Meta की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि AI की मदद से ऑनलाइन स्कैम तेजी से बढ़ रहे हैं। जानिए कैसे काम करते हैं ये नए फ्रॉड और क्यों भारत बना टारगेट।
AI से बने फेक प्रोफाइल और स्कैम मैसेज का बढ़ता खतरा ऑनलाइन
Photo Credit: Pexels /Shoma Shimazaki
Meta की लेटेस्ट Adversarial Threat Report (H1 2026) में ऑनलाइन स्कैम को लेकर एक बड़ा और चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक अब साइबर ठगी पहले से कहीं ज्यादा संगठित, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन और ग्लोबल लेवल पर फैल चुकी है। खास बात ये है कि अब स्कैमर्स AI का इस्तेमाल करके ऐसे फ्रॉड चला रहे हैं, जो आम यूजर्स के लिए पहचानना बेहद मुश्किल हो गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ये स्कैम अब रैंडम नहीं होते, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ एक सिस्टम की तरह ऑपरेट होते हैं। चलिए विस्तार से समझते हैं।
Meta ने “Fraud Attack Chain” नाम का एक मॉडल समझाया है, जिससे पता चलता है कि स्कैम किस तरह स्टेप-बाय-स्टेप चलता है। पहले स्कैमर्स जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करते हैं, फिर फेक अकाउंट और पहचान बनाते हैं। इसके बाद वो यूजर से संपर्क करके भरोसा जीतते हैं और आखिर में पैसे या डेटा हासिल करते हैं, फिर अपने निशान मिटा देते हैं। इस पूरे प्रोसेस से ये साफ है कि अब ठगी एक सुनियोजित ऑपरेशन बन चुकी है, जिसमें हर स्टेज का अलग रोल होता है।
रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा AI से जुड़ा है। Meta के मुताबिक स्कैमर्स अब AI टूल्स का इस्तेमाल करके फेक प्रोफाइल, रियल जैसी फोटो और नेचुरल बातचीत तैयार कर रहे हैं। ये बातचीत इतनी असली लगती है कि यूजर को शक ही नहीं होता। AI अब मल्टी-टर्न चैट कर सकता है, अलग-अलग भाषाओं में बात कर सकता है और यहां तक कि डीपफेक वीडियो और वॉइस भी बना सकता है। यानी अब स्कैम सिर्फ टेक्स्ट मैसेज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी डिजिटल पहचान के साथ आता है।
रिपोर्ट में “Criminal Scam Syndicates” का जिक्र है, जो असल में बड़े संगठित गैंग्स हैं। ये खासतौर पर साउथईस्ट एशिया के कुछ हिस्सों में ऑपरेट करते हैं और कंपनियों की तरह काम करते हैं। इनमें अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारियां तय होती हैं, ट्रेनिंग दी जाती है और ऑपरेशन को लगातार अपडेट किया जाता है। ये नेटवर्क अपनी लोकेशन भी बदलते रहते हैं ताकि कार्रवाई से बच सकें। टारगेटिंग की बात करें तो सबसे ज्यादा इंग्लिश बोलने वाले यूजर्स को निशाना बनाया जाता है, जिसमें अमेरिका के बाद भारत भी शामिल है।
रिपोर्ट बताती है कि इन स्कैम्स का बेसिक ढांचा वही है, लेकिन तरीका बदल गया है। इन्वेस्टमेंट, रोमांस, जॉब और सरकारी पहचान वाले स्कैम अब ज्यादा एडवांस हो चुके हैं और कई बार एक साथ मिलाकर चलाए जाते हैं, जिससे ये और ज्यादा भरोसेमंद लगते हैं। इसके अलावा कुछ नए स्कैम भी सामने आए हैं। जैसे फेक रेंटल लिस्टिंग, जिसमें सस्ते घर का लालच देकर लोगों से उनकी पर्सनल जानकारी ली जाती है। वहीं “फेक फ्यूनरल लाइवस्ट्रीम” जैसे मामलों में मृत व्यक्ति के परिवार वालों को निशाना बनाया जाता है और उनसे पैसे वसूले जाते हैं। ये ट्रेंड दिखाता है कि अब स्कैमर्स खास तौर पर कमजोर और भावनात्मक स्थिति में मौजूद लोगों को टारगेट कर रहे हैं।
Meta ने अपनी रिपोर्ट में AI बेस्ड “nudify apps” पर भी चिंता जताई है। ये ऐप्स बिना अनुमति किसी की फर्जी अश्लील तस्वीरें बना सकते हैं। कंपनी के मुताबिक ऐसे ऐप्स के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई है, जिसमें ads हटाना, अकाउंट ब्लॉक करना और लीगल स्टेप्स लेना शामिल है।
रिपोर्ट दावा करती है कि 2025 में Meta ने करोड़ों लेवल पर कार्रवाई की। इसमें लाखों नहीं बल्कि मिलियन्स में अकाउंट्स और पेज हटाए गए, जो स्कैम और फ्रॉड से जुड़े थे। कंपनी का कहना है कि वो AI और एडवांस सिस्टम्स के जरिए ऐसे नेटवर्क्स को जल्दी पहचानने और हटाने पर काम कर रही है।
Meta का साफ कहना है कि ये समस्या किसी एक प्लेटफॉर्म या देश तक सीमित नहीं है। स्कैमर्स अलग-अलग प्लेटफॉर्म, टेक्नोलॉजी और देशों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इन्हें रोकना और मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि अब इसे रोकने के लिए टेक कंपनियों, सरकारों और यूजर्स सभी को मिलकर काम करना होगा।
Meta की इस रिपोर्ट से एक बात साफ है कि ऑनलाइन स्कैम अब पहले जैसे सिंपल नहीं रहे। AI और प्रोफेशनल नेटवर्क्स की वजह से ये ज्यादा खतरनाक और भरोसेमंद दिखने लगे हैं। ऐसे में यूजर्स के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी लिंक, ऑफर या मैसेज पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसे वेरिफाई करें, क्योंकि अब गलती की गुंजाइश पहले से काफी कम बची है।
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