साइबर क्रिमिनल फेक वेबसाइट और ऐप्स के जरिए लोगों का कीमती डाटा चुराते हैं और बैंक में मौजूद पैसों सेंध लगाते हैं।
Photo Credit: Unsplash/Markus Spiske
फेक वेबसाइट पर अक्सर लुभावने ऑफर्स आते हैं।
इंटरनेट पर मौजूद वेबसाइट और ऐप्स खरीदारी और उन बिजनेस की सर्विस प्रदान करती हैं। मगर साइबर क्रिमिनल फेक वेबसाइट और ऐप्स के जरिए लोगों का कीमती डाटा चुराते हैं और बैंक में मौजूद पैसों सेंध लगाते हैं। इन फेक वेबसाइट और ऐप्स पर अक्सर लुभावने ऑफर्स होते हैं जो कि भोले भाले यूजर्स को आकर्षित करने के लिए लगाए जाते हैं। सबसे खास बात यह है कि इंटरनेट स्कैम के लिए बनाई गई इन वेबसाइट और ऐप्स को हूबहू असली वेबसाइट्स के जैसा डिजाइन किया जाता है और मिलता जुलता यूआरएल तक दिया गया है, जिससे यूजर्स को असली वेबसाइट जैसा भ्रम हो जाता है। आज हम विस्तार से बात कर रहे हैं कि कैसे आप असली और फेक वेबसाइट और ऐप्स की पहचान करके ऑनलाइन खुद को सुरक्षित कर सकते हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
डोमेन का नाम ब्रांड से अलग
आमतौर पर फेक वेबसाइट का URL किसी जानी पहचानी कंपनी जैसा होता है, लेकिन उसमें थोड़े कीवर्ड को बदल दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर flipkart.com के बजाय flipkart-offers.in या फिर amazon.in के बजाय amaz0n-sale.co.in हो सकता है। साइबर फ्रड ऐसे मिलते-जुलते डोमेन का उपयोग करके यूजर्स के साथ फ्रॉड करते हैं।
स्पेलिंग में गलती और खराब भाषा
वैसे तो बड़ी कंपनियां प्रोफेशनल तरीके से तैयार किए गए कंटेंट और डिजाइन पर काफी खर्च करती हैं। वहीं फेक वेबसाइट पर उतना पैसा खर्च नहीं होता है तो ऐसे में किसी वेबसाइट पर शब्दों में गलत स्पेलिंग, व्याकरण में गलती और ग्राफिक्स की क्वालिटी खराब होती है। अगर आपको ऐसा कुछ नजर आता है तो ऐसी वेबसाइट फेक हो सकती हैं,क्योंकि इन्हें जल्दबाजी में तैयार किया जाता है।
सिक्योर कनेक्शन नहीं होगा
बड़ी कंपनियों की वेबसाइट के एड्रेस यानी कि URL की शुरुआत https://" से होती है। वहीं फेक वेबसाइट में ऐसा कुछ नहीं होता है और सिक्योरिटी हमलों के बारे में कोई ब्राउजर चेतावनी भी नहीं होती है। अगर SSL सर्टिफिकेट नहीं है तो हैकर्स यूजर की लॉगिन जानकारी या कार्ड की डिटेल जैसी निजी जानकारी चुरा सकते हैं।
बहुत कम कीमत या ऑफर
अगर किसी वेबसाइट पर ऐसे ऑफर हैं जिन पर विश्वास नहीं हो रहा है जैसे कि प्रीमियम ब्रांड या इलेक्ट्रॉनिक्स पर बहुत डिस्काउंटका विज्ञापन तो ऐसे में घोखा हो सकता है। फ्रॉड ऐसे ऑफर का उपयोग करते हैं, जिनमें बहुत कम कीमत होती है, जिससे यूजर्स जल्दी खरीदारी के लिए आकर्षित होते हैं।
बिजनेस की जानकारी न होना
अगर आपको किसी वेबसाइट पर असली ऑफिस एड्रेस, कस्टमर केयर नंबर या रजिस्टर्ड बिजनेस की कोई जानकारी नहीं मिलती है। वहीं कंपनी के डोमेन के बजाय Gmail, Yahoo या Hotmail जैसी फ्री सर्विस वाला कॉन्टैक्ट ईमेल नजर आता है तो ये फ्रॉड वेबसाइट होने का बहुत बड़ा संकेत है।
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