Signal के फाउंडर ने Confer नाम का नया AI चैटबॉट पेश किया है, जो प्राइवेसी पर फोकस करता है।
Confer AI चैटबॉट यूजर की बातचीत को प्राइवेट रखने का दावा करता है
Photo Credit: Confer
Signal के फाउंडर Moxie Marlinspike ने AI चैटबॉट्स की प्राइवेसी को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच एक नया सर्विस Confer पेश किया है। यह चैटबॉट उन यूजर्स के लिए बनाया गया है, जो AI से बातचीत तो करना चाहते हैं, लेकिन यह नहीं चाहते कि उनकी बातें कंपनियों के सर्वर पर पढ़ी जाएं या भविष्य में उनके खिलाफ इस्तेमाल हों। Marlinspike के मुताबिक, “Confer ऐसा सर्विस है, जहां आप अपने आइडियाज पर काम कर सकते हैं, बिना इस डर के कि एक दिन वही बातें आपके खिलाफ इस्तेमाल की जाएंगी।”
आमतौर पर OpenAI, Google, Meta और Anthropic जैसे AI प्रोवाइडर्स के चैटबॉट्स में की गई बातचीत सर्वर तक जाती है। भले ही कंपनियां दावा करें कि डेटा को आगे मॉडल ट्रेनिंग में इस्तेमाल नहीं किया जा रहा, लेकिन कई रिपोर्ट्स दावा कर चुकी हैं कि बातचीत एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होती हैं, क्योंकि जरूरत पड़ने पर प्रोवाइडर्स इन चैट्स को पढ़ सकते हैं। Confer का दावा है कि वह इसी मॉडल को बदलता है। इस सर्विस का इस्तेमाल करने के लिए यूजर को पहले रजिस्ट्रेशन करना होता है और एक passkey बनानी होती है, जिसे Face ID, फिंगरप्रिंट या डिवाइस PIN से सुरक्षित किया जा सकता है।
प्लेटफॉर्म के मुताबिक, इसके बाद बनने वाली सभी क्रिप्टोग्राफिक keys डिवाइस पर ही रहती हैं और सर्वर तक नहीं जातीं। यानी चैट रिक्वेस्ट्स लोकली एन्क्रिप्ट होती हैं और Confer खुद भी उन्हें नहीं देख सकता।
हालांकि, AI मॉडल को चलाने के लिए सर्वर और GPU की जरूरत होती है और वहां किसी न किसी का एक्सेस होता ही है। इसी समस्या को हल करने के लिए Confer ने कथित तौर पर Confidential Computing और Trusted Execution Environment (TEE) का सहारा लिया है। इसमें AI कोड एक हार्डवेयर-लेवल आइसोलेटेड एनवायरनमेंट में रन होता है। कंपनी ने इसका सोर्स कोड GitHub पर पब्लिक भी किया है, ताकि इसे ट्रांसपेरेंट रखा जा सके।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि Confer किस AI मॉडल का इस्तेमाल करता है। माना जा रहा है कि यह किसी ओपन-सोर्स मॉडल पर आधारित हो सकता है, जैसे Meta का Llama, Google का Gemma या फ्रांस की कंपनी Mistral के मॉडल्स।
अपने ब्लॉग पोस्ट में Marlinspike ने AI चैटबॉट्स को लेकर एक और बड़ी चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यूजर्स अनजाने में अपने सबसे पर्सनल विचार AI के साथ शेयर कर देते हैं, जिन्हें कंपनियां स्टोर करती हैं, उनसे कमाई करती हैं और आगे चलकर विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। उन्होंने यह भी इशारा किया कि भविष्य में AI चैटबॉट्स यूजर की सोच, डर और आदतों के आधार पर पर्सनलाइज्ड ऐड्स पुश कर सकते हैं। Marlinspike ने इसकी तुलना “थैरेपिस्ट को पैसे देकर किसी को मनवाने” जैसी स्थिति से की।
इसके अलावा उन्होंने यह भी आशंका जताई कि केवल कंपनियां ही नहीं, बल्कि सरकारी एजेंसियां और लॉ एनफोर्समेंट भी इन बातचीतों तक पहुंच बना सकती हैं। उनके शब्दों में, “आपको जवाब मिलता है, लेकिन उन्हें सब कुछ मिल जाता है।”
लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो की लेटेस्ट खबरें hindi.gadgets 360 पर और हमारे CES 2026 पेज पर देखें