दुनिया में पहली बार! न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी से बनाई ग्रीन हाइड्रोजन, भारत ने रचा इतिहास

भारत ने पहली बार फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी का इस्तेमाल कर ग्रीन हाइड्रोजन बनाने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 30 जून 2026 17:06 IST
ख़ास बातें
  • न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी से बनी ग्रीन हाइड्रोजन
  • BARC और IGCAR ने विकसित की नई तकनीक
  • क्लीन एनर्जी की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि

भारत ने न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी से ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की नई तकनीक दिखाई

Photo Credit: Unsplash/ Nicolas Hippert

भारत ने क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश के वैज्ञानिकों ने पहली बार फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी का इस्तेमाल करके ग्रीन हाइड्रोजन बनाने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केन्द्र
(IGCAR) में हासिल की गई है। इस तकनीक के जरिए अब परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल सिर्फ बिजली बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे ग्रीन हाइड्रोजन भी तैयार किया जा सकेगा। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है यह नई उपलब्धि?

परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने कल्पक्कम में ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन फैसिलिटी का उद्घाटन किया है। यह प्लांट भाभा एटॉनिक रिसर्च सेंटर (BARC) द्वारा डेवलप्ड कॉपर-क्लोरीन थर्मोकैमिकल प्रोसेस पर आधारित है। इसकी खास बात यह है कि इसमें हाइड्रोजन बनाने के लिए फॉसिल फ्यूल या अलग से बिजली की जरूरत नहीं पड़ती। इसके बजाय फास्ट ब्रीडर रिएक्टर से निकलने वाली हाई-टेम्परेचर हीट का इस्तेमाल किया जाता है।

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कैसे बनती है ग्रीन हाइड्रोजन?

आमतौर पर हाइड्रोजन बनाने के लिए बिजली या प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इस नई तकनीक में न्यूक्लियर रिएक्टर से मिलने वाली गर्मी का उपयोग किया जाता है। इससे पूरी प्रक्रिया के दौरान कार्बन एमिशन नहीं होता और ग्रीन हाइड्रोजन तैयार होती है। यही वजह है कि इसे क्लीन एनर्जी के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्यों है यह तकनीक अहम?

अब तक परमाणु रिएक्टरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से बिजली उत्पादन के लिए किया जाता था। नई तकनीक के बाद एक ही रिएक्टर से बिजली और ग्रीन हाइड्रोजन दोनों तैयार किए जा सकेंगे। ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल भविष्य में फ्यूल सेल, भारी उद्योगों, स्टील प्रोडक्शन, फर्टिलाइजर इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्टेशन जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है।

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भारत के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?

कल्पक्कम का Fast Breeder Test Reactor (FBTR) साल 1985 से भारत के एडवांस्ड न्यूक्लियर प्रोग्राम का हिस्सा है। अब इसी रिएक्टर ने ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की नई राह भी खोल दी है। इससे भारत को क्लीन फ्यूल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और कार्बन एमिशन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिल सकती है।

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