सौर तूफानों से पक्षी हो रहे कन्‍फ्यूज, भटक रहे रास्‍ता, नई स्‍टडी में चौंकाने वाला खुलासा

solar storms : उन्‍हें एक जगह से दूसरी जगह उड़ान भरने के दौरान अपने रूट को पहचानने में मुश्किलें आ रही हैं।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 16 अक्टूबर 2023 14:40 IST
ख़ास बातें
  • सौर तूफानों से पक्षियों पर हो रहा असर
  • वसंत और शरद में पक्षियों का प्रवास करना हुआ कम
  • भू-चुंबकीय क्षेत्र का इस्‍तेमाल कर सफर करते हैं पक्षी

सबसे ज्‍यादा असर उन पक्षियों पर हो रहा है, जो हर साल प्रवास के लिए हजारों मील का सफर तय करते हैं।

Photo Credit: Unsplash

सूर्य में हो रही घटनाएं पक्षियों को भी प्रभावित कर रही हैं। एक स्‍टडी में बताया गया है कि सौर तूफानों के कारण पक्षी प्रवास  संबंधी समस्‍याओं से जूझ रहे हैं। उन्‍हें एक जगह से दूसरी जगह उड़ान भरने के दौरान अपने रूट को पहचानने में मुश्किलें आ रही हैं। नेशनल अकैडमी ऑफ साइंसेज में पब्लिश फाइंडिंग्‍स में बताया गया है कि पृथ्‍वी पर भू-चुंबकीय घटनाएं पक्षियों को परेशान कर रही हैं। सबसे ज्‍यादा असर उन पक्षियों पर हो रहा है, जो हर साल प्रवास के लिए हजारों मील का सफर तय करते हैं। बत्तख (ducks), गीज (geese), हंस (swans) सैंडपाइपर (sandpipers) जैसे पक्षियों पर भी असर हो रहा है। 

गौरतलब है कि हमारा सूर्य अपने सौर चक्र से गुजर रहा है, जिसने उसे बहुत अधिक उत्तेजित कर दिया है। सूर्य में उभर रहे सनस्‍पॉट से कोरोनल मास इजेक्‍शन (CME) और सोलर फ्लेयर (Solar Flare) जैसी घटनाएं हो रही हैं। जब इनका असर पृथ्‍वी पर होता है, तो ये भू-चुंबकीय गड़बड़ी पैदा करते हैं। इनकी वजह से आकाश में ऑरोरा दिखाई देते हैं। सैटेलाइट्स पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि इंसान सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होता। 

लेकिन पक्षियों पर इसका असर होता है। भू-चुंबकीय गड़बड़ी के कारण पक्षियों को अपनी उड़ान का रूट पता लगाने में मुश्किल आती है। अमेरिकी डॉपलर रडार स्टेशनों और जमीन पर लगे मैग्नेटोमीटर से जुटाए गए आंकड़ों से पता चला है कि वसंत और शरद ऋतु के मौसम में अंतरिक्ष में होने वाली मौसमी घटनाओं के कारण 9 से 17 फीसदी तक कम पक्षी प्रवास करते हैं। 

सर्दियों के मौसम में उन पक्षियों को परेशानी होती है, जो रात के समय भी उड़ान भरते हैं। उन्‍हें नेविगेशन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि सूर्य में जारी सोलर मैक्सिमम का दौर साल 2025 तक चलता रहेगा। पक्ष‍ियों पर इसका असर उनकी जिंदगी के लिए भी खतरा बन सकता है, क्‍योंकि दिशा भटकने पर उन्‍हें अपनी मंजिल तक पहुंचने में जरूरत से ज्‍यादा समय लग सकता है और वह भोजन संबंधी परेशानियों से जूझ सकते हैं। 
 
 

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