Delhi Electricity Regulatory Commission ने peer to peer बिजली ट्रेडिंग को मंजूरी दी है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत Tata Power DDL और BSES Rajdhani के उपभोक्ता सीधे एक दूसरे से बिजली खरीद और बेच सकेंगे।
Photo Credit: Unsplash/ Shahnawaz Shamim
DERC ने P2P बिजली ट्रेडिंग को मंजूरी दी
दिल्ली में बिजली खरीदने और बेचने का तरीका जल्द बदल सकता है। Delhi Electricity Regulatory Commission ने एक नया फ्रेमवर्क मंजूर किया है, जिसके तहत उपभोक्ता अब आपस में सीधे बिजली का व्यापार कर सकेंगे। इस फैसले के बाद Tata Power Delhi Distribution Ltd और BSES Rajdhani Power Ltd को peer to peer यानी P2P एनर्जी ट्रेडिंग का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इस पहल का मकसद उपभोक्ताओं को सिर्फ बिजली इस्तेमाल करने वाला नहीं, बल्कि बाजार का एक एक्टिव हिस्सा बनाना है।
इस मॉडल में वे उपभोक्ता जिन्हें “prosumers” कहा जा रहा है और जो रूफटॉप सोलर जैसे रिन्यूएबल सोर्सेज से बिजली बनाते हैं, अपनी एक्स्ट्रा बिजली सीधे दूसरे उपभोक्ताओं को बेच सकेंगे। अभी तक ऐसी अतिरिक्त बिजली डिस्कॉम को तय दर पर वापस जाती थी, लेकिन नए सिस्टम में कीमत दोनों पक्ष आपसी सहमति से तय कर सकेंगे। हालांकि बिजली की फिजिकल सप्लाई की जिम्मेदारी डिस्कॉम के पास ही रहेगी, लेकिन वित्तीय सेटलमेंट डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बिल में एडजस्ट होगा।
TOI की रिपोर्ट बताती है कि अधिकारियों का कहना है पायलट फेज इस महीने उत्तर और दक्षिण दिल्ली में शुरू हो सकता है, जहां हर जोन में करीब 1,000 उपभोक्ताओं को शामिल किया जाएगा। Purvanchal Vidyut Vitaran Nigam Limited की भागीदारी के कारण दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच भी सीमित स्तर पर ट्रेडिंग की अनुमति होगी। आगे चलकर BSES Rajdhani, Tata Power DDL और Paschimanchal Vidyut Vitran Nigam Limited के जरिए दक्षिण, पश्चिम, उत्तर पश्चिम दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं को जोड़ा जाएगा।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता भाग ले सकेंगे। खरीदार के पास स्मार्ट मीटर होना जरूरी होगा, जबकि विक्रेता के पास नेट मीटर के साथ रूफटॉप सोलर प्लांट होना चाहिए। वैरिफिकेशन के बाद प्रतिभागियों को एक डिजिटल पहचान यानी Verified Credential दिया जाएगा। ट्रेडिंग मोबाइल ऐप के जरिए होगी और India Energy Stack पर आधारित ब्लॉकचेन फ्रेमवर्क में दर्ज की जाएगी।
पायलट को आकर्षक बनाने के लिए DERC ने व्हीलिंग चार्ज, क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज और अन्य अतिरिक्त शुल्क अस्थायी रूप से माफ किए हैं। 42 पैसे प्रति यूनिट का ट्रांजैक्शन शुल्क तय किया गया है, जिसे खरीदार और विक्रेता बराबर बांटेंगे। रेगुलेटर ने 20 प्रतिशत क्षमता सीमा भी हटाई है, जिससे prosumers अपनी पूरी एक्स्ट्रा बिजली बेच सकें।
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