India’s Iron dome : देसी ‘आयरन डोम’ बनाएगा भारत, इस्राइल की तरह हवा में खत्‍म करेगा दुश्‍मन!

India’s Iron dome : यह 350 किलोमीटर की रेंज तक आने वाले स्टील्थ लड़ाकू विमानों, विमानों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों का सटीक पता लगाकर उन्‍हें बर्बाद कर देगा।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 30 अक्टूबर 2023 17:02 IST
ख़ास बातें
  • लंबी दूरी के एयर डिफेंस‍ सिस्‍टम को लाने की तैयारी
  • साल 2028-2029 तक पेश कर सकता है भारत
  • सरकार ने आधिकारिक रूप से इस बारे में कुछ नहीं कहा है

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO का प्रोजेक्‍ट कुशा (Project Kusha) यह काम कर रहा है।

इस्राइल की आयरन डोम प्रणाली (Iron dome system) के बारे में पूरी दुनिया जानती है। एक ऐसा एयर डिफेंस सिस्‍टम जो दुश्‍मन देशों से आने वाली मिसाइलों, विमानों, ड्रोन आदि को बर्बाद कर सकता है। भारत भी ऐसा ही एयर डिफेंस सिस्‍टम डिप्‍लॉय करने की तैयारी में जुटा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2028-2029 तक भारत लंबी दूरी के एयर डिफेंस‍ सिस्‍टम को लाने के लिए तैयार है। यह 350 किलोमीटर की रेंज तक आने वाले स्टील्थ लड़ाकू विमानों, विमानों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों का सटीक पता लगाकर उन्‍हें बर्बाद कर देगा। 

हालांकि इस बारे में सरकार या सेना की ओर से कुछ नहीं बताया गया है, पर टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO का प्रोजेक्‍ट कुशा (Project Kusha) यह काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस लॉन्‍ग रेंज की इस देसी मिसाइल (एलआर-एसएएम) प्रणाली में रूस के S-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम जैसी क्षमताएं होंगी। 

रिपोर्ट कहती है कि LR-SAM सिस्‍टम को "मिशन-मोड" प्रोजेक्‍ट के रूप में डेवलन करने के लिए मई 2022 में कैबिनेट की मंजूरी दी जा चुकी है। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने इस सिस्‍टम के लिए 5 स्क्वाड्रन की खरीद के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) को मंजूरी दे दी है। इसमें 21,700 करोड़ रुपये की लागत आएगी।  

भारत जिस देशी सिस्‍टम को तैयार कर रहा है, उसमें अलग-अलग इंटरसेप्‍टर मिसाइलें होंगी। ये मिसाइलें 
150 किलोमीटर, 250 किलोमीटर और 350 किलोमीटर की दूरी पर दुश्‍मन के हमले का पता लगाकर उसे खत्‍म कर देंगी। रिपोर्ट कहती है कि इस सिस्‍टम की मदद से दुश्‍मन की मिसाइल या अन्‍य हमले को 80 फीसदी तक खत्‍म किया जा सकेगा। लगातार फायर करने पर 90 फीसदी रिजल्‍ट मिलेगा। 
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भारत का LR-SAM उन इलाकों में तैनात हो सकता है जो रणनीतिक और सामरिक ल‍िहाज से जरूरी हैं। आमतौर पर इस तरह के सिस्‍टमों में रडार की मदद से दुश्‍मन के रॉकेट या मिसाइलों को ट्रैक किया जाता है। हमला होने पर रडार मिसाइलों या रॉकेट को ट्रैक करता है और जवाबी कार्रवाई में उन्‍हें खत्‍म कर देता है। 
 
 

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