इसे डेटा की चोरी के सबसे बड़े मामलों में से एक बताया जा रहा है। इससे Apple और Google सहित बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ ही कई देशों की सरकारी वेबसाइट्स पर असर पड़ा है। डेटा की इस चोरी से पर्सनल डिटेल्स तक हैकर्स की पहुंच का खतरा है, जिसका इस्तेमाल एकाउंट्स पर कंट्रोल करने, आइडेंटिटी की चोरी और फिशिंग अटैक्स के लिए किया जा सकता है।
विंडोज डिवाइसेज के यूजर्स को जाली ह्युमन वेरिफिकेशन पेज के जरिए निशाना बनाकर उनके डिवाइसेज में इनफॉर्मेशन की चोरी करने वाला मैलवेयर पहुंचाया जा रहा है। इस मैलवेय की पहचान Lumma Stealer के तौर पर की गई है। सायबरसिक्योरिटी फर्म ने ऐसी कई फिशिंग वेबसाइट्स को खोजा गया है जो जाली वेरिफिकेशन पेज का इस्तेमाल कर यूजर्स को मैलवेयर के डाउनलोड में फंसा रही हैं।
साइबरसिक्टोरिटी फर्म Evina के सिक्योरिटी रिसर्चर मैक्सिम इंग्राओ (Maxime Ingrao) ने बीचे बुधवार को एक ट्वीट थ्रेड के जरिए जानकारी दी कि उन्होंने 'Autolycos' नाम के मैलवेयर की खोज की, जो कम से कम 8 Android एप्लिकेशन में मौजूद थे।