Intel बना रही ब्‍लॉकचेन चिप, क्रिप्‍टो माइनिंग में ज्‍यादा बिजली खर्च होने से रोकेगी!

इंटेल के CEO ब्लूमबर्ग से बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने नई चिप बनाने को लेकर खुलासा किया।

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राधिका पाराशर, अपडेटेड: 18 फरवरी 2022 18:15 IST
ख़ास बातें
  • क्रिप्टो माइनिंग का पर्यावरण पर असर दुनिया भर में अहम मुद्दा बनकर उभरा है
  • कई देशों ने हाल के दिनों में क्रिप्‍टो माइनिंग पर प्रतिबंध लगाया है
  • अगर इंटेल की चिप हकीकत बनती है, तो इसका काफी फायदा मिलेगा

उन्‍होंने कहा कि अच्‍छा करने के लिए हमें टेक्‍नॉलजी को ताकत बनाना होगा।

Photo Credit: Unsplash/Slejeven Djurakovic

इंटेल (Intel) के CEO पैट गेलसिंगर ने हाल ही में बिटकॉइन (Bitcoin) को 'जलवायु संकट' कहा और इस बारे में बात की कि आने वाली टेक्‍नॉलजी को बिजली की कम खपत पर कैसे ध्यान देना चाहिए। इंटेल एक क्रिप्टो माइनिंग चिप पर भी काम कर रही है। इसके बारे में गेलसिंगर ने कहा कि यह 'एनर्जी एफ‍िशिएंट' होगी। दावा है कि इस चिप के जरिए एनर्जी डिमांड्स को कम करके बिटकॉइन माइनिंग के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकता है। इंटेल के CEO ब्लूमबर्ग से बात कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने नई चिप बनाने को लेकर खुलासा किया। 

गेलसिंगर ने कहा कि अच्‍छा करने के लिए हमें टेक्‍नॉलजी को ताकत बनाना होगा। इंटेल एक ब्लॉकचेन चिप लाने वाली है, जो पावर परफॉर्मेंस के मामले में बेहतरीन है। यह जलवायु से जुड़े मुद्दों को हल करने में मदद करेगी।

क्रिप्‍टोकरेंसी अभी रेगुलेटेड नहीं हैं, लेकिन भविष्‍य में ये कई मकसदों को पूरा करने के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। क्रिप्‍टोकरेंसी को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसकी माइनिंग यानी क्रिप्‍टोकरेंसी को तैयार करना है। इसमें बहुत ज्‍यादा बिजली खर्च होती है और कार्बन उत्‍सर्जन होता है। इसे पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ता है। 



उन्‍होंने कहा कि बिटकॉइन का एक सिंगल लेजर इतनी बिजली खर्च करता है, जिसमें किसी घर की एक दिन की बिजली की जरूरत पूरी जाएगी। यह एक जलवायु संकट है। …अगर हम ऐसी तकनीक का उत्पादन करते हैं जो इतनी ऊर्जा की खपत करती है, तो यह ठीक नहीं है।
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गौरतलब है कि क्रिप्टो माइनिंग का पर्यावरण पर असर दुनिया भर में अहम मुद्दा बनकर उभरा है।

पिछले साल जब चीन ने क्रिप्टो एक्टिविटीज पर बैन लगाया था, तब टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने कहा था कि चीन  के दक्षिणी हिस्से गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। एक समय में चीन के पास दुनिया के सबसे ज्‍यादा क्रिप्‍टो माइनर्स थे। 
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पिछले साल एक रिसर्च रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2018 के बीच चार प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग से लगभग 13 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड रिलीज हुई। 
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हाल के दिनों में ईरान, पूर्वी रूस का इरकुत्स्क रीजन, कोसोवो और जॉर्जिया के स्वानेती शहर ने क्रिप्‍टो माइनिंग की वजह से अहम कदम उठाए। यहां बड़े स्‍तर पर क्रिप्‍टो माइनिंग की जा रही थी, जिसकी वजह से इलाकों में गंभीर बिजली संकट पैदा हो रहा था। जॉर्जिया के स्‍वानेती शहर में तो लोगों को पवित्र शपथ दिलाई गई कि लोग क्रिप्‍टो माइनिंग में शामिल नहीं होंगे। 
 
 

ये भी पढ़ेंभारतीय एक्सचेंजों में क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें

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