कोरोना से ठीक हुए लोगों को न्यूरोलॉजिकिल परेशानियां होने का खतरा

कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से इसके प्रमाण मिले हैं कि इससे ठीक होने वाले लोगों को न्यूरोलॉजिकिल और साइकेट्रिक परेशानियां हो सकती हैं

विज्ञापन
Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 31 अगस्त 2022 17:58 IST
ख़ास बातें
  • कोरोना के बाद ऐसा होने के कारण को लेकर और रिसर्च करने की जरूरत है
  • स्टडी में शामिल अधिकतर मरीज अमेरिका से थे
  • इस महामारी की दूसरी लहर के दौरान काफी लोग संक्रमित हुए थे

न्यूरोलॉजिकल और साइकेट्रिक परेशानियों की आशंका व्यस्कों की तुलना में बच्चों में कम है

पिछले कुछ महीनों में दुनिया भर में कोरोना के मामलों में बड़ी कमी आई है। हालांकि, एक स्टडी से संकेत मिल रहा है कि कोरोना से ठीक हुए लोगों को वर्षों बाद भी डिमेंशिया और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियां होने का खतरा है। कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से इसके प्रमाण मिले हैं कि इससे ठीक होने वाले लोगों को न्यूरोलॉजिकिल और साइकेट्रिक परेशानियां हो सकती हैं। 

Lancet Psychiatry journal में प्रकाशित 12.5 लाख से अधिक मरीजों के हेल्थ रिकॉर्ड्स की एक स्टडी से भी इसके प्रमाण मिले हैं। इससे पहले इसी रिसर्च ग्रुप की ओर से की गई एक स्टडी में बताया गया था कि इस इंफेक्शन के मरीजों के ठीक होने के छह महीनों में उन्हें न्यूरोलॉजिकल और साइकेट्रिक परेशानियां होने का रिस्क बढ़ जाता है। हालांकि, लंबी अवधि में इन परेशानियों के रिस्क को लेकर बड़े स्तर पर डेटा की स्टडी नहीं हुई है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर Paul Harrison ने बताया, "कोरोना से कुछ न्यूरोलॉजिकल और साइकेट्रिक परेशानियां होने का रिस्क बढ़ने के पिछले निष्कर्षों की पुष्टि करने के अलावा इस स्टडी से संकेत मिला है कि इनमें से कुछ परेशानियां कम से कम दो वर्षों तक रह सकती हैं।" 

स्टडी में कहा गया है कि कोरोना के बाद ऐसा होने के कारण को लेकर और रिसर्च करने की जरूरत है। इसके साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि इन बीमारियों को रोकने या इनके उपचार के लिए क्या किया जा सकता है। स्टडी में दो वर्ष की अवधि में मरीजों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड्स से मिले कुछ न्यूरोलॉजिकल और साइकेट्रिक निष्कर्षों का एनालिसिस किया गया है। इनमें से अधिकतर मरीज अमेरिका से थे। कोरोना की विभिन्न लहरों के दौरान संक्रमित हुए मरीजों के रिकॉर्ड की तुलना इस महामारी के अल्फा, डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट्स के प्रभाव में अंतर को समझने के लिए भी की गई है।

हालांकि, कोरोना के बाद अधिकतर न्यूरोलॉजिकल और साइकेट्रिक परेशानियों की आशंका व्यस्कों की तुलना में बच्चों में कम है। इस महामारी की दूसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए थे। इसके बाद कई देशों में लोगों को तेजी से वैक्सीन लगाई थी। पिछले कुछ महीनों में महामारी के मामलों के साथ ही इसके प्रभाव में भी काफी कमी हुई है। 
 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

ये भी पढ़े: Study, COVID, records, treatment, America, Vaccine, Data

Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी ...और भी

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. Flipkart Freedom Sale: Nothing Phone 4b पर आया तगड़ा डिस्काउंट, यहां से खरीदें सस्ता
  2. Realme 16x 5G की आज से सेल शुरू, 7000mAh बैटरी वाले फोन पर पाएं लिमिटेड पीरियड डिस्काउंट
#ताज़ा ख़बरें
  1. BSNL मात्र ₹2399 में दे रहा 365 दिनों की वैधता के साथ डेली 2GB डाटा, अनलिमिटेड कॉल, Airtel-Jio को कड़ी टक्कर
  2. Flipkart Freedom Sale: Nothing Phone 4b पर आया तगड़ा डिस्काउंट, यहां से खरीदें सस्ता
  3. Honor Magic 9 सीरीज जल्द होगी लॉन्च, 200 मेगापिक्सल हो सकता है प्राइमरी कैमरा
  4. LPG गैस पर सब्सिडी पाने के लिए PMUY के लिए ऐसे करें अप्लाई
  5. iPhone 18 Pro का इंतजार? मिलेंगे तीन सबसे बड़े कैमरा अपग्रेड!
  6. Tecno Pova 8 Pro 5G के बैक पैनल पर मिलेगा सेकेंडरी डिस्प्ले, अगले सप्ताह भारत में लॉन्च
  7. Flipkart Freedom Sale: 65 इंच स्मार्ट टीवी पर मिल रहा जबरदस्त डिस्काउंट, कीमत ₹36 हजार से शुरू
  8. पहले Tip, फिर Ride? अब नहीं! सरकार ने Ola-Uber-Rapido को दिया सख्त निर्देश
  9. Flipkart Freedom Sale: ₹10 हजार सस्ता मिल रहा Google का 48MP कैमरा वाला फ्लैगशिप फोन
  10. 50 मेगापिक्सल के फ्रंट कैमरा के साथ लॉन्च हुआ Vivo S50t Vitality Edition, जानें प्राइस, फीचर्स
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.