आरोग्य सेतु ऐप किसने बनाया? सरकार को पता नहीं...

सौरव दास द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि NIC, NeGD और MeitY आरोग्य सेतु ऐप के निर्माण से संबंधित जानकारी देने में असमर्थ रहे हैं।

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जगमीत सिंह, अपडेटेड: 28 अक्टूबर 2020 18:32 IST
ख़ास बातें
  • Aarogya Setu से संबंधित RTI सौरव दास द्वारा दायर की गई थी
  • RTI आवेदन का जवाब देने में असमर्थ रही NIC
  • केंद्रीय सूचना आयोग ने NeGD CPIO को ज़ारी किया कारण बताओ नोटिस
कोरोना वायरस महामारी के दौरान भारत में जहां हर जगह Aarogya Setu ऐप अनिवार्य कर दिया गया था, अब इस ऐप को लेकर सवालिया-निशान खड़े हो रहे हैं। जी हां, हाल ही में एक आरटीआई में ऐप से संबंधित कुछ जानकारी मांगी गई थी, जिसका जवाब देने में नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर (NIC) असमर्थ रही। केंद्रीय सूचना आयोग ने मंगलवार को नेशनल इन्फॉर्मेटिक सेंटर (NIC) से सवाल किया है कि उनकी वेबसाइट पर Aarogya Setu ऐप का नाम होने के बावजूद वह इस ऐप को बनाने वाले के बारे में जानकारी देने में कैसे असमर्थ रहे हैं। आयोग ने विभिन्न चीफ पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर्स (CPIOs) के साथ-साथ नेशनल ई-गवर्नेंस डिविज़न (NeGD), मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) और NIC को कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग ऐप से संबंधित आरटीआई आवेदन का स्पष्ट जवाब न देने के संबंध में कारण बताओ नोटिस ज़ारी किया है।

एक्टिविस्ट सौरव दास द्वारा NIC के खिलाफ शिकायत पर एक्शन लेते हुए आयोग ने NIC CPIO से सवाल किया है कि वह याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई RTI आवेदन का स्पष्ट उत्तर क्यों नहीं दे पाए। आपको बता दें, इसकी जानकारी सबसे पहले लीगल केस ट्रेसिंग वेबसाइट LiveLaw.in द्वारा दी गई थी।

सूचना आयुक्त ने आदेश में कहा, "आयोग CPIO, NIC को आदेश देता है कि वह लिखित में यह स्पष्ट करें कि वेबसाइट https://aarogyasetu.gov.in/ को gov.in डोमेन नेम के साथ कैसे क्रिएट किया गया, यदि उनके पास इसके बारे में कोई जानकारी थी ही नहीं।"

दास द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि NIC, NeGD और MeitY आरोग्य सेतु ऐप के निर्माण से संबंधित जानकारी देने में असमर्थ रहे हैं। बता दें, शिकायतकर्ता ने ऐप के प्रस्ताव की उत्पत्ति, इसे मिली मंजूरी की डिटेल्स, इसमें शामिल कंपनियों, व्यक्तियों व सरकारी विभागों के साथ-साथ ऐप को डेवलप करने वाले लोगों के बीच हुई बातचीत की कॉपी जैसी जानकारी मांगी थी।

सरकारी निकायों को दिशा-निर्देश देने के अलावा, आयोग ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि NeGD CPIO यह स्प्ष्ट नहीं कर सका कि RTI आवेदन का जवाब देने में उन्हें लगभग दो महीने की देरी क्यों हुई, वो भी यह जवाब देने में कि मांगी गई जानकारी उनके विभाग के पास नहीं है।
 

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