बाहरी टक्‍करों से कैसे प्रभावित होते हैं हमारे ग्रह, यह रिसर्च खोल सकती है जीवन के नए दरवाजे

रिसर्चर्स ने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण डेटा और विस्तृत मॉडलिंग का इस्‍तेमाल किया। उन्‍होंने पाया कि जब बड़ी वस्तुएं चंद्रमा या अन्य ग्रहों के पिंडों से टकराती हैं, तो उसके असर से ग्रहों की सतह और संरचना पर असर पड़ सकता है।

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प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 21 अगस्त 2022 01:56 IST
ख़ास बातें
  • ऐसी रिसर्च जीवन की तलाश के लिए बेहतरीन जगह के बारे में बता सकती हैं
  • मंगल और पृथ्‍वी के शुरुआती दौर में ऐसे प्रभाव रहे होंगे
  • अगर उस समय जीवन मौजूद होता, तो इसके बड़े पैमाने पर प्रभाव होते

यह असर सतह से लेकर ग्रह की गहराई तक हो सकता है।

किसी चीज पर जोर से मारने पर क्‍या होता है? या तो वह टूट जाती है या नहीं टूटती। अगर नहीं टूटती, तब भी उसका स्‍ट्रक्‍चर तो प्रभावित होता ही है। एक नई रिसर्च यही समझाने की कोशिश करती है। पर्ड्यू यूनिवर्सिटी (Purdue University) के असोसिएट प्रोफेसर ब्रैंडन जॉनसन और रिसर्चर सीन विगिन्स ने अपनी स्‍टडी में यही जानने की कोशिश की है कि ऐसे प्रभाव (impacts) बाहरी अंतरिक्ष में ग्रहों के पिंडों, एटस्‍रॉयड्स, चंद्रमाओं और अन्य चट्टानों को कैसे प्रभावित करते हैं।   

रिपोर्ट के अनुसार, हमारे सौर मंडल की हरेक ठोस चीज लगातार झटके महसूस करती है, चाहे वह साइज में बड़ी हो या छोटी। पृथ्वी पर भी हरेक जगह कम से कम तीन प्रमुख प्रभावों से प्रभावित है। रिसर्चर्स ने अपने टेस्‍ट सब्‍जेक्‍ट के तौर पर चंद्रमा को चुना। जॉनसन, विगिन्स और उनकी टीम ने ग्रहों के इम्‍पैक्‍ट और सरंध्रता (porosity) के बीच रिलेशनशिप को निर्धारित करने का लक्ष्‍य रखा। 

रिसर्चर्स ने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण डेटा और विस्तृत मॉडलिंग का इस्‍तेमाल किया। उन्‍होंने पाया कि जब बड़ी वस्तुएं चंद्रमा या अन्य ग्रहों के पिंडों से टकराती हैं, तो उसके असर से ग्रहों की सतह और संरचना पर असर पड़ सकता है। यह असर सतह से लेकर ग्रह की गहराई तक हो सकता है। नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में प्रकाशित इस स्‍टडी में रिसर्चर्स ने अपनी फाइंडिंग्‍स के बारे में विस्तार से बताया है। 

जॉनसन ने बताया कि नासा के ग्रेविटी रिकवरी एंड इंटीरियर लेबोरेटरी (GRAIL) मिशन ने चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण को मापा। इससे पता चला कि चंद्रमा की क्रस्‍ट बहुत गहराई तक झरझरी है यानी उसमें छिद्र हैं। उन्‍होंने कहा कि हमारे पास इस बात की डिटेल नहीं है कि चंद्रमा इतना छिद्रपूर्ण कैसे होगा। लेकिन यह पहली रिसर्च है, जो बताती है कि कोई बड़ी टक्‍कर की वजह से चंद्रमा की क्रस्‍ट पर असर हुआ और चंद्रमा इतना छिद्रपूर्ण हो गया। 

ग्रहों और चंद्रमा के बारे में इन चीजों को समझकर वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष से जुड़े अन्‍वेषणों में मदद मिल सकती है। ऐसी रिसर्च साइंटिस्‍ट को जीवन की तलाश के लिए बेहतरीन जगह के बारे में बता सकते हैं। विगिन्‍स ने कहा कि बहुत सी चीजें हैं जो हमें उत्साहित करती हैं। मंगल और पृथ्‍वी के शुरुआती दौर में ऐसे प्रभाव रहे होंगे। अगर उस समय जीवन मौजूद होता, तो इसके बड़े पैमाने पर प्रभाव होते, जो इन ग्रहों को बेकार बना देते। महासागरों को उबाल देते। हालांकि इस तरह के प्रभाव जीवन को बचाने में भी मदद कर सकते हैं, क्‍यो‍ंकि हो सकता है जीव छिद्रों और दरारों में जीव‍ित रहें। 
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ये भी पढ़े: Science News, impacts, Palnet, moon, porosity, Purdue University
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