150 ग्राम का पांडा देखा है? चीन ने कमाल कर दिया

पैदा हुए पांडा में मेल और फीमेल दोनों हैं। जन्‍म के समय इनका वजन 16.2 औंस (459 ग्राम) और 5.3 औंस (150.252473 ग्राम) था।

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प्रेम त्रिपाठी, अपडेटेड: 26 अगस्त 2022 20:35 IST
ख़ास बातें
  • पैदा हुए पांडा में मेल और फीमेल दोनों हैं
  • दोनों ने अभी तक अपनी आंखें नहीं खोली हैं
  • चीन ने पहली बार साल 1955 में पांडा के प्रजनन के प्रयास शुरू किए थे

दोनों पांडा स्‍वस्‍थ बताए गए हैं। दोनों अपनी मां के साथ समय बिता रहे हैं और माहौल के साथ एडजस्‍ट कर रहे हैं।

बीते करीब 40 साल में चीन ने पांडा (panda) के संरक्षण को लेकर काफी काम किया है। इस मंगलवार को चीन के एक प्रजनन (breeding) केंद्र में जुड़वां पांडा ने जन्‍म लिया है। खास बात यह है कि ये पांडा कृत्रिम गर्भाधान (artificial insemination) के जरिए पैदा हुए हैं। बीते कुछ साल में चीन के प्रजनन केंद्रों के बीच कृत्रिम गर्भाधान काफी लोकप्रिय हुआ है। ऐसा इसलिए भी है, क्‍योंकि आमतौर पर पांडा प्रजनन के लिए प्रेरित नहीं होते हैं।

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, पैदा हुए पांडा में मेल और फीमेल दोनों हैं। जन्‍म के समय इनका वजन 16.2 औंस (459 ग्राम) और 5.3 औंस (150.252473 ग्राम) था। दोनों पांडा स्‍वस्‍थ बताए गए हैं। दोनों अपनी मां के साथ समय बिता रहे हैं और माहौल के साथ एडजस्‍ट कर रहे हैं। 

दोनों पांडा अभी गुलाबी रंग के दिखाई दे रहे हैं। खास बात यह है कि दोनों ने अभी तक अपनी आंखें नहीं खोली हैं। बताया जाता है कि कम से कम छह सप्ताह के बाद ये अपनी आंखें खोलेंगे। इनकी मां ‘किन किन' का जन्म भी प्रजनन केंद्र में हुआ था। इससे पहले ‘किन किन' ने साल 2020 में जुड़वां फीमेल पांडा को जन्म दिया था।

चीन ने पहली बार साल 1955 में पांडा के प्रजनन के प्रयास शुरू किए थे। उसे साल 1963 में में कामयाबी मिली, जब 9 सितंबर को ‘मिंग मिंग' नाम के पांडा का बीजिंग चिड़ियाघर में जन्‍म हुआ था। उसके बाद से चीन ने कई सफल कोशिशें कीं। प्रजनन केंद्रों में जन्‍मे कई पांडा को बाद में जंगलों में भी छोड़ा गया। बताया जाता है कि अब चीन के जंगलों में पांडा की आबादी तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि यह 1,800 तक पहुंच गई है।
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इसके अलावा, करीब 500 पांडा चीन के चिडि़याघरों में हैं। साल 2021 में चीन ने ऐलान किया कि वह पांडा को विलुप्‍त हो रही प्रजातियों की लिस्‍ट से हटा रहा है। पांडा को पहली बार साल 1990 में विलुप्‍त होने वाली प्रजाति के तौर पर कैटिगराइज किया गया था। 30 से ज्‍यादा साल तक संरक्षण के बाद उनकी संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। पांडा बांस के जंगलों में रहना पसंद करते हैं और चीन ने बांस के जंगलों को फ‍िर से लगाकर उनके आवास को बढ़ाने में मदद की है।  
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