ईरान में बिटकॉइन माइनिंग को तबाह कर सकते हैं इजरायल के हमले

पिछले वर्ष ईरान में क्रिप्टोकरेंसीज का इकोसिस्टम सात अरब डॉलर से अधिक का था। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी एंटिटीज की इस इकोसिटम में लगभग आधी हिस्सेदारी है

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 14 मार्च 2026 23:42 IST
ख़ास बातें
  • इजरायल ने ईरान के एनर्जी सेक्टर के कुछ हिस्सों पर हमले किए हैं
  • बिटकॉइन माइनिंग में इलेक्ट्रिसिटी की काफी खपत होती है
  • ईरान ने लगभग छह वर्ष पहले क्रिप्टो माइनिंग को कानूनी दर्जा दिया था

इजरायल और अमेरिकी हमलों में ईरान के एनर्जी सेक्टर को भी निशाना बनाया जा रहा है

पिछले कुछ वर्षों में बिटकॉइन माइनिंग में ईरान की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। इसके पीछे बड़ा कारण ईरान में इलेक्ट्रिसिटी पर मिलने वाली भारी सब्सिडी है। हालांकि, पिछले कुछ सप्ताह से ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए जा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों से क्रिप्टो माइनिंग पर बड़ा असर पड़ सकता है। 

एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायल ने ईरान के एनर्जी सेक्टर के कुछ हिस्सों पर हमले किए हैं। इससे बिटकॉइन माइनिंग के लिए इलेक्ट्रिसिटी उपलब्ध कराने वाले पावर ग्रिड में रुकावट आ सकती है। ईरान में लगभग सात लाख क्रिप्टो से जुड़ी मशीनें ऑपरेट की जाती हैं और इनके लिए नेशनल ग्रिड से सब्सिडी पर मिलने वाली लगभग 2,000 मेगावॉट इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल किया जाता है। ईरान ने लगभग छह वर्ष पहले क्रिप्टो माइनिंग को कानूनी दर्जा दिया था। इस इस्लामिक देश की सरकार इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रिसिटी को मामूली प्राइस पर उपलब्ध कराती है। इससे अन्य देशों की तुलना में एक बिटकॉइन को हासिल करने की कॉस्ट बहुत कम हो जाती है। बिटकॉइन माइनिंग से ईरान को बड़ा रेवेन्यू मिलता है। 

ईरान में क्रिप्टो माइनिंग से इलेक्ट्रिसिटी की कमी भी हो रही है। इस वजह से गैर कानूनी तौर पर क्रिप्टो माइनिंग करने वालों के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई की थी। पिछले कुछ सप्ताह से इजराल और अमेरिका की ओर से किए जा रहे हवाई हमलों के निशाने पर एनर्जी सेक्टर भी है। क्रिप्टो माइनिंग के लिए इलेक्ट्रिसिटी की लगातार सप्लाई की जरूरत होती है। इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई रुकने पर माइनिंग रिग बंद हो जाते हैं। 

इससे बिटकॉइन माइनिंग में ईरान की हिस्सेदारी घट सकती है। पिछले वर्ष ईरान में क्रिप्टोकरेंसीज का इकोसिस्टम सात अरब डॉलर से अधिक का था। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी एंटिटीज की इस इकोसिटम में लगभग आधी हिस्सेदारी है। पिछले वर्ष क्रिप्टो बिजनेस से IRGC को तीन अरब डॉलर से अधिक की रकम मिली थी। हालांकि, अमेरिका और बहुत से पश्चिमी देशों की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से क्रिप्टो से जुड़ी ट्रांजैक्शंस को कई लेयर वाले नेटवर्क्स और शेल फर्मों के जरिए किया जाता है। इसके लिए Ethereum और Tron जैसी क्रिप्टोकरेंसीज का इस्तेमाल किया जाता है। इसका कारण इन क्रिप्टोकरेंसीज की कम फीस और जल्द सेटलमेंट होना है। 
  

 

ये भी पढ़ेंभारतीय एक्सचेंजों में क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें

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