Solar Storm Alert! सूर्य से निकला CME, आज पृथ्‍वी से टकरा सकता है बड़ा सौर तूफान

Solar Storm : ये रेडियो तरंगों में परेशानी पैदा कर सकते हैं, जिसकी वजह से अस्‍थायी रेडियो ब्‍लैकआउट हो सकता है।

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Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 22 नवंबर 2022 13:07 IST
ख़ास बातें
  • G1-क्लास के सौर तूफान की संभावना है
  • यह एक मामूली तूफान होगा
  • पृथ्‍वी पर इसका कोई बड़ा असर होने की उम्‍मीद नहीं है

Solar Storm : CME, सौर प्लाज्मा के बड़े बादल होते हैं। सौर विस्फोट के बाद ये बादल अंतरिक्ष में सूर्य के मैग्‍नेटिक फील्‍ड में फैल जाते हैं।

सूर्य में होने वाली घटनाएं पृथ्‍वी को ‘मुश्‍किल' में डाल रही हैं। सूर्य अपने 11 साल के चक्र से गुजर रहा है। इस वजह से यह बहुत अधिक एक्टिव फेज में है। सूर्य में बने सनस्‍पॉट (SunSpot) के कारण इससे सोलर फ्लेयर्स (Solar Flares) और कोरोनल मास इजेक्‍शन (CME) रिलीज हो रहे हैं। ऐसे ही एक सीएमई से निकला सौर तूफान (Solar Storm) आज यानी 22 नवंबर को हमारी पृथ्‍वी से टकरा सकता है। आइए जानते हैं यह सौर तूफान कितना बड़ा है और इसकी वजह से पृथ्‍वी पर क्‍या असर हो सकता है। 

स्पेसवेदर डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, आज 22 नवंबर को G1-क्लास के सौर तूफान की संभावना है। G1 क्‍लास के सौर तूफान बहुत पावरफुल नहीं होते। हालांकि कई बार यह पृथ्‍वी को प्रभावित कर सकते हैं। यह रेडियो तरंगों में परेशानी पैदा कर सकते हैं, जिसकी वजह से अस्‍थायी रेडियो ब्‍लैकआउट हो सकता है। G1 क्‍लास के तूफान GPS सिस्टम और वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम को भी प्रभावित कर सकते हैं। इसकी वजह से विमानों की उड़ान के समय में देरी हो सकती है और शिप ट्रांसपोर्टेशन पर असर पड़ सकता है। 

इसके मुकाबले जो पावरफुल सौर तूफान होते हैं, वो सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी को बाधित कर सकते हैं। पावर ग्रिडों को फेल कर सकते हैं। ये तूफान सीधे तौर पर इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते। नेशनल ओसिएनिक एंड एटमॉस्‍फ‍ियरिक एडमिनिस्‍ट्रेशन (NOAA) सूर्य की निगरानी करता है और पता लगाता है कि कहीं किसी सौर तूफान की संभावना तो नहीं है। इस काम में सैटेलाइट्स की मदद ली जाती है। 

कोरोनल मास इजेक्‍शन को आसान भाषा में समझना हो, तो CME, सौर प्लाज्मा के बड़े बादल होते हैं। सौर विस्फोट के बाद ये बादल अंतरिक्ष में सूर्य के मैग्‍नेटिक फील्‍ड में फैल जाते हैं। अंतरिक्ष में घूमने की वजह से इनका विस्‍तार होता है और अक्‍सर यह कई लाख मील की दूरी तक पहुंच जाते हैं। कई बार तो यह ग्रहों के मैग्‍नेटिक फील्‍ड से टकरा जाते हैं। जब इनकी दिशा की पृथ्‍वी की ओर होती है, तो यह पृथ्‍वी को प्रभावित कर सकते हैं। आज संभावित CME का बहुत ज्‍यादा प्रभाव होने का अनुमान नहीं है। 
 

 

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