मस्क की नेटवर्थ में टेस्ला और SpaceX में उनकी हिस्सेदारी का 98 प्रतिशत से अधिक योगदान है। पिछले कुछ महीनों में मस्क ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोनॉमस ड्राइविंग और रोबोटिक्स पर फोकस बढ़ाया है
अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump के मंत्रिमंडल में भी मस्क शामिल रह चुके हैं
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) से लेकर रॉकेट तक के बिजनेस से जुड़े Elon Musk ने ट्रिलिनेयर बनने की उपलब्धि दोबारा हासिल की है। इस वर्ष जून में मस्क ने पहली बार ट्रिलिनेयर का खिताब हासिल किया था। हालांकि, इसके बाद उनकी कंपनियों के शेयर्स में गिरावट के कारण मस्क से यह खिताब छिन गया था।
Bloomberg Billionaires Index के अनुसार, पांच अक्टूबर को मस्क की नेटवर्थ बढ़कर 1.04 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंच गई। अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump के मंत्रिमंडल में शामिल रह चुके मस्क की Tesla और रॉकेट कंपनी SpaceX में हिस्सेदारी की वैल्यू बढ़ने से उनकी संपत्ति में बढ़ोतरी हुई है। इस महीने की शुरुआत से SpaceX के शेयर में लगभग 13 प्रतिशत और Tesla के शेयर में छह प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
पिछले सप्ताह टेस्ला ने इस वर्ष की तीसरी तिमाही के लिए अनुमान से अधिक सेल्स की जानकारी दी थी। मस्क की नेटवर्थ में टेस्ला और SpaceX में उनकी हिस्सेदारी का 98 प्रतिशत से अधिक योगदान है। पिछले कुछ महीनों में मस्क ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोनॉमस ड्राइविंग और रोबोटिक्स पर फोकस बढ़ाया है। इस वर्ष जून में SpaceX का शेयर लिस्टिंग के बाद तेजी से बढ़ा था। हालांकि, इसके बाद SpaceX के शेयर में भारी गिरावट हुई है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के मिशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली इस कंपनी ने 135 डॉलर प्रति शेयर के प्राइस पर IPO को पेश किया था। SpaceX का शेयर लिस्टिंग के बाद 225 डॉलर से अधिक पर गया था। इससे कंपनी की वैल्यू बढ़कर Amazon और Microsoft से ज्यादा हो गई थी। SpaceX के वैल्यूएशन को लेकर इनवेस्टर्स की आशंका के कारण इसके शेयर प्राइस में भारी गिरावट हुई है। पिछले वर्ष कंपनी को लगभग 4.9 अरब डॉलर का लॉस हुआ था।
भारत में पिछले वर्ष टेस्ला ने अपने बिजनेस की शुरुआत की थी। हालांकि, कंपनी की सेल्स कमजोर रही है। देश में पिछले वर्ष सितंबर से टेस्ला के Model Y की डिलीवरी 1,000 यूनिट्स से ज्यादा की हो गई है। सितंबर में टेस्ला ने 291 यूनिट्स के साथ अपनी सबसे अधिक मासिक सेल्स हासिल की है। टेस्ला को बड़े शहरों से अधिक डिमांड मिल रही है। इन शहरों में बेंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं। कंपनी की सेल्स कम होने का बड़ा कारण इम्पोर्ट ड्यूटी अधिक होने से इसके EVs के महंगे प्राइसेज हैं।
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