15 अक्टूबर 2026 से UPI के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर नया MDR नियम लागू होगा। जानें ग्राहक और दुकानदार पर इसका क्या असर होगा।
15 अक्टूबर से UPI के कुछ पेमेंट पर नए MDR नियम लागू होंगे
Photo Credit: Unsplash/ David Dvoracek
15 अक्टूबर 2026 से UPI पेमेंट से जुड़े नए MDR नियम लागू होने वाले हैं। नए नियम के तहत चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M पेमेंट पर ₹2,000 से ज्यादा की रकम होने पर 0.4% MDR लागू होगा। हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि यह चार्ज सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। Person-to-Person यानी P2P ट्रांजैक्शन पहले की तरह फ्री रहेंगे और ₹2,000 तक के सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा। इसके अलावा छोटे कारोबारियों के लिए भी राहत का प्रावधान रखा गया है। ऐसे में UPI से पेमेंट करने वालों के लिए नए नियमों की पूरी जानकारी समझना जरूरी है।
15 अक्टूबर से चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट में ₹2,000 से ज्यादा की रकम पर 0.4% MDR लागू होगा। यह चार्ज मर्चेंट यानी पेमेंट लेने वाले कारोबारी से जुड़ा है, ग्राहक से नहीं। उदाहरण के लिए ₹3,000 के पेमेंट पर MDR ₹12 और ₹50,000 के पेमेंट पर ₹200 होगा। ₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर यह चार्ज अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।
नए MDR नियम का सबसे अहम हिस्सा यह है कि ग्राहक को UPI पेमेंट के लिए अलग से चार्ज नहीं देना होगा। यानी अगर आप किसी दुकान पर ₹3,000 का सामान खरीदते हैं और UPI से पेमेंट करते हैं, तो आपके खाते से ₹3,000 ही कटेंगे। बैंक और पेमेंट सिस्टम को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि नया MDR ग्राहक पर अलग चार्ज के तौर पर न डाला जाए।
अगर आप किसी दुकान या दूसरे मर्चेंट को ₹2,000 या उससे कम का UPI पेमेंट करते हैं, तो इस नए MDR का असर नहीं होगा। ₹500, ₹1,000 या ₹2,000 के सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर यह चार्ज लागू नहीं होगा। ऐसे ज्यादातर रोजमर्रा के छोटे पेमेंट पहले की तरह UPI से किए जा सकेंगे।
Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन नए MDR के दायरे में नहीं हैं। इसका मतलब है कि दोस्त को पैसे भेजना, परिवार के सदस्य को रकम ट्रांसफर करना या अपने दूसरे बैंक अकाउंट में पैसे भेजना पहले की तरह फ्री रहेगा। इस पर ₹2,000 की कोई सीमा लागू नहीं है।
नए नियमों में छोटे मर्चेंट के लिए अलग प्रावधान रखा गया है। QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक UPI पेमेंट हासिल करने वाले तय कैटेगरी के छोटे कारोबारियों को MDR से छूट जारी रहेगी। यानी ऐसे दुकानदार को किसी एक पेमेंट में ₹2,000 से ज्यादा मिलने पर भी, अगर वह तय छोटे-मर्चेंट की शर्तों में आता है, तो सामान्य MDR लागू नहीं होगा।
कुछ खास कैटेगरी के लिए 0.4% MDR की जगह फ्लैट ₹5 MDR रखा गया है। इसमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और फ्यूल जैसी सेवाएं शामिल हैं। ₹2,000 से ज्यादा के योग्य पेमेंट पर यह ₹5 का MDR लागू होगा। यूटिलिटी से जुड़े कुछ पेमेंट के लिए भी अलग फ्लैट-रेट व्यवस्था रखी गई है। यह रकम भी मर्चेंट साइड का चार्ज है, ग्राहक से अलग से लेने का प्रावधान नहीं है।
नए नियम को सिर्फ इस तरह नहीं समझना चाहिए कि 15 अक्टूबर से हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा। असल में बदलाव चुनिंदा P2M ट्रांजैक्शन के लिए है। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट, P2P ट्रांसफर और तय शर्तों वाले छोटे मर्चेंट के पेमेंट फ्री रहेंगे। वहीं बड़े मर्चेंट को ₹2,000 से ज्यादा के योग्य पेमेंट पर MDR देना होगा। ऐसे में सामान्य रोजमर्रा के UPI इस्तेमाल का बड़ा हिस्सा नए 0.4% MDR के दायरे में नहीं आएगा।
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