10 लाख साल पुराने DNA खोजे वैज्ञानिकों ने, जानें कहां और कैसे मिले इतने पुराने सैंपल

लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्चर्स की टीम ने डीएनए फ्रेगमेंट्स के अंदर डैमेज पैटर्न को बारीकी से देखा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वो कितने पुराने थे।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 16 अक्टूबर 2022 19:10 IST
ख़ास बातें
  • ये सैंपल अंटार्कटिका में स्कोटिया सागर से लिए गए थे
  • अंटार्कटिका को दुनिया का सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है
  • ये फ्रेगमेंट आज तक खोजे गए सबसे पुराने प्रमाणित समुद्री सेडाडीएनए हैं

अंटार्कटिका में समुद्र तल के नीचे प्राचीन सूक्ष्मजीवों से ये डीएनए खोजे गए हैं।

अंटार्कटिका (Antarctica) में समुद्र तल के नीचे प्राचीन सूक्ष्मजीवों (microorganisms) से डीएनए (DNA) खोजे गए हैं। इनमें से कुछ डीएनए लगभग 10 लाख साल पहले के हैं। एक नए अध्ययन से पता चला है कि समुद्रतल के तलछट से खोजे गए यह अब तक के सबसे पुराने डीएनए हैं। खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने गलती से सैंपल्‍स इकट्ठा किए थे, यानी उन्‍हें यह अंदाजा नहीं था कि इनकी जांच के बाद एक बड़ी खोज सामने आएगी। वैज्ञानिकों ने जो सैंपल जुटाए थे, उन्‍हें सेडाडीएनए (sedaDNA) के रूप में जाना जाता है। इससे जुड़ी स्‍टडी नेचर कम्युनिकेशंस मैगजीन में पब्लिश हुई है। इसमें सेडाडीएनए सैंपल्‍स का विश्‍लेषण किया गया है। 

लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्चर्स की टीम ने डीएनए फ्रेगमेंट्स के अंदर डैमेज पैटर्न को बारीकी से देखा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वो कितने पुराने थे। सबसे पुराने फ्रैगमेंट्स लगभग 10 लाख साल पुराने हैं। साइंटिस्‍ट इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि सबसे पुराने सेडाडीएनए किस प्रजाति से संबंधित है। इन्‍हें यूकेरियोट (eukaryote) से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि ज्‍यादातर सैंपल डायटम से संबंधित हैं। यह एक प्रकार का फाइटोप्लांकटन है, जो आज भी दुनिया के महासागरों में मौजूद है। ये सैंपल अंटार्कटिका में स्कोटिया सागर से लिए गए थे। 

ऑस्ट्रेलिया में तस्मानिया यूनिवर्सिटी में इंस्टिट्यूट फॉर मरीन एंड अंटार्कटिक स्‍टडीज के एक रिसर्चर और स्‍टडी की प्रमुख लेखक लिंडा आर्मब्रेक्ट ने एक बयान में कहा कि ये फ्रेगमेंट आज तक खोजे गए सबसे पुराने प्रमाणित समुद्री सेडाडीएनए हैं। उन्‍होंने कहा कि कम तापमान, कम ऑक्सीजन सांद्रता और यूवी रेडिएशन नहीं होने से सैंपल्‍स काफी अच्‍छी तरह से संरक्षित हैं। प्राचीन डीएनए इस बात पर रोशनी डालते हैं कि जलवायु परिवर्तन से क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र कैसे प्रभावित हो सकता है।

अंटार्कटिका को दुनिया का सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है। विशाल ग्लेशियर्स का गढ़ अंटार्कटिका उम्मीद से ज्यादा तेजी से पिघल रहा है। हाल में एक रिपोर्ट में सामने आया था कि अंटार्कटिका के तटीय ग्लेशियर्स हिमखंडों (आइसबर्ग) को तेजी से बहा रहे हैं। तेजी से बर्फ के पिघलने के सिलसिले ने पिछले 25 सालों में दुनिया की सबसे बड़ी बर्फ की चादर के पिघलने से होने वाले नुकसान के पिछले अनुमानों को दोगुना कर दिया है। कई स्‍टडीज बता चुकी हैं कि जलवायु परिवर्तन बहुत तेजी से अंटार्कटिका की तैरती बर्फ की विशाल सिल्लियों को कमजोर कर रहा है और समुद्र स्तर में जबरदस्त बढ़ोतरी कर रहा है।
 

 

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