5G नेटवर्क स्लाइसिंग का मतलब है एक ही फिजिकल नेटवर्क को कई वर्चुअल नेटवर्क में बांट देना, यानी नेटवर्क के स्लाइस बना देना।
Jio, Airtel जल्द ही 5G स्लाइसिंग सर्विसेज पेश कर सकती हैं।
Jio, Airtel जैसी कंपनियां जल्द ही यूजर्स को 4G, 5G के लिए अलग-अलग प्लान्स की पेशकश कर सकती हैं। दरअसल काफी समय से टेलीकॉम कंपनियां 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग (5G Network Slicing) को लागू करने की जल्दी में थीं। अब टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने 5G नेटवर्क स्लाइसिंग में सर्विस क्वालिटी के लिए एक रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसमें एक कंसल्टेशन पेपर टेलीकॉम कंपनियों के लिए तैयार किया गया है ताकि 5G नेटवर्क स्लाइसिंग के लिए नियम तय किए जा सकें और इसका आम यूजर्स पर बुरा प्रभाव न पड़े। लेकिन 5G नेटवर्क स्लाइसिंग आखिर है क्या, और इसके लागू होने के यूजर्स के लिए क्या होंगे मायने, आइए विस्तार से जानते हैं।
5G Network Slicing क्या है
5G नेटवर्क स्लाइसिंग का मतलब है एक ही फिजिकल नेटवर्क को कई वर्चुअल नेटवर्क में बांट देना, यानी नेटवर्क के स्लाइस बना देना। ये वर्चुअल स्लाइस खास कामों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं जिनमें अलग-अलग स्पीड भी हो सकती है। उदाहरण के लिए वीडियो स्ट्रीमिंग, लोकेशन ट्रैकिंग, या अन्य नेटवर्क सर्विसेज के लिए जरूरत के हिसाब से स्लाइस तैयार किए जा सकते हैं। यानी नेटवर्क सर्विस इस्तेमाल के तरीकों या ग्राहकों के हिसाब से तय की जा सकती है।
TRAI का प्रस्ताव
TRAI ने इसके लिए एक कंसल्टेशन पेपर (via) जारी किया है। टेलीकॉम सेक्टर एंटरप्राइज-फोकस्ड 5G सेवाओं को बड़े पैमाने पर शुरू करने की तैयारी कर रहा है। Jio, Airtel जैसी कंपनियां इसके लिए काफी समय से इंतजार में हैं। लेकिन TRAI चाहता है कि खास सर्विस को प्रीमियम यूजर्स को देने के चक्कर में आम यूजर्स के हित प्रभावित न हों। इसलिए इसके लिए नियम तय करना जरूरी है। TRAI के प्रस्तावित नियमों के अनुसार Jio, Airtel या अन्य ऑपरेटर्स प्रीमियम ग्राहकों को 5G स्लाइस की सुविधा दे सकते हैं। लेकिन इससे बाकी ग्राहकों के अनुभव पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए। सर्विस की क्वालिटी बनाए रखना जरूरी होगा। टेलीकॉम ऑपरेटरों को TRAI को यह बताना होगा कि वे अलग-अलग नेटवर्क स्लाइस के लिए हर रेडियो नेटवर्क सेल में कितनी कैपिसिटी दे रहे हैं।
यूजर्स पर क्या होगा असर
5G स्लाइस आता है तो प्रीमियम यूजर्स को सर्विस के हिसाब से बेहतर नेटवर्क की सुविधा मिलेगी। यानी पेड यूजर्स को ज्यादा फास्ट नेटवर्क मिलेगा। वहीं, दूसरी तरफ इसके लिए यूजर्स को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। कंपनियां 5G, 4G के लिए अलग-अलग प्लान ला सकती हैं, इनकी कीमत भी अलग-अलग रख सकती हैं। यानी जितनी ज्यादा कीमत उतनी अच्छी सर्विस। लेकिन ट्राई का कहना है कि इससे नॉन प्रीमियम यूजर्स का एक्सपीरियंस खराब नहीं होना चाहिए। अगर कंपनी बताई गई स्पीड उपलब्ध नहीं करवाती है उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी होगा।
कुल मिलाकर टेलीकॉम कंपनियां अब 5G के जरिए अपना रिवेन्यु बढ़ाने के लिए स्लाइसिंग चाहती हैं, ताकि एक ही तरह के नेटवर्क को यूजर्स की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग स्लाइस बनाकर बेचा जा सके। लेकिन TRAI इसके लिए ग्राहकों के हितों की रक्षा को नियमों के जरिए सुनिश्चित करना चाहता है।
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