नई तकनीक पर काम कर रहे साइंटिस्‍ट, 100 प्रकाश वर्ष दूर स्थित ‘ग्रह’ भी साफ दिखाई देगा

यह अबतक इस्‍तेमाल में आ रही सबसे मजबूत इमेजिंग तकनीक की तुलना में 1,000 गुना ज्‍यादा सटीक होगी।

विज्ञापन
गैजेट्स 360 स्टाफ, अपडेटेड: 4 मई 2022 13:36 IST
ख़ास बातें
  • सौर गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का इस्‍तेमाल करना चाहते हैं साइंटिस्‍ट
  • सूर्य के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का उपयोग किया जा सकता है इस तकनीक में
  • गुरुत्वाकर्षण लेंस, प्रकाश यानी लाइट को मोड़ सकता है

एक्सोप्लैनेट से रोशनी को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक सूर्य के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का उपयोग कर सकते हैं।

ऐसे ग्रह जो सूर्य के अलावा अन्य तारों की परिक्रमा करते हैं, एक्सोप्लैनेट कहलाते हैं। पहले एक्सोप्लैनेट की खोज साल 1992 में हुई थी। तब से खगोलविदों ने ऐसे लगभग 5,000 ग्रहों की खोज की है, जो दूसरे तारों की परिक्रमा कर रहे हैं। जब भी कोई नया एक्सोप्लैनेट खोजा जाता है, तब उसके बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है। सिर्फ इतना ही कि एक एक्सोप्लैनेट मौजूद है और उसकी कुछ खूबियां हैं। बाकी सब एक रहस्‍य बना रहता है। इस इशू को सॉल्‍व करने के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एस्‍ट्रोफ‍िजिसिस्‍ट एक नई कॉन्‍सेप्‍चुअल इमेजिंग तकनीक पर काम कर रहे हैं। यह अबतक इस्‍तेमाल में आ रही सबसे मजबूत इमेजिंग तकनीक की तुलना में 1,000 गुना ज्‍यादा सटीक होगी। 

ऐसा लगता है कि रिसर्चर्स ने यह पता लगा लिया है कि हमारे सौर मंडल के बाहर के ग्रहों को देखने के लिए सौर गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का इस्‍तेमाल कैसे किया जाए। वैज्ञानिक जिस तकनीक को डेवलप कर रहे हैं, वह मौजूदा तकनीक के मुकाबले ज्‍यादा एडवांस्‍ड हो सकती है। 

एक्सोप्लैनेट से रोशनी को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक सूर्य के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए वह टेलिस्‍कोप, सूर्य और एक्सोप्लैनेट को एक सीध में करके ऐसा कर सकते हैं। 

गुरुत्वाकर्षण लेंस, प्रकाश यानी लाइट को मोड़ सकता है और इसकी मदद से दूर स्थित चीजों की इमेज बनाई जा सकती है। रिसर्चर्स ने द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल के 2 मई के एडिशन में अपनी फाइंडिंग्‍स को पब्‍लिश किया है। इस मेथड के लिए ज्‍यादा एडवांस्‍ड स्‍पेस ट्रैवल की जरूरत होगी। रिसर्चर्स के अनुसार इस कॉन्‍सेप्‍ट से दूसरी दुनिया के बारे में और क्‍या पता चलेगा, यह आने वाले वक्‍त में पता चलेगा। 

गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग के बारे में साल 1919 के आसपास सूर्य ग्रहण के दौरान एक प्रयोग के दौरान पता चला। यह पहला ऑब्‍जर्वेशनल सबूत था कि अल्बर्ट आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत (theory of relativity) सही था। यह इस बात का सबूत था कि गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश को मोड़ सकता है।
Advertisement

स्टैनफोर्ड में स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड साइंसेज में फ‍िजिक्‍स के प्रोफेसर और कावली इंस्टि‍ट्यूट फॉर पार्टिकल एस्ट्रोफिजिक्स एंड कॉस्मोलॉजी के डेप्‍युटी डायरेक्‍टर ब्रूस मैकिंटोश ने कहा कि इस तकनीक का इस्‍तेमाल करके वो बाकी सितारों की परिक्रमा करने वाले ग्रहों की तस्वीरें लेने में सक्षम होना चाहते हैं। रिसर्चर्स को उम्मीद है कि वो 100 प्रकाश वर्ष दूर एक ग्रह की तस्वीर ले सकेंगे। यह इतनी प्रभावशाली हो सकती है, जितनी अपोलो 8 द्वारा ली गई पृथ्वी की तस्वीर है।
 
 

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

द रेजिडेंट बोट । अगर आप मुझे ...और भी

Advertisement
Popular Brands
#ट्रेंडिंग टेक न्यूज़
  1. Oppo Find X10 में होगी 8000mAh बैटरी, 200MP के दो कैमरा!
#ताज़ा ख़बरें
  1. iQOO Z11 के इंटरनेशनल वेरिएंट में मिल सकता है Snapdragon 7s Gen 4 चिपसेट, Geekbench पर हुई लिस्टिंग
  2. Moto Buds 2 Plus भारत में लॉन्च: Bose ट्यूनिंग, ANC के साथ 40 घंटे की बैटरी! जानें कीमत
  3. YouTube के जिस फीचर के लिए लोग देते थें पैसे, अब फ्री यूजर्स भी उठाएंगे फायदा
  4. Vivo X Fold 6 में मिल सकता है 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा
  5. इंडिया में AI इमेज का क्रेज! ChatGPT Images 2.0 में सबसे आगे भारतीय
  6. Moto G47 हुआ लॉन्च 108MP कैमरा, 5200mAh बैटरी, फास्ट चार्जिंग के साथ, जानें कीमत
  7. Apple के iPhone हो सकते हैं महंगे, मेमोरी कंपोनेंट्स की कॉस्ट बढ़ने का असर!
  8. 180 दिन की बैटरी वाला स्मार्ट इलेक्ट्रिक टूथब्रश Xiaomi ने किया लॉन्च, जानें कीमत
  9. Moto G37 और Moto G37 Power इंटरनेशनल मार्केट में हुए लॉन्च, जानें प्राइस, स्पेसिफिकेशंस
  10. सिंगल चार्ज में 180 किमी रेंज वाली Oben Rorr Evo इलेक्ट्रिक बाइक लॉन्च, देखें फीचर्स
Download Our Apps
Available in Hindi
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.