सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से मई 2026 के बीच Digital Arrest Scam से लोगों को 4,057.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जानिए यह ठगी कैसे होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
Digital Arrest Scam में खुद को अधिकारी बताकर लोगों को निशाना बनाते साइबर ठग
Photo Credit: Unsplash/ Rapha Wilde
भारत में पिछले कुछ वर्षों में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर होने वाली साइबर ठगी तेजी से बढ़ी है। ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और फिर उनसे लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा लेते हैं। आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, 2022 से मई 2026 के बीच देशभर में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 2,97,727 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि लोगों को 4,057.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
News18 की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी 39,925 शिकायतें दर्ज हुई थीं। इसके बाद मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली और 2024 में शिकायतों की संख्या बढ़कर 1,23,672 तक पहुंच गई। इसी साल लोगों को करीब 1,935.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो इस अवधि का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा।
वहीं, 2026 के पहले पांच महीनों में ही 15,215 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें करीब 481.1 करोड़ रुपये की ठगी हुई। हालांकि, हाल के आंकड़ों में शिकायतों और नुकसान में कुछ गिरावट भी देखने को मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराधी खासतौर पर सीनियर सिटीजंस को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में दिल्ली में एक NRI डॉक्टर दंपती से कथित तौर पर 14.84 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया था। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए कई दिनों तक उन्हें मानसिक दबाव में रखा और मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोप लगाकर पैसे ट्रांसफर करा लिए।
इसके अलावा, हाल के दिनों में गोवा में भी ऐसे कई साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें ठगों ने कहीं पुलिस अधिकारी तो कहीं बैंक कर्मचारी या सरकारी अधिकारी बनकर लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश की।
ज्यादातर मामलों में ठग सबसे पहले खुद को पुलिस, CBI, ED, RBI या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। इसके बाद पीड़ित को यह कहकर डराया जाता है कि उसके आधार कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंक खाते का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी गतिविधि में हुआ है।
इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को घंटों तक निगरानी में रखा जाता है, ताकि वह किसी से सलाह न ले सके। कई मामलों में लोगों को RTGS या दूसरे बैंक ट्रांसफर के जरिए तुरंत पैसे भेजने के लिए मजबूर किया जाता है।
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