चीन में बना दुनिया का पहला अंडरवॉटर डाटा सेंटर, विंड एनर्जी से चलता है, जानें सबकुछ

AI की डिमांड लगातार बढ़ रही है, जिसके साथ डाटा सेंटर में भी तेजी से इजाफा हो रहा है।

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Written by साजन चौहान, अपडेटेड: 10 जून 2026 13:00 IST
ख़ास बातें
  • डाटासेंटर शंघाई लिंगांग अंडरसी डाटा सेंटर डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट है।
  • डाटासेंटर बनाने में लगभग 225 मिलियन डॉलर का खर्च आया था।
  • यह डाटासेंटर 22 प्रतिशत कम बिजली का उपयोग करता है।

डाटा सेंटर बहुत ज्यादा एनर्जी और रिसोर्स का उपयोग करते हैं।

Photo Credit: Pexels/Sergei Starostin

AI की डिमांड लगातार बढ़ रही है, जिसके साथ डाटा सेंटर में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। हालांकि, सबसे जरूरी बात यह है कि डाटा सेंटर बहुत ज्यादा एनर्जी और रिसोर्स का उपयोग करते हैं और बहुत ज्यादा स्पेस की भी जरूरत पड़ती है। अब चीन ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए पानी के नीचे डाटा सेंटर बना दिया है। यह दुनिया का पहला अंडरवॉटर डाटा सेंटर है जो कि चीन के शंघाई में शुरू हो गया है और यह विंड पावर से चलता है। आइए चीन में बने दुनिया के पहले अंडरवाटर डाटा सेंटर के बारे में विस्तार से जानते हैं।

डाटासेंटर शंघाई लिंगांग अंडरसी डाटा सेंटर डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट है। यह फेसिलिटी पूर्वी शंघाई में लिंगांग के पास है, जो एक हाई-टेक फ्री-ट्रेड जोन है। टेस्ला की गीगाफैक्ट्री भी यही पर मौजूद है। यह जमीन की सतह से 10 मीटर नीचे स्थित है। इसकी शुरुआत मई में हाईक्लाउड टेक्नोलॉजी और सरकारी कंपनी चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन कंपनी के जॉइंट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई। इस डेटासेंटर की कैपेसिटी 24 मेगावाट है।

बिजली और पानी की खपत होगी कम

लिंगांग अंडरसी डाटा सेंटर डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट बीते साल अक्टूबर में पूरा हुआ था। उस समय चीनी सरकार ने बताया था कि डाटासेंटर बनाने में लगभग 225 मिलियन डॉलर का खर्च आया था। यह अंडरवॉटर डाटा सेंटर सामान्य जमीन पर बने डाटासेंटर के मुकाबले में 22 प्रतिशत कम बिजली का उपयोग करता है। यह पास के ऑफशोर विंड फॉर्म की मदद से 95 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी पर चलता है।

दुनिया भर में डाटासेंटर के लिए पानी की ज्यादा खपत ज्यादा होती है जो कि एक बड़ी समस्या है। इन सेंटर में सर्वर जानकारी प्रोसेस करते हुए गर्म हो जाते हैं, इसलिए उन्हें ठंडा रखने के लिए साफ पानी की जरूरत होती है। हालांकि, चीन का कहना है कि उनका पानी के नीचे बना डेटासेंटर जमीन पर बने डेटासेंटर के मुकाबले में 90 प्रतिशत से भी कम पानी का उपयोग करता है। जब कोई डाटासेंटर समुद्र में डूबा रहता है तो उसे अपने आस-पास के पानी की वजह से ठंडक मिलती है। इससे बिजली और पानी की जरूरत को कम करने में मदद मिलती है।

यह डाटासेंटर के भविष्य के लिए बहुत जरूरी हैं। यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट फॉर वॉटर, एनवायरनमेंट एंड हेल्थ के अनुसार, 2030 तक डाटासेंटर का वॉटर फुटप्रिंट 9.3 ट्रिलियन लीटर तक पहुंच सकता है जो कि सब-सहारा अफ्रीका के सभी 1.3 अरब निवासियों की सालाना घरेलू पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरा होगा।

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