आपके फोन में हो सकता है नकली WhatsApp ऐप! Meta ने यूजर्स को भेजा अलर्ट

Meta ने WhatsApp के लिए नए सुरक्षा फीचर्स लॉन्च किए हैं और फेक ऐप के जरिए जासूसी के मामले को लेकर यूजर्स को चेतावनी दी है।

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Written by नितेश पपनोई, अपडेटेड: 2 अप्रैल 2026 16:47 IST
ख़ास बातें
  • Meta ने WhatsApp के लिए नए स्कैम प्रोटेक्शन फीचर्स लॉन्च किए
  • फेक ऐप से करीब 200 यूजर्स को बनाया गया निशाना
  • कंपनी ने ऑफिशियल WhatsApp ऐप को सुरक्षित बताया

WhatsApp पर फेक ऐप के जरिए जासूसी को लेकर Meta की चेतावनी

Photo Credit: Unsplash/ Grant Davies

Meta ने WhatsApp के लिए नए स्कैम और फ्रॉड प्रोटेक्शन टूल्स पेश किए हैं, जिनमें एक नया डिवाइस लिंकिंग वॉर्निंग सिस्टम शामिल है। कंपनी के मुताबिक यह फीचर यूजर्स को अलर्ट करेगा अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति उनके अकाउंट को रिमोट तरीके से एक्सेस करने की कोशिश करता है। इसी बीच कंपनी ने एक फेक WhatsApp ऐप को लेकर भी चेतावनी दी है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर करीब 200 Android और iPhone यूजर्स की जासूसी के लिए किया गया, खासकर इटली में।

ANSA को दिए गए बयान में Meta ने बताया कि इस फेक ऐप के जरिए यूजर्स को निशाना बनाया गया और प्रभावित अकाउंट्स को डिस्कनेक्ट कर दिया गया है। कंपनी ने यूजर्स को संभावित प्राइवेसी और सिक्योरिटी जोखिमों के बारे में भी अलर्ट किया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक यह फेक WhatsApp ऐप Asigint ने बनाया था, जो Sio Spa Group का हिस्सा है। कंपनी का कहना है कि हैकर्स ने सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर सीमित संख्या में यूजर्स को धोखा दिया और उन्हें ऑफिशियल WhatsApp ऐप के नाम पर यह स्पायवेयर डाउनलोड कराया। इसके जरिए यूजर्स के डिवाइस और अकाउंट तक रिमोट एक्सेस हासिल करने की कोशिश की गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Meta इस मामले में संबंधित फर्म को औपचारिक चेतावनी भेजने की तैयारी कर रही है, ताकि किसी भी तरह की गलत इरादे से की गई एक्टिविटीज को रोका जा सके।

इटली की La Repubblica की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का कहना है कि यह स्पायवेयर WhatsApp की किसी तकनीकी कमजोरी का फायदा नहीं उठाता है। यानी ऑफिशियल WhatsApp ऐप, उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फिलहाल सुरक्षित हैं। कंपनी यूजर्स को सलाह दे रही है कि वे ऐप केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही डाउनलोड करें।

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इस फेक ऐप के जरिए हैकर्स को यूजर्स के चैट्स और पर्सनल डेटा तक पहुंच मिल सकती थी, क्योंकि इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का सपोर्ट नहीं होता। ऐसे में यह यूजर्स की प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

 

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