युवा यूजर्स AI का इस्तेमाल सिर्फ अपने काम को आसान बनाने के लिए नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे AI से अपनी जिंदगी से जुड़े हर तरह के सवाल भी पूछ रहे हैं।
एक्स्पर्ट्स के अनुसार एआई से युवाओं में अकेलापन बढ़ रहा है।
आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस के आ जाने से जहां एक तरफ जिंदगी आसान हुई है, वहीं दूसरी तरफ इसके कुछ नुकसान भी सामने आने लगे हैं। एक नई स्टडी कहती है कि युवा यूजर्स AI का इस्तेमाल सिर्फ अपने काम को आसान बनाने के लिए नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे AI से अपनी जिंदगी से जुड़े हर तरह के सवाल भी पूछ रहे हैं। ऐसे में AI उनको अपने नए साथी के रूप में नजर आने लगा है। एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि यह बहुत अच्छी खबर नहीं है। क्योंकि इससे युवाओं में अकेलापन बढ़ रहा है।
AI का इस्तेमाल युवा अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी उलझनों को सुलझाने के लिए भी करने लगे हैं। यूजर्स AI से अपनी भावनाओं से जुड़े सवाल भी पूछ रहे हैं। वे विभिन्न तरह के चैटबॉट जैसे Gemini और ChatGPT को अब अपने भावनात्मक साथी के रूप में देखने लगे हैं। नई रिपोर्ट कहती है कि नए AI मॉडल पहले से कहीं ज्यादा तेज और स्मार्ट हो गए हैं। ऐसे में युवा उन पर साधारण टास्क करवाने से कहीं ज्यादा निर्भर होने लगे हैं। आजकल के युवा AI का इस्तेमाल एक ऐसे साथी के रूप में कर रहे हैं जो उनके मन से जुड़े सवालों का जवाब भी देता है।
UK युथ चैरिटी की ओर से लेटेस्ट जेनरेशन आइसोलेशन रिपोर्ट 2025 जारी की गई है। इस रिपोर्ट को 5000 लोगों के सर्वे के आधार पर तैयार किया गया है। सर्वे में 11 से 18 साल के युवाओं को शामिल किया गया। रिपोर्ट कहती है कि लगभग 39 प्रतिशत यानी 5 में से 2 युवाओं में यह ट्रेंड देखा गया है कि वे अपने हर तरह के सपोर्ट के लिए अब AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें ऑफिस या एजुकेशन से जुड़े साधारण ऑनलाइन टास्क के अलावा सलाह भी शामिल है।
टीनेजर्स एआई को सिर्फ होमवर्क के लिए इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। वे उनसे सामाजिक और भावनात्मक सलाह भी ले रहे हैं। सर्वे में शामिल 11 प्रतिशत युआवों ने कहा कि उन्होंने एक दोस्त के तौर पर एआई से मदद मांगी। 12 प्रतिशत ने चैटबॉट का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए किया क्योंकि उन्हें कोई बात करने के लिए चाहिए था। लगभग आधे से ज्यादा युवा एआई यूजर्स का कहना है कि वे किसी न किसी तरह की सलाह के लिए एआई पर निर्भर रहते हैं। फिर चाहे यह सलाह तनाव से जुड़ी हो, उनकी भावनाओं से जुड़ी हो, या फिर रोजमर्रा की समस्याओं से जुड़ी हो।
इस स्टडी का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन्सानों में अकेलापन किस कदर फैल चुका है। वे इतने अकेले हैं कि बात करने के लिए चैटबॉट का सहारा लेना पड़ रहा है। एक तिहाई युवा अकेलेपन के शिकार पाए गए हैं। इसका कारण हो सकता है कि शायद उन्हें दोस्त बनाने में मुश्किल आती हो, उन्हें लगता है कि उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है, या शायद उनके पास पर्याप्त सामाजिक स्थान नहीं है जहां वे खुद को सुरक्षित समझें। एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि एआई पर यह निर्भरता आने वाले समय में नई पीढ़ी को और अधिक अकेलेपन की तरफ धकेल सकती है।
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