चांद से टकराया था एस्टरॉयड? चट्टानों के टुकड़ों ने खोला पुराना राज!

नई स्टडी में दावा किया गया है कि चांद से एस्टरॉयड की टक्कर ने इसका रूप बदल दिया।

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Written by गैजेट्स 360 स्टाफ, अपडेटेड: 25 जनवरी 2026 20:34 IST
ख़ास बातें
  • चांद से एस्टरॉयड की टक्कर ने इसका रूप बदल दिया।
  • चांद का दूर वाला हिस्सा मारिया कहलाता है।
  • इस हिस्से में पोटाशियम का हैवी आइसोटोप पोटाशियम-41 मौजूद मिला।

अरबों साल पहले एक एस्टरॉयड चांद से टकराया था जिसने चांद की शेप को बदलकर रख दिया- स्टडी

Photo Credit: NASA

चांद से एस्टरॉयड की टक्कर हुई थी! ऐसा हम नहीं, एक नई स्टडी कह रही है। चीन ने अपने चांद मिशन के दौरान कुछ चट्टानों के सैम्पल इकट्ठा किए हैं जिनको स्टडी करके चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। अरबों साल पहले एक एस्टरॉयड चांद से टकराया था जिसने चांद की शेप को बदलकर रख दिया। कहा गया है कि यह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि इसका भीतरी ढांचा मौलिक रूप से बदल गया। चांद का दूर वाला हिस्सा, पास वाले से अलग क्यों दिखता है, अब यह नई खोज इस राज को खोल सकती है। 

एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि चांद से एस्टरॉयड की टक्कर ने इसका रूप बदल दिया। चीन के Chang'e-6 मिशन के सैम्पल बताते हैं कि इनमें पोटाशियम के भारी आइसोटोप मौजूद हैं। ये इस बात का सबूत हैं कि एक विशाल टक्कर से निकली गर्मी ने हल्के तत्वों को अंतरिक्ष की ओर धकेल दिया होगा। इसने चांद का ढांचा ही बदल दिया।  चांद का दूर वाला हिस्सा मारिया कहलाता है। यह इसके पास वाले हिस्से (जो हमें दिखाई देता है) से बहुत अलग है। यह नई खोज इसी गुत्थी को सुलझा सकती है। यानी मारिया पास वाले हिस्से से इतना अलग क्यों दिखता है, अब वैज्ञानिकों को इसका सबूत मिल सकता है। 

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Space.com के अनुसार, चीन के Chang'e-6 मिशन के दौरान चांद के साउथ पोल स्थित Aitken बेसिन से बेसाल्टिक चट्टानों के सैम्पल लाए गए थे। वैज्ञानिकों ने पाया कि इस हिस्से में पोटाशियम का हैवी आइसोटोप पोटाशियम-41 मौजूद है। जबकि धरती से पास वाले हिस्से में हल्का आइसोटोप पोटाशियम-39 मौजूद है। 

शोधकर्ताओं ने ब्रह्मांडीय किरणों और ज्वालामुखीय मिश्रण को कारण मानकर जांच की जिसमें पाया कि इनका प्रभाव न के बराबर ही है। इसलिए उन्होंने नतीजा निकाला कि आइसोटोप्स का यह असामान्य मिश्रण संभवतः किसी विशाल उल्कापिंड के प्रभाव से इस बेसिन के निर्माण का अवशेष है।

नई स्टडी कहती है कि एक विशाल टक्कर की घटना के कारण चंद्रमा से कई वाष्पशील तत्व (अर्थात, अपेक्षाकृत कम बॉइलिंग प्वाइंट वाले तत्व) वाष्पीकृत हुए होंगे। पोटेशियम-39 भी ऐसा ही एक तत्व है जिसका परमाणु द्रव्यमान अपेक्षाकृत कम है। यह किसी टक्कर के कारण बाहर फेंका गया होगा। जिसके बाद भारी एलिमेंट्स पीछे रह गए। वहां पर पर्याप्त लावा भी नहीं बना था जिसके कारण वहां पर ज्वालामुखीय सागर भी नजर नहीं आते। यही वजह हो सकती है कि चांद की दो विपरीत सतहें अलग-अलग चेहरा लिए हुए हैं। 
 

 

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