आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार किया गया कंटेंट अक्सर आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है, जिसको लेकर लोगों में भ्रम हो जाता है कि कंटेंट इंसानों द्वारा या फिर एआई द्वारा लिखा गया है।
AI द्वारा तैयार लिखित टेक्स्ट आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है।
Photo Credit: Pexels/Kaitlyn Baker
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार किया गया कंटेंट अक्सर आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है, जिसको लेकर लोगों में भ्रम हो जाता है कि कंटेंट इंसानों द्वारा या फिर एआई द्वारा लिखा गया है। वैसे तो एआई जनरेट फोटो और वीडियो पर वॉटरमार्क के बारे में आपने सुना होगा, लेकिन अब एआई कंटेंट की खास पहचान के लिए भी एक तरीका आ रहा है। हालांकि, यह कोई आम वाटरमार्क नहीं होगा, बल्कि एआई द्वारा जनरेट कंटेंट का एक खास फॉर्मेट होगा, जिसे मशीनों द्वारा देखा जा सकेगा। दरअसल यूरोपीयन यूनियन एआई एक्ट के नियमों का पालन करते हुए Anthropic ने यह कदम उठाया है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
दरअसल यूरोप ने 2 अगस्त से अपने बाजार में सर्विस प्रदान करने वाले AI प्रोवाइडर्स के लिए AI से तैयार हुए कंटेंट को मार्क करना जरूरी कर दिया है। दूसरे बड़े मॉडल डेवलपर्स ने भी इसी कोड ऑफ प्रैक्टिस पर साइन किया है और वे अपने-अपने वॉटरमार्क लागू करेंगे। अब भविष्य के Claude मॉडल जो टेक्स्ट जनरेट करेंगे, उसमें वाटरमार्क होगा, जिससे इंसानों द्वारा और एआई द्वारा जनरेट किए गए कंटेंट में फर्क किया जा सकेगा।
क्या होंगे बदलाव
इसमें वॉटरमार्किंग का एक ऐसा तरीका इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे Claude के आउटपुट की क्वालिटी या कंटेंट पर कोई असर नहीं पड़ता है।
पढ़ने वालों को वॉटरमार्क वाले और बिना वॉटरमार्क वाले टेक्स्ट में कोई फर्क पता नहीं चल पाएगा।
वॉटरमार्किंग के लिए अतिरिक्त टोकन की जरूरत नहीं होती और यह ज्यादा महंगा भी नहीं होगा।
वॉटरमार्किंग में कोई पहचान करने वाली जानकारी नहीं होगी, जिससे इसे किसी संगठन से जोड़ा नहीं जा सकेगा।
वॉटरमार्किंग क्या है?
Claude लैंग्वेज मॉडल एक-एक शब्द चुनकर काम करता है। अगले शब्दों का चयन करने के लिए संभावित शब्दों की एक लिस्ट में से चयन किया जाता है। आखिर में पिछले टेक्स्ट के आधार पर सबसे सही या संभावित शब्द चुनता है। अधिकतर स्थितियों में पढ़ने वालों पर इसका इसका कोई खास असर नहीं होता है कि मॉडल आखिर में कौन सा शब्द चुनता है। सभी स्थितियों में वाक्य का मतलब लगभग एक जैसा ही रहता है।
वॉटरमार्किंग ऐसे ही काम करता है जो किसी बनाए गए टेक्स्ट में कई बार होते हैं, जिससे Claude के जवाबों में एक पैटर्न रहता है। पैटर्न पढ़ने वाले को नहीं पता चलता, लेकिन जिसके पास उसे डिकोड करने वाली की होगी तो उसकी पहचान की जा सकेगी। वॉटरमार्किंग का इस्तेमाल होने पर भी शब्दों का चयन रैंडम होता है, लेकिन रैंडमनेस का सोर्स अलग होता है। किसी वाक्य में अगला शब्द चुनने के लिए किसी रैंडम नंबर जनरेटर का इस्तेमाल करने की जगह वॉटरमार्किंग की और उससे पहले आए कुछ शब्दों का इस्तेमाल करके यह तय किया जाता है कि मॉडल को कौन सा शब्द चुनना चाहिए।
वॉटरमार्किंग से आउटपुट पर असर?
वॉटरमार्किंग से Claude के कंटेंट की क्वालिटी पर कोई असर नहीं पड़ता है। वॉटरमार्क वाले जवाब और बिना वॉटरमार्क वाले जवाब में कोई फर्क नहीं होता है। आमतौर पर AI वॉटरमार्क बैंक नोट, अन्य फिजिकल चीज और कुछ डिजिटल डॉक्यूमेंट पर मौजूद वॉटरमार्क से काफी अलग होते हैं, जिन्हें खुली आंखों से देखा नहीं जा सकता है।
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