80s AI Photo Trend: सावधान! सोशल मीडिया पर फोटो डालने से पहले जान लें ChatGPT आपके डेटा के साथ क्या करता है?

अक्सर आप अपनी फोटो तुरंत इन AI चैटबॉट्स पर अपलोड कर देते हैं, बिना ये सोचे कि बाद में ये चैटबॉट इनका क्या करते हैं, और यह डेटा कहां जाता है।

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Written by हेमन्त कुमार, अपडेटेड: 12 सितंबर 2026 07:30 IST
ख़ास बातें
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन दिनों AI 80s Photo Trend देखने को मिल रहा है
  • चैटबॉट में चार रूपों में डेटा स्टोर होता है
  • यूजर एड्रेस, फोन नंबर या मेडिकल जैसी पर्सनल डिटेल्स भी शेयर करते हैं

एक्सपर्ट यहां पर सुझाव देते हैं कि संवेदनशील जानकारी को प्लेटफॉर्म पर शेयर न करें। वायरल इमेज ट्रेंड्स के मामले में भी यही सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

Photo Credit: NDTV

Instagram समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन दिनों AI 80s Photo Trend देखने को मिल रहा है। यूजर्स अपनी फोटो अपलोड करते हैं और AI उनको 1980 के दशक की तस्वीरें बना देता है। इसमें 1980 के दशक के कपड़े, हेयरस्टाइल, स्टूडियो बैकग्राउंड देखने को मिल रहे हैं। लगभग हरेक यूजर इसे ट्राई कर रहा है जिसमें बॉलीवुड, हॉलीवुड की मशहूर हस्तियां भी शामिल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं जिन फोटोज को आप धड़ाधड़ चैट जीपीटी के हवाले कर रहे हैं, वो उनका क्या करता है? कहां जाती हैं ये फोटो, किसी कंपनी के पास, या वेब की गहरी दुनिया में कहीं और? आइए आपको बताते हैं ChatGPT आपकी अपलोड की गई फोटो के साथ क्या करता है! 

ChatGPT का इस्तेमाल अब लोगों के लिए एक आम बात हो गई है। यह लगभग हर काम में इस्तेमाल हो रहा है, चाहे फिर वो कोई सवाल पूछना हो, फोटो बनानी हो, या स्क्रिप्ट या समरी तैयारी करवानी हो। अक्सर आप अपनी फोटो तुरंत इन AI चैटबॉट्स पर अपलोड कर देते हैं, बिना ये सोचे कि बाद में ये चैटबॉट इनका क्या करते हैं, और यह डेटा कहां जाता है। WIRED की रिपोर्ट के अनुसार, NYU अबू धाबी की साइबर-सिक्योरिटी एक्सपर्ट क्रिस्टीना पोपर का कहना है कि चैटबॉट में चार रूपों में डेटा स्टोर होता है जिसमें टेक्स्ट (आपका लिखना), सिस्टम का इंटरप्रिटेशन यानी जो सिस्टम समझता है, आपके चैट सेशन का मेटाडेटा, और वे जवाब या फाइल्स, जो सेव होती हैं। 

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टेक्स्ट इनपुट में यूजर अपनी मर्जी से एड्रेस, फोन नंबर या मेडिकल की जानकारी जैसी पर्सनल डिटेल्स भी शेयर करते हैं। वहीं, ChatGPT की प्राइवेसी पॉलिसी साफ कहती है कि ऐसी कोई भी जानकारी इसमें न डालें जिसे आप नहीं चाहते कि कोई और देखे या इस्तेमाल करे। जब आप इसमें फोटो डालते हैं तो वह भी एक पर्सनल डेटा होता है क्योंकि इससे किसी की पहचान करने में मदद मिल सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अपलोड की गई सेल्फी या आपकी फोटो इमेज एक और कॉपी के रूप में किसी दूसरी कंपनी के पास पहुंच जाती है। यह कंपनी के डेटा को बनाए रखने और ट्रेनिंग से जुड़े नियमों के तहत किया जाता है जो कि पॉलिसी में भी बताया जाता है। 

इस डेटा का इस्तेमाल कैसे किया जाता है और इसे कितने समय तक स्टोर करके रखा जाता है, यह उस कंपनी की सर्विस पर निर्भर करता है। Gemini और ChatGPT के प्राइवेसी और डेटा-रिटेंशन के नियम अलग-अलग हैं। लेकिन इतना तो तय है कि आपका डेटा कंपनी के पास किसी न किसी रूप में स्टोर जरूर होता है। चैट डिलीट होने के बाद भी 30 दिनों तक OpenAI के सिस्टम पर रह सकती हैं। कुछ डेटा को ज्यादा समय तक भी रखा जा सकता है, अगर उसे डी-आइडेंटिफाई कर दिया गया हो, और आपके अकाउंट से अलग कर दिया गया हो, या फिर कानूनी या सुरक्षा कारणों से ऐसा करना जरूरी हो। वहीं दूसरी ओर, Gemini डिफॉल्ट रूप से चैट डेटा को 18 महीने तक सेव करके रखता है, जब तक कि आप उसे डिलीट न कर दें।

एक्सपर्ट यहां पर सुझाव देते हैं कि संवेदनशील जानकारी को प्लेटफॉर्म पर शेयर न करें। वायरल इमेज ट्रेंड्स के मामले में भी यही सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। दूसरे लोगों की तस्वीरें उनकी इजाजत के बिना अपलोड न करें। बच्चों की तस्वीरों के मामले में खास तौर पर सावधान रहें और ऐसे आईडी डॉक्यूमेंट्स या तस्वीरें न भेजें जिनमें गैर-जरूरी निजी जानकारी रिवील होती हो। एक्सपर्ट कहते हैं कि यह अनिवार्य रूप से जरूरी नहीं कि ये टूल दूसरी ऑनलाइन सर्विस के मुकाबले ज्यादा जोखिम भरे हों, लेकिन ये प्राइवेट नहीं होते। 1980s ट्रेंड वाला पोर्ट्रेट भले ही कुछ दिनों में आपके फीड से हट जाएगा, लेकिन उसे बनाने के लिए आपने जो फोटो अपलोड की थी, वह AI कंपनी के सिस्टम में काफी लंबे समय तक बनी रह सकती है। इसलिए सावधानी बरतनी जरूरी है। 
 

 

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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी

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