मोबाइल फोन की कीमत आखिर किन पार्ट्स से तय होती है? बैटरी, कैमरा, स्टोरेज या चिप - कौन सा पार्ट सबसे ज्यादा महंगा पड़ता है। मार्केट ट्रेंड के आधार पर समझें असली कॉस्ट स्ट्रक्चर।
Photo Credit: Unsplash/ Joel Rohland
आजकल के स्मार्टफोन इतने पतले, फास्ट और पावरफुल कैसे बनते हैं - इसका जवाब उनके अंदर छिपे कुछ बेहद महंगे हार्डवेयर में मिलता है। जब भी कोई नया फोन लॉन्च होता है, लोग सबसे पहले कैमरा, डिस्प्ले या बैटरी पर ध्यान देते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि मोबाइल की कीमत का सबसे बड़ा हिस्सा उन कॉम्पोनेंट्स में जाता है जो यूजर को दिखाई नहीं देते, लेकिन पूरा सिस्टम इन्हीं पर चलता है। दिलचस्प बात यह है कि हर फोन में सबसे महंगी चीज एक जैसी नहीं होती, यह मॉडल, ब्रांड, मार्केट ट्रेंड और टेक्नॉलजी के हिसाब से बदलती रहती है। फिर भी कुछ कॉम्पोनेंट ऐसे हैं जो लगभग हर स्मार्टफोन में कॉस्ट का बड़ा हिस्सा खा जाते हैं।
हम यहां कॉस्ट में सबसे कम प्रभाव डालने वाले कंपोनेंट्स से सबसे ज्यादा कॉस्ट करने वालों की चलेंगे। 5G मॉडेम और RF कॉम्पोनेंट्स भी कॉस्ट बढ़ाते हैं, खासकर ग्लोबल फोन्स में जहां दर्जनों नेटवर्क बैंड्स को सपोर्ट करना पड़ता है। लेकिन ये भी आमतौर पर डिस्प्ले और चिपसेट से नीचे ही आते हैं।
फोन की लिथियम-आयन या लिथियम-पॉलीमर बैटरी असल में जितनी बड़ी दिखती है, उतनी महंगी नहीं होती। 5,000mAh की बैटरी का मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम होता है और यह फ्लैगशिप व बजट दोनों में करीब-करीब एक जैसा रहता है। हां, फास्ट चार्जिंग टेक्नॉलजी, थर्मल मैनेजमेंट और प्रोटेक्शन सर्किट इसका खर्च थोड़ा बढ़ाते हैं, लेकिन कुल बिल ऑफ मटेरियल में बैटरी का योगदान अभी भी लो-टू-मिड रेंज में ही होता है।
कैमरा सिस्टम स्मार्टफोन का एक अभिन्न और बेहद अहम पार्ट है। बजट फोन में कैमरा मॉड्यूल काफी सस्ता होता है, लेकिन जैसे-जैसे आप फ्लैगशिप की तरफ बढ़ते हैं, बड़े सेंसर, OIS, पेरिस्कोप जूम और मल्टी-लेंस सेटअप इसकी कीमत कई गुना बढ़ा देते हैं। फिर भी कॉम्पोनेंट कॉस्ट ब्रेकडाउन देखें तो कैमरा ज्यादातर फोन्स में टॉप-2 एक्सपेंसिव पार्ट नहीं होता, बल्कि मिड-रेंज कॉस्ट कैटेगरी में आता है।
इसके बाद आते हैं रैम और स्टोरेज। जी हां, इनकी कॉस्ट कैमरा सिस्टम से ज्यादा इफेक्ट करती है। LPDDR5X रैम और UFS 4.0 स्टोरेज आजकल परफॉर्मेंस की जान हैं और इनकी कीमत लगातार बढ़ रही है। वजह? AI सर्वर्स और डेटा सेंटर्स में इनकी जबरदस्त मांग, जिसकी वजह से मोबाइल इंडस्ट्री को सप्लाई का प्रेशर झेलना पड़ता है। नतीजा, फोन की लागत में इनका योगदान कैमरा से ज्यादा हो जाता है।
अब आते हैं उस पार्ट पर जिसे यूजर सबसे ज्यादा देखता भी है और वो है डिस्प्ले। OLED, LTPO, हाई-रिफ्रेश रेट स्क्रीन बनाना बेहद जटिल और महंगा काम है। खासकर फ्लैगशिप फोन में तो अल्ट्रा-ब्राइट, कम पावर वाला LTPO OLED पैनल कई बार फोन की सबसे महंगी चीज बन जाता है। खराब यील्ड (यानी फैक्ट्री में बनने वाले पैनलों का ज्यादा खराब होना) इसकी कीमत को और बढ़ा देता है।
Medium की एक 2023 की रिपोर्ट भी यही बताती है कि एक स्मार्टफोन के BoM (बिल ऑफ मटेरियल्स) में डिस्प्ले के साथ-साथ सिस्टम-ऑन-ए-चिपसेट (SoC) सबसे महंगे कंपोनेंट्स में आता है। यह फोन का दिमाग होता है, जिसमें CPU, GPU, AI इंजन, मॉडेम सब कुछ एक ही जगह इंटीग्रेट रहता है। आज की हाई-एंड चिप्स जैसे 3nm और आगे आने वाली 2nm प्रोसेसर टेक्नॉलजी इतने महंगे मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस से बनते हैं कि अक्सर ये पूरे फोन का सबसे कॉस्टली पार्ट बन जाते हैं। यही वजह है कि फ्लैगशिप फोन्स में चिपसेट की कीमत ही कई बार बजट फोन्स की पूरी बिल्ड कॉस्ट के बराबर पहुंच जाती है।
लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
MWC 2026: मोबाइल नहीं, ट्यूबलाइट! दुनिया का सबसे चमकीला डिस्प्ले 15000 निट्स, TCL CSOT ने किया लॉन्च
MacBook Air M5 लॉन्च, 32GB तक रैम, 4TB तक स्टोरेज के साथ दमदार M5 चिप, जानें कीमत
आपका लैपटॉप नहीं हो रहा Wifi से कनेक्ट, ऐसे कर सकते हैं परेशानी को दूर
MWC 2026: Nubia Neo 5 GT लॉन्च हुआ 6210mAh बैटरी, 144Hz डिस्प्ले के साथ, धांसू गेमिंग फीचर्स