AI हो रहा फेल? 95 प्रतिशत प्रोजेक्ट हुए नाकाम, जानें क्या है वजह

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अधिकतर टूल बाजार में नाकाम हो रहे हैं।

विज्ञापन
Written by साजन चौहान, अपडेटेड: 26 अगस्त 2025 12:24 IST
ख़ास बातें
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मार्केट तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है।
  • कई छोटी कंपनियां भी हैं जो कि AI टूल पर काम कर रही हैं।
  • AI आने के बाद से यह चर्चा भी चल रही है कि AI से काम तेज हो जाएगा।

AI मार्केट तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है।

Photo Credit: Unsplash/Steve Johnson

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मार्केट तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है। दुनिया भर में NVIDIA, Microsoft, Apple, Google, Amazon और Meta जैसी बड़ी कंपनियां AI पर हजारों करोड़ों रुपये में काफी निवेश कर रही हैं। इसके अलावा देश और दुनिया में कई छोटी कंपनियां भी हैं जो कि AI टूल पर काम कर रही हैं। AI आने के बाद से यह चर्चा भी चल रही है कि AI से काम तेज हो जाएगा और मुनाफा ज्यादा होने लगेगा। कई जगह तो नौकरियां जाने लगेंगी और यह इंसानों की जगह ले लेगा और उनसे बेहतर काम करेगा। मगर हाल ही में आई MIT की रिपोर्ट से अब नए खुलासे हुए हैं और नई जानकारी सामने आ रही है। आइए AI को लेकर हुए खुलासों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

MIT के NANDA प्रोजेक्ट के तहत आई एक नई रिपोर्ट जेनएआई डिवाइड: स्टेट ऑफ एआई इन बिजनेस 2025 में एआई को लेकर काफी खुलासे हुए हैं। जहां कंपनियां जनरेटिव AI में लगातार निवेश कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर कंपनियों द्वारा AI में निवेश के बावजूद मुनाफा बढ़ता हुआ नजर नहीं आ रहा है, ज्यादातर AI प्रोजेक्ट नाकाम साबित हो रहे हैं। अपग्रेडेड और पावरफुल नए मॉडल को लाने के बावजूद लगभग 5 प्रतिशत AI पायलट प्रोग्राम ही सफल हो रहे हैं। वहीं अधिकतर प्रोग्राम बंद पड़ जाते हैं, जिससे कोई फायदा नहीं होता है। इस रिसर्च में लीडर्स के साथ 150 इंटरव्यू, 350 कर्मचारियों के सर्वे और 300 पब्लिक AI डिप्लॉयमेंट का विश्लेषण किया गया है, जिससे सफल होने वाले और रुके हुए प्रोजेक्ट के बीच अंतर साफ पता चला है।

क्यों फेल हो रहा AI


रिसर्च के अनुसार, 95 प्रतिशत कंपनियों के लिए जनरेटिव AI का उपयोग काफी कमजोर साबित हुआ है। इसमें दिक्कत AI मॉडल की क्वालिटी की नहीं, बल्कि टूल्स और कंपनियों दोनों के बीच सीखने का अंतर है। रिसर्च से पता चला है कि बिजनेस में खराब AI इंटीग्रेशन है, जिसके चलते नतीजे नहीं मिल रहे हैं। चैटजीपीटी जैसे सामान्य टूल अपनी फ्लेक्सिबिलिटी के चलते आम लोगों के लिए तो बेहतर हैं, लेकिन एंजटरप्राइजेस उपयोग में ये टूल वर्कफ्लो या उसके अनूकूल नहीं होने के चलते उतने कारगर नहीं रह जाते हैं। बिजनेस स्तर पर आधे से ज्यादा जनरेटिव AI बजट को सेल्स और मार्केटिंग टूल्स पर खर्च किया जाता है। हालांकि, बैक-ऑफिस ऑटोमेशन, बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग खत्म करने से लेकर एक्सटरनल एजेंसी की लागत कम करने में AI ज्यादा कारगर साबित हुआ है। MIT  की रिसर्च में AI के सफल न होने की वजह लर्निंग गैप बताया गया है।

 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

ये भी पढ़े: AI, AI Fail, MIT, Artificial Intelligence

साजन चौहान Gadgets 360 में सीनियर सब ...और भी

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. Realme 16T 5G vs OnePlus Nord CE 6 vs Vivo T5 Pro 5G: जानें कौन सा फोन है बेस्ट?
#ताज़ा ख़बरें
  1. Realme 16T 5G vs OnePlus Nord CE 6 vs Vivo T5 Pro 5G: जानें कौन सा फोन है बेस्ट?
  2. भारत के EV मार्केट में Tesla से आगे निकली VinFast
  3. डुअल-डिवाइस कनेक्टिविटी के साथ लॉन्च हुए Oppo Enco Air 5s, कॉल नॉयस रिडक्शन का फीचर
  4. Vivo S60 में मिल सकता है Snapdragon 8s Gen 3 चिपसेट, Geekbench पर हुई लिस्टिंग
  5. Oppo Reno 16 सीरीज हुई लॉन्च, ट्रिपल रियर कैमरा यूनिट, जानें प्राइस, फीचर्स
  6. Honor 600 सीरीज हुई लॉन्च: 200MP कैमरा, 8600mAh बैटरी और OLED डिस्प्ले वाले फोन्स की इतनी है कीमत
  7. 144Hz डिस्प्ले, 10420mAh बैटरी वाला नया Oppo Pad 6 टैबलेट हुआ लॉन्च, जानें कीमत
  8. मिडल-ईस्ट में समझौते की संभावना से क्रिप्टो मार्केट में तेजी, 77,000 डॉलर से ज्यादा हुआ Bitcoin का प्राइस
  9. Redmi के इन फोन्स की कीमत फिर बढ़ी, कुछ मॉडल्स अब 5,500 रुपये तक महंगे!
  10. मॉनिटर जैसा दिखता है, लेकिन अंदर छिपा है पूरा AI PC! Asus ने लॉन्च किया नया VM441 AiO
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.