तारों को भी लगते हैं झटके! सुनामी जैसा कंपन‍ बिगाड़ सकता है उनका आकार

इस ऑब्‍जर्वेट्री ने लगभग दो अरब सितारों के आंकड़े जुटाए थे, जिनके आधार पर यह खोज की गई है।

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गैजेट्स 360 स्टाफ, अपडेटेड: 15 जून 2022 13:43 IST
ख़ास बातें
  • हमारी आकाशगंगा यानी मिल्‍की-वे में मौजूद तारे भी ‘कंपन’ का अनुभव करते हैं
  • जैसे पृथ्‍वी पर सुनामी आती है, वैसा ही कुछ अभास तारों में भी होता है
  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मिल्की वे-मैपिंग गैया मिशन ने यह खोज की है

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मिल्की वे-मैपिंग गैया मिशन द्वारा यह खोज की गई है।

हमारी आकाशगंगा यानी मिल्‍की-वे में मौजूद तारे भी ‘कंपन' का अनुभव करते हैं। यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन फैक्‍ट है। वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि आकाशगंगा में स्थित तारे (या ग्रह) ‘स्टारक्वेक' को एक्‍सपीरियंस करते हैं। जैसे पृथ्‍वी पर सुनामी आती है, वैसा ही कुछ अभास तारों में भी होता है। दावा तो यह भी है कि ये स्टारक्वेक इतने पावरफुल हैं कि किसी तारे का आकार भी बदल सकते हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मिल्की वे-मैपिंग गैया मिशन द्वारा यह खोज की गई है। 

इस खोज तक पहुंचने में गैया स्‍पेस ऑब्‍जर्वेट्री द्वारा जुटाए गए डेटा की अहम भूमिका रही। इस ऑब्‍जर्वेट्री ने लगभग दो अरब सितारों के आंकड़े जुटाए थे, जिनके आधार पर यह खोज की गई है। यूरोपीय स्‍पेस एजेंसी की ओर से बताया गया है कि पहले भी ऑब्‍जर्वेट्री को तारों में कंपन का पता चलता था। तारों में यह कंपन उनके आकार को बनाए रखने के लिए होता था। अब जिन कंपनों के बारे में पता चला है, वह सुनामी की तरह हैं। 
इस ऑब्‍जर्वेशन से खगोलविदों को हमारी आकाशगंगा की संरचना का पुनर्निर्माण करने में मदद मिलेगी। वह पता लगा पाएंगे कि अरबों साल में यह कैसे डेवलप हुई है। इस खोज के बारे में स्‍पेस एजेंसी ने गैया मिशन के ऑफ‍िशियल ट्विटर हैंडल पर एक पोस्ट भी किया है।

गौरतलब है कि इस ऑब्‍जर्वेट्री को एक हजार मिलियन से अधिक तारों का सर्वे करके आकाशगंगा का सबसे बड़ा, सटीक मैप बनाने का काम सौंपा गया है। इस ऑब्‍जर्वेट्री में 1 बिलियन पिक्सल कैमरा लगा है। साल 2013 में से अंतरिक्ष में लॉन्‍च किया गया था। उम्मीद है कि यह कई सौर ग्रहों और हजारों नए खगोलीय पिंडों की खोज करेगा। 

स्‍पेस से जुड़ी और खबरों की बात करें, तो अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को हमारी गैलेक्सी में एक अजब वस्तु खोज में पता चली है। इसे MAXI J1816-195 नाम दिया गया है और यह X-ray लाइट छोड़ रही है। वैज्ञानिकों को पहली बार इसके बारे में 7 जून को पता चला था। इसे जापान की स्पेस एजेंसी के ऑल स्काई एक्स रे इमेज (MAXI) के माध्यम कैप्चर किया गया है। इस खोज पर प्रकाश खगोल भौतिक शास्त्री हितोशी निगेरो और उनकी टीम ने डाला जो जापान की निहोन यूनिवर्सिटी से हैं। उन्होंने एस्ट्रोनॉमर टेलीग्राम में एक नोटिस के रूप में पोस्ट किया कि एक नए एक्स-रे स्रोत का पता लगाया गया है।  
 
 

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