मरे हुए तारे के अवशेष देखे हैं कभी? Nasa की यह तस्‍वीर आपको रोमांचित कर देगी!

Supernova : जब किसी तारे में विस्‍फोट होता है, यानी वह खत्‍म हो रहा होता है, तो बहुत अधिक चमकदार हो जाता है। इसे सुपरनोवा कहते हैं। यह अंतरिक्ष में होने वाला सबसे बड़ा विस्‍फोट है।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 25 अक्टूबर 2022 13:52 IST
ख़ास बातें
  • यह सुपरनोवा पृथ्वी से लगभग 9,000 प्रकाश वर्ष दूर है
  • तस्‍वीर को चंद्रा एक्स-रे आब्‍जर्वेट्री टेलीस्‍कोप ने लिया है
  • नासा ने अपने इंस्‍टाग्राम हैंडल पर शेयर की है यह तस्‍वीर

सुपरनोवा के मामले में एक खास बात यह है कि आजतक साइंटिस्‍ट इसे लाइव नहीं देख पाए हैं।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) अंतरिक्ष की अनदेखी तस्‍वीरें हमारे सामने लाती रहती है। जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप के आने के बाद से तो इस क्रम में और तेजी आई है। इस बार नासा ने एक सुपरनोवा के अवशेषों की बेहतरीन तस्वीर शेयर की है, जिसे इंटरनेट पर काफी पसंद और शेयर किया जा रहा है। बताया जाता है कि इस तस्‍वीर को चंद्रा एक्स-रे आब्‍जर्वेट्री टेलीस्‍कोप (Chandra X-ray) ने कैप्‍चर किया है। इंस्‍टाग्राम पर शेयर की गई तस्‍वीर को देखकर लोग हैरान रह गए। देखते ही देखते यह इमेज वायरल भी हो गई। 

यह सुपरनोवा पृथ्वी से लगभग 9,000 प्रकाश वर्ष दूर है। नासा ने काफी मेहनत के बाद यह तस्‍वीर हासिल की है। ध्‍यान रहे कि जब किसी तारे में विस्‍फोट होता है, यानी वह खत्‍म हो रहा होता है, तो बहुत अधिक चमकदार हो जाता है। इसे सुपरनोवा कहते हैं। यह अंतरिक्ष में होने वाला सबसे बड़ा विस्‍फोट है।
 

सुपरनोवा के मामले में एक खास बात यह है कि आजतक साइंटिस्‍ट इसे लाइव नहीं देख पाए हैं। यानी जब कोई तारा मरता है, तो वह कैसा दिखता है या उसमें किस तरह की हलचल होती हैं, इसे वैज्ञानिकों ने लाइव नहीं देखा है। हालांकि निकट भविष्‍य में यह मुमकिन हो सकता है। 

वैज्ञानिकों ने ऐसा क्‍लू ढूंढा है, जो यह बता देगा कि किसी तारे में विस्‍फोट होने वाला है यानी सुपरनोवा बनने वाला है। इस खोज से वैज्ञानिकों को  ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्‍टम' (early warning system) डेवलप करने में मदद मिल सकती है, जो उन्‍हें रियल टाइम में सुपरनोवा को देखने का मौका देगी।  
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यह क्‍लू कुछ ऐसा है कि सूर्य के द्रव्यमान के आठ से 20 गुना के बीच के तारों में उनके आखिर के कुछ महीनों में नाटकीय परिवर्तन होते हैं। ऐसे तारों के विनाश से कुछ महीनों पहले उनमें रोशनी लगभग 100 गुना कम हो जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा क्‍यों होता है, यह तब तक नहीं पता चलेगा, जबतक सुपरनोवा को होते हुए देखा नहीं जाता। 

रियल टाइम में किसी सुपरनोवा को कैप्‍चर करने के लिए वैज्ञानिकों को एक ऐसी दूरबीन की जरूरत होती, जो उन्‍हें यह बता सके कि किस तारे की रोशनी लगभग 100 गुना कम हो गई है। साल 2023 में लॉन्‍च होने वाली वेरा रुबिन ऑब्जर्वेटरी (VRO) के जरिए यह मुमकिन हो सकता है। इसका 3.2 गीगापिक्सल का कैमरा हर तीन रातों में आसमान में छोटे बदलावों का पता लगाएगा। अगर वैज्ञानिक की थ्‍योरी सही है, तो यह माना जाना चाहिए कि हम बहुत जल्‍द किसी तारे को मरते हुए रियल टाइम में देख सकेंगे। फ‍िलहाल तो आप नासा की इस तस्‍वीर को देखिए और समझिए एक सुपरनोवा के अवशेष भी कितने ‘खूबसूरत' नजर आते हैं। 
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