आग के गोले जैसा ग्रह मिला! बन सकता है चट्टानों से भरी सुपर-अर्थ!

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ही अन्य ग्रह की खोज की है जो अभी आग के गाले की तरह धधक रहा है। यह हमसे 106 प्रकाशवर्ष दूर है।

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Written by हेमन्त कुमार, अपडेटेड: 7 मार्च 2026 10:07 IST
ख़ास बातें
  • आग के गोले जैसा ग्रह छोटे तारे का चक्कर लगा रहा है।
  • यह हमसे 106 प्रकाशवर्ष दूर है।
  • यह नेप्च्यून से छोटा है लेकिन पृथ्वी से बड़ा है।

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ही अन्य ग्रह की खोज की है जो अभी आग के गाले की तरह धधक रहा है।

Photo Credit: Vecteezy

अंतरिक्ष की दुनिया में अनगिनत ग्रह मौजूद हो सकते हैं। आमतौर पर हम केवल अपने सौरमंडल के ग्रहों के बारे में जानते हैं। लेकिन सौरमंडल के बाहर भी करोड़ों ग्रह का अनुमान लगाया जाता है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे ही अन्य ग्रह की खोज की है जो अभी आग के गाले की तरह धधक रहा है। यह हमसे 106 प्रकाशवर्ष दूर है। यह नेप्च्यून से छोटा है लेकिन पृथ्वी से बड़ा है। इसकी त्रिज्या पृथ्वी की 2.1 गुना है और द्रव्यमान 9.1 गुना है। यह ग्रह एक छोटे तारे के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है। यह 6.18 दिन में एक चक्कर पूरा करता है। आइए जानते हैं इस ग्रह की खोज के क्या हैं मायने। 

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से कई गुना बड़े और भारी ग्रह का पता लगाया है जो आग के गोले की तरह धधक रहा है। यह TOI-5734 नामक तारे का चक्कर लगा रहा है। यह पृथ्वी से 106 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह नेप्च्यून ग्रह से छोटा है लेकिन पृथ्वी से काफी बड़ा है। इसकी त्रिज्या पृथ्वी की 2.1 गुना है और द्रव्यमान 9.1 गुना है। यह अपने तारे का चक्कर 6.18 दिन में पूरा करता है। तारे के बहुत नजदीक होने के कारण यह आग का गोला बना हुआ है और इसका तापमान 688 K बताया गया है। 

इसका तारा TOI-5734 है जो कि एक नया तारा है। यह K-टाइप बौना तारा है जो सूर्य के द्रव्यमान का 0.72 गुना है। TOI-5734 b त्रिज्या घाटी के ऊपरी किनारे के पास स्थित है, जो 1.5 और 2.0 पृथ्वी त्रिज्या के बीच ग्रह के आकार में एक अंतर है। इस ट्रांजीशन क्षेत्र में बहुत कम ग्रह पाए जाते हैं, जो यह दर्शाता है कि TOI-5734 b मध्य-परिवर्तन की अवस्था में हो सकता है।

स्टडी से पता चलता है कि प्रकाश वाष्पीकरण के कारण ग्रह अपना वायुमंडल खो रहा है। खगोलविदों का अनुमान है कि यह लगभग 30 करोड़ वर्षों में अपना आदिम आवरण खो सकता है, जिससे संभवतः एक चट्टानी सुपर-अर्थ का निर्माण हो सकता है। इस घटना का पता लगाने में इस्तेमाल किया गया पहला प्रमुख उपकरण ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) था। इसका इस्तेमाल किसी ग्रह के आकार का अंदाजा लगाने के लिए किया जाता था, जिसमें तारे की चमक में होने वाली सूक्ष्म गिरावट को देखा जाता था। यह गिरावट तब होती है जब कोई ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है।

इस धधकते ग्रह को पहली बार 2022 में देखा गया था। पुष्टि के लिए एक अन्य उपकरण HARPS-N का इस्तेमाल किया गया था। ये दोनों उपकरण मिलकर ग्रह के द्रव्यमान, त्रिज्या और समग्र घनत्व को मापते हैं, जिससे प्लेनेटरी सिस्टम के विकास के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिलती है। 

 

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हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर ...और भी

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