अम‍ेरिकी लैब में बना कोविड का हाइब्रिड वायरस है कितना है हानिकारक?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि रिसर्चर्स ने कोविड वायरस को ज्‍यादा घातक बना दिया है।

विज्ञापन
Written by प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 30 अक्टूबर 2022 17:19 IST

एक बयान में बोस्टन यूनिवर्सिटी ने कहा है कि यह रिसर्च गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च नहीं है। इसका मतलब है कि इसने वाशिंगटन में SARS-CoV-2 वायरस के तनाव को नहीं बढ़ाया या इसे और अधिक खतरनाक नहीं बनाया।

Covid-19 महामारी से जूझ रहे दुनिया के देशों के सामने एक रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिकी रिसर्चर्स ने लैब में कोविड-19 वायरस का एक खतरनाक वैरिएंट डेवलप किया है। दावा है कि यह बेहद खतरनाक है और इससे संक्रमितों में मृत्‍यु दर 80% है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि रिसर्चर्स ने कोविड वायरस को ज्‍यादा घातक बना दिया है। बताया जाता है कि नया म्‍यूटेंट वैरिएंट, मूल कोविड-19 और ओमिक्रॉन का एक हाइब्रिड है। रिसर्च करने वाली बोस्‍टन यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने इन दावों को ‘झूठा और गलत' बताया है। 

लाइव साइंस के अनुसार, नया ओमिक्रॉन स्पाइक-कैरिंग वायरस, ओमिक्रॉन वैरिएंट से स्पाइक प्रोटीन को मूल SARS-CoV-2 वायरस से जोड़कर बनाया गया है। बताया जाता है कि इससे संक्रमित 80% चूहे लैब में मर गए। इससे यह मूल ओमिक्रॉन वैरिएंट से भी ज्‍यादा गंभीर हो गया है। इसके मुकाबले मूल ओमिक्रॉन वैरिएंट ने किसी चूहे को नहीं मारा था। हालांकि नया हाइब्रिड वायरस उस वायरस से कम घातक था, जो वुहान में था और जिसने 100 फीसदी लैब के चूहों को मार डाला था। 

रिसर्चर्स का कहना है कि चूहों में ओमिक्रॉन हल्के और गैर घातक संक्रमण का कारण बनता है। वहीं, हाइब्रिड वायरस 80 फीसदी मृत्यु दर के साथ गंभीर बीमारी शुरू करता है। रिसर्चर्स का कहना है कि स्पाइक प्रोटीन संक्रामता के लिए जिम्मेदार है। इसकी संरचना में बदलाव से यह ज्‍यादा घातक हो जाता है। रिसर्चर्स ने अपनी फाइंडिंग्‍स को 14 अक्टूबर को प्रीप्रिंट डेटाबेस bioRxiv पर पब्लिश किया है। इनका पियर-रिव्‍यू होना बाकी है। 

हालांकि तमाम मीडिया रिपोर्टों में इस रिसर्च पर सवाल उठाए जा रहे हैं। रिसर्च को खतरनाक बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस रिसर्च ने एक खतरनाक वैरिएंट को जन्‍म दे दिया है। अब रिसर्चर्स ने अपना पक्ष रखा है। एक बयान में बोस्टन यूनिवर्सिटी ने कहा है कि यह रिसर्च गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च नहीं है। इसका मतलब है कि इसने वाशिंगटन में SARS-CoV-2 वायरस के तनाव को नहीं बढ़ाया या इसे और अधिक खतरनाक नहीं बनाया। इस शोध ने वायरस को कम खतरनाक बना दिया। एनईआईडीएल के डायरेक्‍टर रोनाल्ड बी. कॉर्ली ने कहा है कि मीडिया रिपोर्टों ने ‘मैसेज को सनसनीखेज बना दिया' और ‘स्‍टडी और इसके लक्ष्यों को पूरी तरह से गलत तरीके से प्रस्तुत किया।'
 

 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. Google से मिनटों में ढूंढें खोया हुआ फोन, नुकसान से तुरंत होगा बचाव, जानें आसान तरीका
#ताज़ा ख़बरें
  1. OnePlus Nord CE 6, Nord CE 6 Lite अगले सप्ताह होंगे भारत में लॉन्च, 8,000mAh तक की बैटरी
  2. Amazon Scholarship: भारतीय छात्रों के लिए पढ़ाई, ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के साथ ₹2 लाख की मदद!
  3. Samsung देगी Meta, Apple को टक्कर? ला रही AI स्मार्ट ग्लासेस!
  4. सबसे महंगी क्रिप्टोकरेंसी में बड़ी खरीदारी, Strategy ने खरीदे 3,200 से ज्यादा बिटकॉइन
  5. Google से मिनटों में ढूंढें खोया हुआ फोन, नुकसान से तुरंत होगा बचाव, जानें आसान तरीका
  6. Tecno Spark 50 Pro में मिल सकती है 6,000mAh की बैटरी, जल्द लॉन्च की तैयारी
  7. Oppo Find X10 में दिया जा सकता है 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा
  8. सैटेलाइट से धरती के नक्शे पर दिखेगा आपका नाम! नासा की अनोखी पहल
  9. Xiaomi 17T, 17T Pro जल्द होंगे लॉन्च, स्पेसिफिकेशंस और कीमत का हुआ खुलासा
  10. Samsung Galaxy S27 सीरीज में मिल सकता है नया कैमरा लेआउट
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.