AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए Renewable Natural Gas पर जोर दिया जा रहा है। यह गैस गाय के गोबर से निकलने वाली मीथेन को प्रोसेस करके तैयार की जाती है।
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Artificial Intelligence (AI) जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से उसकी बिजली की जरूरत भी बढ़ रही है। बड़े AI मॉडल्स को ट्रेन और रन करने के लिए विशाल डेटा सेंटर्स की जरूरत होती है, जो भारी मात्रा में बिजली खर्च करते हैं। ऐसे में दुनिया भर की टेक कंपनियां और एनर्जी सेक्टर नई एनर्जी के सोर्स तलाश रहे हैं। इसी बीच एक ऐसा ऑप्शन सामने आया है, जिसका संबंध डेयरी फार्म और गाय के गोबर से है। सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे AI डेटा सेंटर्स को बिजली देने में मदद मिल सकती है। चलिए विस्तार से जानते हैं कैसे।
ये तो हम सभी जानते हैं कि गाय के गोबर के सड़ने पर बड़ी मात्रा में मीथेन गैस निकलती है। अगर इसे सीधे वातावरण में छोड़ दिया जाए तो यह कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कहीं ज्यादा असरदार ग्रीनहाउस गैस मानी जाती है। इस समस्या का समाधान नवीकरणीय प्राकृतिक गैस (Renewable Natural Gas (RNG)), यानी बायोमीथेन के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिकी उर्जा विभाग का कहना है कि इसके लिए गोबर को ऑक्सीजन रहित बंद टैंकों (Anaerobic Digesters) में रखा जाता है, जहां सूक्ष्मजीव उसे तोड़कर बायोगैस तैयार करते हैं। बाद में इस गैस को साफ करके उसमें मौजूद अशुद्धियां हटाई जाती हैं। इसके बाद जो गैस बचती है, वही RNG कहलाती है।
AI डेटा सेंटर्स 24 घंटे चलते हैं और उन्हें लगातार बिजली की जरूरत होती है। सोलर और विंड एनर्जी मौसम पर निर्भर रहती हैं, जबकि RNG से गैस आधारित पावर प्लांट लगातार बिजली पैदा कर सकते हैं। यही वजह है कि इसे AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक भरोसेमंद ऑप्शन माना जा रहा है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, साल 2030 तक दुनिया भर के डेटा सेंटर्स की बिजली खपत करीब 945 टेरावॉट-आवर (TWh) तक पहुंच सकती है, जो मौजूदा समय से दोगुनी से भी ज्यादा होगी। इसमें सबसे बड़ा योगदान AI का रहने की उम्मीद है।
RNG की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे सिर्फ बिजली ही नहीं बनती, बल्कि खेती और पर्यावरण को भी फायदा हो सकता है। गोबर से निकलने वाली मीथेन को पकड़कर उसका इस्तेमाल करने से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम किया जा सकता है। वहीं, इस प्रोसेस के बाद बचा पदार्थ जैविक खाद के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना (via Sentient Media) है कि इसका जवाब नहीं है। AI की बढ़ती बिजली मांग इतनी बड़ी है कि सिर्फ RNG से इसे पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए भविष्य में न्यूक्लियर एनर्जी, जियोथर्मल, सोलर, विंड, बैटरी स्टोरेज और RNG जैसी कई तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल करना होगा।
AI के विस्तार के साथ दुनिया की ऊर्जा जरूरतें भी बदल रही हैं। कुछ साल पहले तक शायद ही किसी ने सोचा होगा कि हाई-परफॉर्मेंस AI डेटा सेंटर्स को चलाने में गाय के गोबर से बनी गैस की भी भूमिका हो सकती है। हालांकि यह अकेला समाधान नहीं है, लेकिन भविष्य की ऊर्जा रणनीति में इसे एक अहम ऑप्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
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