिशत घटा है

सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin में गिरावट रुक नहीं रही है। अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump के सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद टैरिफ को बढ़ाने के फैसले और ईरान के साथ तनाव बढ़ने का बिटकॉइन पर असर पड़ रहा है। सबसे अधिक वैल्यू वाली इस क्रिप्टोकरेंसी का प्राइस मंगलवार को 63,000 डॉलर से नीचे चला गया। हालांकि, बाद में इसमें कुछ रिकवरी हुई है। 

इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने पर इंटरनेशनल क्रिप्टो एक्सचेंज Coinmarketcap पर बिटकॉइन का प्राइस 64,140 डॉलर से कुछ अधिक पर था। ट्रंप के टैरिफ से जुड़े फैसले और ईरान पर न्यूक्लियर डील को लेकर दबाव बढ़ाने के लिए हमला करने की घोषणा का क्रिप्टो और अन्य मार्केट्स पर असर पड़ रहा है। पिछले वर्ष अक्टूबर में बिटकॉइन ने 1,26,198 डॉलर का पीक लेवल बनाया था। इसके बाद से इसमें लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इस वर्ष बिटकॉइन का प्राइस लगभग 27 प्रतिशत घटा है। 

पिछले वर्ष अक्टूबर में ट्रंप के कई देशों पर भारी टैरिफ लगाया था। इसके बाद क्रिप्टो मार्केट में बड़ी गिरावट हुई थी। बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से भी अरबों डॉलर निकाले गए हैं। जनवरी में अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETFs से तीन अरब डॉलर से अधिक का आउटफ्लो हुआ है। बिटकॉइन में गिरावट का Strategy (पहले MicroStrategy) जैसे इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स पर भी असर पड़ रहा है। इस एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर मेकर के पास सात लाख से अधिक बिटकॉइन हैं। कंपनी के पास मौजूद बिटकॉइन्स की कुल वैल्यू 62 अरब डॉलर से अधिक की है। पिछले सप्ताह  क्रिप्टो एनालिस्ट Peter Schiff ने बिटकॉइन में नुकसान बढ़ने की चेतावनी दी थी। Schiff ने कहा था, "अगर बिटकॉइन का प्राइस 50,000 डॉलर से नीचे जाता है तो यह 20,000 डॉलर तक गिर सकता है। यह इसके पीक लेवल से लगभग 84 प्रतिशत की गिरावट होगी। 

Schiff का कहना है, "डॉलर में बड़ी गिरावट होने जा रही है। हम एक इकोनॉमिक क्राइसिस की ओर बढ़ रहे हैं जो 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस से ज्यादा घातक होगा।" उन्होंने दावा किया कि बहुत से देश और सेंट्रल बैंकों ने डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी पर अपनी निर्भरता घटाने की तैयारी की है और वे अपनी करेंसी को सपोर्ट करने के लिए गोल्ड के रिजर्व को बढ़ा रहे हैं। Schiff का कहना था कि अगला इकोनॉमिक क्राइसिस 2008 के संकट से काफी अलग होगा। यह अमेरिका के अंदर होगा और इसका वैश्विक असर कम रह सकता है। 
  

 

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