अमेरिका में फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट्स को बढ़ाने की संभावना कम हो गई है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने से बिटकॉइन और रिस्क वाले अन्य एसेट्स को नुकसान होता है
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का इस मार्केट पर असर पड़ सकता है
अमेरिका में इन्फ्लेशन के घटने से क्रिप्टो मार्केट में बुधवार को तेजी थी। मार्केट वैल्यू के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin ने कुछ सप्ताह के बाद 65,000 डॉलर से ज्यादा के लेवल को पार किया है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का इस मार्केट पर असर पड़ सकता है।
इस रिपोर्ट को पब्लिश करने पर क्रिप्टो एक्सचेंज Coinmarketcap पर बिटकॉइन का प्राइस 64,740 डॉलर से अधिक पर था। दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ethereum में भी तेजी थी और इसका प्राइस लगभग 1,880 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। Tether, BNB, Solana और XRP में भी प्रॉफिट था। पिछले एक दिन में बिटकॉइन का प्राइस चार प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है।
अमेरिका में जून में इन्फ्लेशन 4.2 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत की है। इसके अलावा कोर इन्फ्लेशन भी 2.9 प्रतिशत से कम होकर 2.6 प्रतिशत पर है। इससे फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट्स को बढ़ाने की संभावना कम हो गई है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने से बिटकॉइन और रिस्क वाले अन्य एसेट्स को नुकसान होता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ने से क्रिप्टो मार्केट पर प्रेशर हो सकता है।
भारत में क्रिप्टो सेगमेंट को लेकर महत्वपूर्ण रेगुलेटरी संस्थाओं ने आशंका जताई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसीज पर बैन लगाने से जुड़ी पॉलिसी लाने की जरूरत है। इससे पहले भी RBI ने इस सेगमेंट पर पर लगाने पर जोर दिया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने क्रिप्टोकरेंसीज को रेगुलेट करने या इस सेगमेंट पर बैन लगाने के बारे में कोई फैसला नहीं किया है। वर्चुअल डिजिट एसेट्स (VDA) से जुड़े जोखिमों को लेकर RBI जैसी महत्वपूर्ण एजेंसियों की चिंता बरकरार है। RBI का सुझाव है कि बैंकों और अन्य फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को क्रिप्टोकरेंसीज या प्राइवेट एंटिटीज के स्टेबलकॉइन्स को होल्ड करने, ट्रेडिंग या इनमें फंड लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। देश में बैंकों को क्रिप्टोकरेंसीज में डील करने से रोकने वाला कोई रूल नहीं है लेकिन RBI की चेतावनियों की वजह से अधिकतर बैंकों ने इस सेगमेंट से दूरी बनाई हुई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भी क्रिप्टोकरेंसीज में ट्रेडिंग को लेकर आशंका जताई है। विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों के जरिए होने वाली ट्रांजैक्शंस को ट्रैक करना मुश्किल होता है।
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