शॉपिंग करने से लेकर कोई भी बैकिंग ट्रांजेक्शन या अन्य चीजों में वेरिफिकेशन के लिए ओटीपी बेस्ड ऑथेंटिकेशन काफी आम हो गया है।
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नंबर वेरिफाई 2.0 अलग-अलग ऑपरेटर और मार्केट के बीच इंटरऑपरेबिलिटी कंफर्म करता है।
शॉपिंग करने से लेकर कोई भी बैकिंग ट्रांजेक्शन या अन्य चीजों में वेरिफिकेशन के लिए ओटीपी बेस्ड ऑथेंटिकेशन काफी आम हो गया है। मगर अब टेलीकॉम कंपनी Vodafone ने सिम-बेस्ड ऑथेंटिकेशन को ज्यादा सरल और सिक्योर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए जर्मनी, नीदरलैंड और यूके में नंबर वेरिफाई 2.0 लॉन्च किया है। नंबर वेरिफाई 2.0 अलग-अलग ऑपरेटर और मार्केट के बीच इंटरऑपरेबिलिटी कंफर्म करता है। डेवलपर्स एक बार इंटीग्रेट कर सकते हैं और जैसे-जैसे ऑपरेटर का सपोर्ट बढ़ेगा तो इसे दुनिया भर में डिप्लॉय किया जा सकता है। यहां हम आपको नंबरवेरिफाई 2.0 के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
वोडाफोन की रिपोर्ट के अनुसार, नंबर वेरिफाई 2.0 अब उपलब्ध हो गया है। नेक्स्ट-जेनरेशन फोन नंबर ऑथेंटिकेशन API को जर्मनी, नीदरलैंड और यूके के बाजार में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सबसे पहले एंड्रॉयड डिवाइस पर रोल आउट किया जा रहा है।
कंपनी के नेक्स्ट-जेनरेशन फोन नंबर ऑथेंटिकेशन API के ग्लोबल रोलआउट की योजना के तहत जर्मनी, नीदरलैंड और यूके पहले बाजार हैं।
नंबर वेरिफाई 2.0 बिजनेस को एसएमएस यानी कि ओटीपी के बिना यूजर के मोबाइल फोन नंबर को वेरिफाई करने का एक ज्यादा आसान और सिक्योर तरीका प्रदान करता है।
इससे मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल करके यह वेरिफाई होता है कि यूजर का फोन नंबर उनके सिम और डिवाइस से लिंक है या नहीं।
ऐसे में चाहे यूजर मोबाइल डेटा पर हो या वाई-फाई पर मगर यह ऐप और वेब दोनों तरह के इस्तेमाल में काम करता है।
नंबर वेरिफाई 2.0 डेवलपर्स को फोन नंबर वेरिफाई करने का तेज, सुरक्षित और आसान तरीका प्रदान करता है।
इसमें यूजर अपनी सहमति प्रदान करते हैं और फिर उनका फोन नंबर तुरंत सर्विस प्रोवाइडर जैसे बैंक या रिटेलर के साथ शेयर कर दिया जाता है।
रजिस्ट्रेशन, लॉगिन, अकाउंट रिकवरी और ट्रांजेंक्शन कन्फर्मेशन के लिए मोबाइल नंबर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। यह डिफॉल्ट वेरिफिकेशन तरीका मॉडर्न फ्रॉड के खतरों या यूजर की उम्मीदों के साथ कदम से कदम मिलाकर नहीं चल पाया है। SMS पर आने वाले ओटीपी से सिर्फ यह कन्फर्म होता है कि किसी ने मोबाइल नंबर पर भेजे गए कोड को एंटर किया है। यह साबित नहीं होता कि असली सब्सक्राइबर मौजूद है या ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है। इससे बिजनेस और यूजर्स फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियली इन्फ्लेटेड ट्रैफिक (AIT) के खतरे में आ जाते हैं। ऑटोमेटेड बॉट्स बड़े स्तर पर ओटीपी रिक्वेस्ट भेजते हैं, जिससे लागत और मुश्किल बढ़ जाती है।
ऑनबोर्डिंग, लॉगिन और अकाउंट रिकवरी प्रोसेस से मैनुअल मोबाइल नंबर एंट्री, एसएमएस का इंतजार और कोड टाइपिंग हट रहा है।
ओटीपी को हटाया जा रहा है, जिन्हें फिशिंग, इंटरसेप्ट या सोशल इंजीनियरिंग के जरिए चुराया जा सकता है।
इससे एसएमएस पर होने वाला फालतू खर्च, ओटीपी की नाकाम कोशिशों और आर्टिफिशियल ट्रैफिक के जोखिम को कम किया जा रहा है।
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