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दिल्ली में अगले महीने से ड्राइविंग लाइसेंस बनाना हो जाएगा और मुश्किल, जानें क्यों?

भारत में पहला स्वचालित ट्रैक लगभग 5 साल पहले शुरू किया गया था। इस ट्रैक को उचित तरीके से व्हीकल ड्राइविंग स्किल्स का आकलन करने के लिए डिजाइन किया गया है।

दिल्ली में अगले महीने से ड्राइविंग लाइसेंस बनाना हो जाएगा और मुश्किल, जानें क्यों?

ऑटोमेटेड ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट के तहत ट्रैक्स पर सेंसर्स और कैमरों को फिट किया गया है

ख़ास बातें
  • जनवरी 2023 के अंत तक सभी टेस्ट ट्रैक स्वचालित हो जाएंगे
  • व्हीकल टेस्ट पहले की तुलना में कठिन हो जाएंगे
  • कैमरों और सेंसर्स से होगा ड्राइविंग टेस्ट देने वालो का आंकलन
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दिल्ली में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करना पहले से कठिन होने वाला है, क्योंकि एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अब टेस्ट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने वाला है। अभी तक क्षेत्रिय परिवहन कार्यालय (RTO) के अधिकारी लोगों के व्हीकल टेस्ट खुद से लेते थे, लेकिन अब सरकार सभी टेस्ट ट्रैक को स्वचालित करने की योजना बना रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रोसेस को 2023 के पहले महीने के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।

TOI के अनुसार, जनवरी 2023 के अंत तक सभी टेस्ट ट्रैक स्वचालित हो जाएंगे, जिसके बाद से व्हीकल टेस्ट पहले की तुलना में कठिन हो जाएंगे। बता दें कि दिल्ली में कुल 13 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक में से 12 पहले ही स्वचालित हो चुके हैं और आखिरी ट्रैक को अगले महीने के अंत तक स्वचालित बना दिया जाएगा। यह ट्रैक लाडो सराय में स्थित है, जहां ड्राइविंग टेस्ट अभी भी मैन्युअल रूप से किए जाते हैं।

भारत में पहला स्वचालित ट्रैक लगभग 5 साल पहले शुरू किया गया था। इस ट्रैक को उचित तरीके से व्हीकल ड्राइविंग स्किल्स का आकलन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा, ये तरीका क्षेत्रीय परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए भी काम आएगा।

निश्चित तौर पर टेस्ट ट्रैक के ऑटोमैटिक होने के बाद इसमें मानवीय हस्तक्षेप की संभावना समाप्त हो जाएगी, जिसका मतलब है कि टेस्ट देने वालों के स्किल्स का सही मायनों में टेस्ट होगा और साथ ही इसमें भ्रष्टाचार भी खत्म हो जाएगा। 

इसके अलावा, यदि कोई आवेदक पहले ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट में फेल हो जाता है, तो वह अपने टेस्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त कर सकता है और उसमें अपनी गलतियों के देख कर आने वाले दूसरे टेस्ट के लिए खुद को तैयार कर सकता है।

रिपोर्ट कहती है कि RTO अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली भारत का एकमात्र ऐसा शहर बन जाएगा जहां सभी ड्राइविंग टेस्ट का मूल्यांकन बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के किया जाएगा। ऑटोमेटेड ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट के तहत इन ट्रैक्स पर लगे सेंसर्स और कैमरों के जरिए आवेदकों की 24 पैरामीटर्स पर जांच की जाती है।

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नितेश पपनोई Nitesh has almost seven years of experience in news writing and reviewing tech products like smartphones, headphones, and smartwatches. At Gadgets 360, he is covering all ...और भी
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