उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पूरी तरह से फ्री रहेगा। MDR शुल्क सिर्फ कुछ निश्चित श्रेणियों के व्यवसायी लेनदेन पर ही लागू होगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम 2026, और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 में संशोधन से जुड़े कानून को मंजूरी दे दी है।
UPI से पेमेंट पर चार्ज वसूलने का रास्ता अब सरकार ने साफ कर लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम 2026, और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 में संशोधन से जुड़े कानून को मंजूरी दे दी है। ये विधेयक संसद ने 10 अगस्त को पारित किए थे जिनको अब राष्ट्रपति की भी हरी झंडी मिल गई है।
नए अधिनियम पारित होने के बाद अब सरकार का यूपीआई पेमेंट्स पर फीस लगाने का रास्ता खुल गया है। अभी तक बैंक और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स ये फीस नहीं ले सकते थे। लेकिन अब UPI और Rupay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले ट्रांजैक्शन पर फीस लगेगी या नहीं, ये सरकार तय करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, कराधान नियम (Taxation Act) के जरिए सरकार जयादा विदेशी निवेश आकर्षित करना चाहती है। इससे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रोसेस सर्टेनिटी (प्रक्रिया की निश्चितता) देकर विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा सेंटरों का इस्तेमाल आसान हो जाएगा।
NPCI की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति अब एमडीआर फीस के संबंध में फैसला लेगी। सरकार अधिसूचना के जरिये यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर व्यवसायी रियायती दर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट या MDR) शुल्क नहीं लगेगा। कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) बिल 2026, 5 जून के उस अध्यादेश की जगह लेता है जिसमें FPIs को G-Secs में निवेश से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन्स पर इनकम-टैक्स से छूट दी गई थी।
आम यूजर्स को UPI पेमेंट्स के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में इस संबंध में कहा था कि उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पूरी तरह से फ्री रहेगा। MDR शुल्क सिर्फ कुछ निश्चित श्रेणियों के व्यवसायी लेनदेन पर ही लागू होगा। नया कानून फंड मैनेजर्स को भारत में पुनर्स्थापन में मदद करेगा। यह नियम और शर्तों के बोझ को कम करता है ताकि फंड मैनेजर्स की ग्लोबल आय पर भारत में अधिक टैक्स न लगे।
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