क्या है नेट न्यूट्रैलिटी? आम आदमी की भाषा में समझें

विज्ञापन
NDTV Corespondent, अपडेटेड: 8 अप्रैल 2016 13:58 IST
भारत में नेट न्यूट्रैलिटी पर डिबेट जारी है। सरकार बार-बार भरोसा दे रही है कि देश के हर नागरिक को इंटरनेट का अधिकार है। उसका मकसद डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देना है, ऐसे में वह नेट न्यूट्रैलिटी से कभी भी समझौता नहीं करेगी।

दरअसल, इंटरनेट पर न्यूट्रैलिटी को लेकर चर्चा तो कई दिनों से चल रही थी पर यह सुर्खियों में तब आया जब ट्राई में मोबाइल ऑपरेटरों के दबाव में इंटरनेट कंटेंट पर चार्ज लगाने पर इंटरनेट यूजर्स से फीडबैक मांगा। इंटरनेट यूजर्स ने तो 24 अप्रैल तक ट्राई को अपने विचार दे दिए हैं। अगर आपने फीडबैक नहीं दिया तो कोई बात नहीं, एक बार फिर से नेट न्यूट्रैलिटी को आम आदमी की भाषा में समझते हैं।

क्या है नेट न्यूट्रैलिटी?
नेट न्यूट्रैलिटी कोई परिभाषित परिस्थिति नहीं है। सिद्धांतों के आधार पर बात करें तो इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने नेटवर्क पर हर ट्रैफिक को एक समान तवज्जो देनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, एयरटेल ब्रांड को अपने नेटवर्क पर जानबूझकर किसी वेबसाइट या फिर किसी वेब कंटेंट को ब्लॉक या धीमा नहीं करना चाहिए। खासकर ऐसी परिस्थिति में जब उसका मकसद अपनी सर्विसेज को फायदा पहुंचाना हो।

नेट न्यूट्रैलिटी को कैसे नुकसान पहुंचा सकते हैं इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स?
Advertisement
इंटरनेट प्रोवाइडर्स पहले भी Skype जैसी वीडियो कॉलिंग सर्विसेज के लिए अलग से चार्ज लेने की बात कर चुके हैं। क्योंकि उन्हें लगता रहा है कि इस तरह के प्रोडक्ट्स उनके वॉयस कॉलिंग बिजनेस को नुकसान पहुंचाते हैं। यही नेट न्यूट्रैलिटी के कंसेप्ट के खिलाफ है जो सभी ट्रैफिक को बराबर तवज्जो देने की बात करता है।

क्या है जीरो रेटिंग?
Advertisement
एयरटेल ने इंटरनेट पर ओपन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। इसके जरिए आप कई मोबाइल एप्प का मुफ्त लाभ उठा सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म को एयरटेल जीरो का नाम दिया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर किसी एप्प के इस्तेमाल करने के लिए आपको डेटा चार्ज नहीं देना होगा। इसका बिल एयरटेल अपनी पार्टनर कंपनी या एप्प बनाने वाली कंपनी से लेगी।

भले ही अभी सुनने में यह कस्टमर के लिए फायदे का सौदा लगे पर एक समय के बाद इससे उपभोक्ता के हित को नुकसान पहुंचेगा। क्योंकि संभावना है कि कंज्यूमर्स फ्री सर्विस लेने के आदी हो जाएं। इस रेस में उन छोटी कंपनियों को नुकसान होगा, जिनके पास इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से पार्टनरशिप में जाने के लिए पूंजी नहीं है। धीरे-धीरे एक समय के बाद कंज्यूमर्स के लिए नए विकल्प कम होते जाएंगे।
Advertisement

वैसे इस रेस में एयरटेल अकेला नहीं है, फेसबुक ने भी इसी पॉलिसी पर Internet।org की शुरुआत की है। इससे पहले भी कई एप्स की कंपनियों ने टेलीकॉम ऑपरेटरों से मुफ्त सेवा के लिए टाई अप किया था।

इस पर होती है किसकी नजर?
Advertisement
भारत में इंटरनेट संबंधी सेवाओं की निगरानी की जिम्मेदारी Trai या भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की है। फिलहाल ट्राई ने इंटरनेट यूजर्स से प्रतिक्रिया मंगा ली है। आने वाले समय में अब वह अपने सुझाव सरकार को देगी।
 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

ये भी पढ़े: , Internet, Net Neutrality, Trai
Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. Tecno Camon Slim में हो सकती है 7,000mAh की बैटरी, US FCC पर लिस्टिंग
#ताज़ा ख़बरें
  1. भारत के स्मार्टफोन मार्केट में बड़ी गिरावट, Vivo का पहला स्थान बरकरार 
  2. Sony Xperia 1 VIII कल होगा लॉन्च, नए डिजाइन वाला रियर कैमरा सिस्टम
  3. Strategy ने बढ़ाया Bitcoin का रिजर्व, 4.3 करोड़ डॉलर का इनवेस्टमेंट
  4. दिनभर स्क्रीन देखने से आंखें दुखती हैं? Xiaomi का नया स्मार्ट Eye Mask देगा मसाज, जानें कीमत
  5. Huawei की 10,000mAh से ज्यादा कैपेसिटी की बैटरी के साथ स्मार्टफोन लॉन्च करने की तैयारी
  6. SanDisk Crayola USB Type-C Flash Drive लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स
  7. Tecno Camon Slim में हो सकती है 7,000mAh की बैटरी, US FCC पर लिस्टिंग
  8. Flipkart SASA LELE Sale: 15 हजार रुपये में खरीदें ये बेस्ट स्मार्टफोन, जबरदस्त गिरी कीमत
  9. Honor Magic 9 Pro Max में मिल सकते हैं 200 मेगापिक्सल के डुअल कैमरा 
  10. Airtel vs Jio: जानें किसका 365 दिनों वाला प्लान है बेस्ट, अनलिमिटेड 5G डाटा और कॉलिंग के साथ जबरदस्त फायदे
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.