IPL की शुरुआत से पहले विदेशी गैर कानूनी गेमिंग ऐप्स का फैला नेटवर्क

इन बेटिंग ऐप्स पर नियंत्रण करना मुश्किल होता है। इन ऐप्स को ब्लॉक किए जाने पर ये URL में मामूली बदलाव कर लगभग समान दिखने वाले डोमेन के साथ दोबारा दिखने लगते हैं

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 25 मार्च 2026 20:45 IST
ख़ास बातें
  • पिछले वर्ष 1 अक्टूबर से ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को लागू किया गया था
  • इसके बाद Dream11, MPL जैसी गेमिंग फर्मों को कारोबार समेटना पड़ा था
  • IPL की शुरुआत से पहले गैर कानूनी बेटिंग ऐप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है

देश में पिछले वर्ष रियल मनी गेमिंग पर बैन लगाया गया था

देश में पिछले वर्ष रियल मनी गेमिंग पर बैन लगाया गया था। इसके बाद से गैर कानूनी ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी 8,400 से अधिक वेबसाइट्स और ऐप्स को केंद्र सरकार ने ब्लॉक किया है। हालांकि, इंडियन प्रीमियम लीग (IPL) के मौजूदा सीजन की शुरुआत से पहले विदेश से ऑपरेट होने वाली फैंटेसी गेमिंग ऐप्स की संख्या तेजी से बढ़ गई है। 

पिछले वर्ष 1 अक्टूबर से प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को लागू किया गया था। इसके बाद Dream11 और MPL जैसी बहुत सी ऑनलाइन गेमिंग फर्मों को अपना बिजनेस समेटना पड़ा था। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑनलाइन गेमिंग पर बैन लगने के बाद गैर कानूनी फैंटेसी और बेटिंग ऐप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका बड़ा कारण IPL भी है। IPL पर सट्टा लगाने वालों को विदेश से ऑपरेट होने वाली गैर कानूनी फैंटेसी और बेटिंग ऐप्स के जरिए दांव लगाने का मौका मिल रहा है। 

ऐसा अनुमान है कि इस वर्ष गैर कानूनी फैंटेसी और बेटिंग का कारोबार 15 अरब डॉलर (लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का हो सकता है। इन बेटिंग ऐप्स पर नियंत्रण करना मुश्किल होता है। इन ऐप्स को ब्लॉक किए जाने पर ये URL में मामूली बदलाव कर लगभग समान दिखने वाले डोमेन के साथ दोबारा दिखने लगते हैं। ये ऐप्स बैंकिंग से जुड़े प्रतिबंधों से बचने के लिए 'म्यूल एकाउंट्स' के जरिए पेमेंट लेती हैं। इनका प्रचार प्राइवेट टेलीग्राम चैनल्स और इंस्टाग्राम पर इंफ्लुएंसर्स के जरिए किया जाता है। ऐप स्टोर पर स्क्रूटनी से बचने के लिए QR कोड और डायरेक्ट लिंक्स का इस्तेमाल करते हैं।  

इन गैर कानूनी ऐप्स के जरिए क्रिकेट या अन्य गेम्स पर दांव लगाने वालों के लिए रिस्क ज्यादा होता है। इनमें से अधिकतर ऐप्स विदेश से ऑपरेट की जाती हैं। इससे यूजर्स के साथ फ्रॉड होने की आशंका होती है। इन ऐप्स पर डिपॉजिट तो लिया जाता है लेकिन जीत की रकम को विड्रा नहीं करने दिया जाता। इसके अलावा यूजर्स के डेटा की चोरी और उसके गलत इस्तेमाल का रिस्क भी होता है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रियल मनी गेमिंग पर बैन को एक बड़ा फैसला बताया था। उन्होंने कहा था कि ऑनलाइन गेमिंग नहीं  बल्कि गैंबलिंग खराब है।  मोदी का कहना था कि ऑनलाइन गेम्स से जुड़ी वित्तीय मुश्किलों की वजह से कई परिवार तबाह हुए हैं। उन्होंने कहा था कि बहुत से ऑनलाइन ऐप्लिकेशंस को गेम्स के तौर पर दिखाया जाता है लेकिन वे गैंबलिंग से जुड़े होते हैं। 

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Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी ...और भी

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